नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का दिया न्योता, चांद पर बनेगी बस्ती
Kaushiki | Aug 12, 2026, 11:57 IST
NASA ISRO Cooperation
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने इसरो को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया है। बेंगलुरु में हुई भारत-अमेरिका स्पेस वर्किंग ग्रुप की बैठक में इस पर चर्चा हुई। इससे अंतरिक्ष सहयोग और मजबूत होगा।
NASA ISRO Cooperation: आज के समय में अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में भारत का नाम बहुत तेजी से आगे आ रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नासा ने अब इसरो को एक बहुत बड़ा सम्मान दिया है। नासा ने हमारे अपने अंतरिक्ष संगठन इसरो को अपने बहुत ही खास मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का खुला आमंत्रण भेजा है।
यह पूरा मामला हाल ही में बेंगलुरु शहर में आयोजित भारत-अमेरिका सिविल स्पेस ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की नौवीं बैठक के दौरान सामने आया। इस दो दिवसीय अहम बैठक में दोनों देशों के बड़े अंतरिक्ष वैज्ञानिक और अधिकारी शामिल हुए थे। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस जरूरी कार्यक्रम को संबोधित किया और दोनों देशों के रिश्तों को सराहा।
चांद की सतह पर इंसान को दोबारा सुरक्षित वापस भेजने और वहां एक मून बेस एस्टाब्लिशड करने का ये एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट में अब भारत की भागीदारी की बात चल रही है, जो हमारे देश के लिए गर्व की बात है।
![NASA ISRO]()
जानकारी के लिए बता दें कि साल 2023 में भारत ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए आर्टेमिस एकॉर्ड्स (Artemis Accords) पर साईन किए थे। ये अमेरिका के नेतृत्व में बना एक अंतरराष्ट्रीय स्पेस गठबंधन है। इसका मेन पर्पस अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल, चांद और अन्य ग्रहों की खोज के लिए सभी देशों को एक सामान्य नियमों के दायरे में लाना है।
जब भारत इस समझौते का हिस्सा बना था, तब वो दुनिया का 27वां देश था जिसने इस पर साइन किए थे। अब इस ग्लोबल एलायंस में कुल 70 देश शामिल हो चुके हैं। अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी किए गए ऑफिसियल स्टेटमेंट में ये बात साफ कही गई है कि नासा का यह न्योता दोनों देशों की पुरानी पार्टनरशिप को और मजबूत करता है।
इस बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने ओपन साइंटिफिक डेटा शेयरिंग यानी अंतरिक्ष से मिलने वाली वैज्ञानिक जानकारियों को आपस में साझा करने के नियमों पर भी खुलकर चर्चा की। इससे दोनों देशों के वैज्ञानिकों को रिसर्च करने में बहुत ज्यादा आसानी होगी।
बीते कुछ सालों में भारत और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसियां एक-दूसरे के बेहद करीब आ गई हैं। दोनों देशों ने अंतरिक्ष की असीम गहराइयों को टटोलने के लिए हाथ मिला लिया है। जब भारत ने आर्टेमिस एकॉर्ड्स को ज्वाइन किया था। उसी साल दोनों देशों ने मानव अंतरिक्ष उड़ान सहयोग के लिए एक मजबूत स्ट्रेटेजिक फ्रेमवर्क तैयार करने का फैसला भी किया था।
इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए नासा ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अपने आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर में स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग देने का वादा किया था। इसका मेन मकसद भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को प्राइवेट स्पेस मिशन के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक भेजना था।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की साल 2025 में हुई ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा इसी खास समझौते का एक शानदार परिणाम थी। इस सफल मिशन ने यह साबित कर दिया कि भारत और अमेरिका मिलकर किसी भी बड़े लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकते हैं।
![नासा ने इसरो को दिया 'मून बेस' का न्योता, जानें भारत को क्या फायदा होगा? | Nasa Invites Isro Moon Base Program India Us Space Cooperation]()
पिछले साल दोनों देशों की स्पेस एजेंसियों ने एक और बड़ा इतिहास रचा था। भारत और अमेरिका ने मिलकर लंबे समय से प्रतीक्षित निसार (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। ये मिशन सिंथेटिक अपर्चर रडार पर आधारित दुनिया का अपनी तरह का पहला ऐसा साझा अंतरिक्ष मिशन है, जो धरती की निगरानी करता है।
बेंगलुरु की हालिया बैठक में निसार मिशन के डेटा शेयरिंग और कामकाज की बहुत गहराई से समीक्षा की गई। दोनों पक्षों के वैज्ञानिकों ने इसे एक बेहद सक्सेसफुल जॉइंट वेंचर माना है। इस सफलता ने भविष्य के लिए और भी ज्यादा कठिन और जटिल अंतरिक्ष अभियानों का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है।
चांद पर इंसानी उड़ान भेजने और वहां चंद्रमा की सतह पर रहने के लिए एक मॉडर्न बेस बनाने जैसे प्रोजेक्ट्स में इस अनुभव का बहुत बड़ा फायदा मिलेगा। ये ऑफर उसी शानदार सिलसिले की एक स्वाभाविक और मजबूत कड़ी माना जा रहा है।
![डर या मजबूरी... नासा चांद पर क्यों नहीं भेज पा रहा इंसान, पहले रिकॉर्ड बनाया फिर]()
इसरो के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस बैठक के बारे में कई खास बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि पांच और छह अगस्त को हुई इस मीटिंग का मेन फोकस दोनों देशों के बीच कमर्शियल और सिविल स्पेस पार्टनरशिप को और ज्यादा फैलाना था।
बैठक में इस बात पर भी लंबी चर्चा हुई कि आने वाले समय में चांद और उससे भी आगे के अंतरिक्ष मिशनों को कैसे संयुक्त रूप से अंजाम दिया जाए। वैज्ञानिकों ने उन खास क्षेत्रों की भी पहचान की है जहां दोनों देश अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और ज्ञान का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अमेरिका के साथ इस तरह की तकनीकी साझेदारी से भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम को बहुत तेज गति मिलेगी। आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका मिलकर अंतरिक्ष अनुसंधान में कुछ ऐसा कर सकते हैं जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन जाएगा।
![नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में शामिल किया — NewsDarpan]()
नासा इस समय अपने चर्चित आर्टेमिस प्रोग्राम पर बहुत तेजी से काम कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत इंसानों को एक बार फिर से चांद की धरती पर उतारने की तैयारी चल रही है। इस दिशा में अब तक दो शुरुआती उड़ानें सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं।
पहली उड़ान नवंबर 2022 में बिना इंसानों के यानी अनक्रूड भेजी गई थी। इसके बाद इसी साल अप्रैल में एक और क्रूड फ्लाइट चांद के चक्कर लगाकर सुरक्षित वापस लौटी है, हालांकि इस बार लैंडिंग नहीं की गई थी। नासा की योजना है कि साल 2028 तक अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार इंसानों को दोबारा चांद पर उतारा जाए।
दूसरी तरफ हमारा अपना इसरो भी अपने गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान (Gaganyaan Human Spaceflight) कार्यक्रम पर बहुत तेजी से काम कर रहा है। इसरो(ISRO Achievements) की भविष्य की योजनाओं में साल 2040 तक चांद की धरती पर भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने का बड़ा लक्ष्य शामिल है। नासा के इस मून बेस प्रोग्राम (गगनयान मिशन) में शामिल होने से इसरो के इन सपनों को पंख लग सकते हैं।
![NASA चांद पर कहां बनाएगा अपना बेस... जानिए सारी प्लानिंग - NASA searching site for its moon base tstr - AajTak]()
बेंगलुरु में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता कई बड़े दिग्गजों ने मिलकर की। इसमें इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के डायरेक्टर एम. संकरन मुख्य रूप से शामिल थे। उनके साथ अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी वेस्ले ब्रुक्स भी मौजूद रहे।
नासा की तरफ से इंटरनेशनल और इंटरएजेंसी रिलेशंस की एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर कैथलीन कारिका ने इस मीटिंग की कमान संभाली। दोनों देशों के इन बड़े अधिकारियों की मौजूदगी यह बताती है कि यह समझौता दोनों सरकारों के लिए कितना अधिक महत्वपूर्ण है।
यह पूरी बातचीत भारत-अमेरिका ट्रस्ट इनिशिएटिव के तहत आगे बढ़ाई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फरवरी 2025 में हुई ज्वाइंट लीडर्स की बैठक में जो समझौते हुए थे, यह बैठक उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
![स्पेस की दुनिया में नए शिखर पर भारत, NASA ने 'मून बेस मिशन' में पार्टनर बनने के लिए ISRO को दिया न्योता - पर्दाफाश]()
इस बैठक में केवल चांद की यात्रा तक ही सीमित बातें नहीं हुईं, बल्कि अंतरिक्ष के कचरे और उसकी स्थिरता पर भी गंभीर मंथन किया गया। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष समिति यानी COPUOS (Committee on the Peaceful Uses of Outer Space) के नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करने की बात दोहराई।
अंतरिक्ष में लंबे समय तक गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहें, इसके लिए आपसी सहयोग को और ज्यादा मजबूत करने पर जोर दिया गया। आधुनिक दौर में स्पेस जंक एक बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
इससे हमारे महंगे उपग्रहों को खतरा पैदा होता है। इन सभी गंभीर मुद्दों से निपटने के लिए भारत और अमेरिका ने मिलकर काम करने का पक्का इरादा जताया है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए अंतरिक्ष सुरक्षित रह सके।
References:
ISRO ने स्पेस मिशन में किया बड़ा बदलाव! अब आम भारतीय भी कर सकेंगे अंतरिक्ष की यात्री
ISRO YUVIKA 2026 में स्कूल स्टूडेंट्स के लिए साइंटिस्ट बनने का मौका, इसरो उठाएगा सारा खर्चा
टैक्स कलेक्शन में बंपर उछाल: डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 23.09% बढ़ा, जानें डेटा
नासा का आर्टेमिस II मिशन: चंद्रमा की ओर पहला मानव मिशन, क्या होगा इस मिशन का रूट?
यह पूरा मामला हाल ही में बेंगलुरु शहर में आयोजित भारत-अमेरिका सिविल स्पेस ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की नौवीं बैठक के दौरान सामने आया। इस दो दिवसीय अहम बैठक में दोनों देशों के बड़े अंतरिक्ष वैज्ञानिक और अधिकारी शामिल हुए थे। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस जरूरी कार्यक्रम को संबोधित किया और दोनों देशों के रिश्तों को सराहा।
चांद की सतह पर इंसान को दोबारा सुरक्षित वापस भेजने और वहां एक मून बेस एस्टाब्लिशड करने का ये एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट में अब भारत की भागीदारी की बात चल रही है, जो हमारे देश के लिए गर्व की बात है।
NASA ISRO
क्या है आर्टेमिस एकॉर्ड्स
जब भारत इस समझौते का हिस्सा बना था, तब वो दुनिया का 27वां देश था जिसने इस पर साइन किए थे। अब इस ग्लोबल एलायंस में कुल 70 देश शामिल हो चुके हैं। अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी किए गए ऑफिसियल स्टेटमेंट में ये बात साफ कही गई है कि नासा का यह न्योता दोनों देशों की पुरानी पार्टनरशिप को और मजबूत करता है।
इस बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने ओपन साइंटिफिक डेटा शेयरिंग यानी अंतरिक्ष से मिलने वाली वैज्ञानिक जानकारियों को आपस में साझा करने के नियमों पर भी खुलकर चर्चा की। इससे दोनों देशों के वैज्ञानिकों को रिसर्च करने में बहुत ज्यादा आसानी होगी।
कैसे मजबूत हुए भारत और अमेरिका के रिश्ते
इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए नासा ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अपने आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर में स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग देने का वादा किया था। इसका मेन मकसद भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को प्राइवेट स्पेस मिशन के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक भेजना था।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की साल 2025 में हुई ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा इसी खास समझौते का एक शानदार परिणाम थी। इस सफल मिशन ने यह साबित कर दिया कि भारत और अमेरिका मिलकर किसी भी बड़े लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकते हैं।
नासा ने इसरो को दिया 'मून बेस' का न्योता, जानें भारत को क्या फायदा होगा? | Nasa Invites Isro Moon Base Program India Us Space Cooperation
NISAR मिशन की सफलता
बेंगलुरु की हालिया बैठक में निसार मिशन के डेटा शेयरिंग और कामकाज की बहुत गहराई से समीक्षा की गई। दोनों पक्षों के वैज्ञानिकों ने इसे एक बेहद सक्सेसफुल जॉइंट वेंचर माना है। इस सफलता ने भविष्य के लिए और भी ज्यादा कठिन और जटिल अंतरिक्ष अभियानों का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है।
चांद पर इंसानी उड़ान भेजने और वहां चंद्रमा की सतह पर रहने के लिए एक मॉडर्न बेस बनाने जैसे प्रोजेक्ट्स में इस अनुभव का बहुत बड़ा फायदा मिलेगा। ये ऑफर उसी शानदार सिलसिले की एक स्वाभाविक और मजबूत कड़ी माना जा रहा है।
डर या मजबूरी... नासा चांद पर क्यों नहीं भेज पा रहा इंसान, पहले रिकॉर्ड बनाया फिर
इसरो वैज्ञानिक ने दी बैठक की पूरी जानकारी
बैठक में इस बात पर भी लंबी चर्चा हुई कि आने वाले समय में चांद और उससे भी आगे के अंतरिक्ष मिशनों को कैसे संयुक्त रूप से अंजाम दिया जाए। वैज्ञानिकों ने उन खास क्षेत्रों की भी पहचान की है जहां दोनों देश अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और ज्ञान का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अमेरिका के साथ इस तरह की तकनीकी साझेदारी से भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम को बहुत तेज गति मिलेगी। आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका मिलकर अंतरिक्ष अनुसंधान में कुछ ऐसा कर सकते हैं जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन जाएगा।
नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में शामिल किया — NewsDarpan
नासा-इसरो के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य
पहली उड़ान नवंबर 2022 में बिना इंसानों के यानी अनक्रूड भेजी गई थी। इसके बाद इसी साल अप्रैल में एक और क्रूड फ्लाइट चांद के चक्कर लगाकर सुरक्षित वापस लौटी है, हालांकि इस बार लैंडिंग नहीं की गई थी। नासा की योजना है कि साल 2028 तक अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार इंसानों को दोबारा चांद पर उतारा जाए।
दूसरी तरफ हमारा अपना इसरो भी अपने गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान (Gaganyaan Human Spaceflight) कार्यक्रम पर बहुत तेजी से काम कर रहा है। इसरो(ISRO Achievements) की भविष्य की योजनाओं में साल 2040 तक चांद की धरती पर भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने का बड़ा लक्ष्य शामिल है। नासा के इस मून बेस प्रोग्राम (गगनयान मिशन) में शामिल होने से इसरो के इन सपनों को पंख लग सकते हैं।
NASA चांद पर कहां बनाएगा अपना बेस... जानिए सारी प्लानिंग - NASA searching site for its moon base tstr - AajTak
बैठक में शामिल हुए दोनों देशों के बड़े दिग्गज
नासा की तरफ से इंटरनेशनल और इंटरएजेंसी रिलेशंस की एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर कैथलीन कारिका ने इस मीटिंग की कमान संभाली। दोनों देशों के इन बड़े अधिकारियों की मौजूदगी यह बताती है कि यह समझौता दोनों सरकारों के लिए कितना अधिक महत्वपूर्ण है।
यह पूरी बातचीत भारत-अमेरिका ट्रस्ट इनिशिएटिव के तहत आगे बढ़ाई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फरवरी 2025 में हुई ज्वाइंट लीडर्स की बैठक में जो समझौते हुए थे, यह बैठक उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
स्पेस की दुनिया में नए शिखर पर भारत, NASA ने 'मून बेस मिशन' में पार्टनर बनने के लिए ISRO को दिया न्योता - पर्दाफाश
अंतरिक्ष की स्थिरता और भविष्य की नीतियां
अंतरिक्ष में लंबे समय तक गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहें, इसके लिए आपसी सहयोग को और ज्यादा मजबूत करने पर जोर दिया गया। आधुनिक दौर में स्पेस जंक एक बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
इससे हमारे महंगे उपग्रहों को खतरा पैदा होता है। इन सभी गंभीर मुद्दों से निपटने के लिए भारत और अमेरिका ने मिलकर काम करने का पक्का इरादा जताया है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए अंतरिक्ष सुरक्षित रह सके।
References:
- U.S. Embassy, India
- Indian Space Research Organisation
FAQ
- नासा ने इसरो को किस कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया है?
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने इसरो को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया है। इस प्रोग्राम का उद्देश्य चांद पर इंसानों को दोबारा भेजना और वहां एक स्थाई मानव बस्ती स्थापित करना है। - भारत ने आर्टेमिस एकॉर्ड्स समझौते पर कब हस्ताक्षर किए थे?
भारत ने साल 2023 में अमेरिका के नेतृत्व वाले स्पेस गठबंधन आर्टेमिस एकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर किए थे। भारत इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला दुनिया का 27वां देश बना था। - इसरो का चांद पर इंसान भेजने का क्या लक्ष्य है?
इसरो अपने गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के तहत भविष्य में काम कर रहा है। अंतरिक्ष एजेंसी की योजना साल 2040 तक चांद की सतह पर भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की है।
ISRO ने स्पेस मिशन में किया बड़ा बदलाव! अब आम भारतीय भी कर सकेंगे अंतरिक्ष की यात्री
ISRO YUVIKA 2026 में स्कूल स्टूडेंट्स के लिए साइंटिस्ट बनने का मौका, इसरो उठाएगा सारा खर्चा
टैक्स कलेक्शन में बंपर उछाल: डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 23.09% बढ़ा, जानें डेटा
नासा का आर्टेमिस II मिशन: चंद्रमा की ओर पहला मानव मिशन, क्या होगा इस मिशन का रूट?
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA