नेहरू-पटेल की वो बहस जिसने सिविल सेवा को दिया जीवनदान, जानें National Civil Services Day की कहानी
Kaushiki | Apr 21, 2026, 10:00 IST
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भारत में हर साल 21 अप्रैल को नेशनल सिविल सर्विस डे मनाया जाता है। जानिए कैसे सरदार पटेल ने सिविल सेवा को स्टील फ्रेम बनाकर बचाया था। चलिए आज हम इसी दिलचस्प कहानी के बारे में डिटेल से बात करेंगे।
National Civil Services Day: क्या आप जानते हैं कि भारत को चलाने वाली असली ताकत कौन है? हमारे देश के सिविल सेवक यानी IAS और IPS अधिकारी प्रशासन की रीढ़ हैं। हर साल 21 अप्रैल को हम नेशनल सिविल सर्विस डे मनाते हैं।
ये दिन उन अधिकारियों के सम्मान में समर्पित है जो दिन-रात काम करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आजादी के समय ये सर्विस खत्म होने वाली थी? पंडित नेहरू और सरदार पटेल के बीच इसे लेकर काफी अलग विचार थे। चलिए आज हम इसी दिलचस्प कहानी के बारे में डिटेल से बात करेंगे।
![सरदार पटेल के किस कदम से ख़फा हो गए थे जवाहरलाल नेहरू? यहां पढ़ें पूरा किस्सा | Sardar vallabhbhai patel jayanti 2019: Which step of Sardar Patel had upset Jawaharlal Nehru]()
आजादी के तुरंत बाद भारत में एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर पूरी तरह बिखरा हुआ था। अंग्रेजों के जमाने की इंडियन सिविल सर्विस (ICS) को लेकर नेहरू खुश नहीं थे।
पंडित नेहरू का मानना था कि ये पुरानी व्यवस्था अब खत्म होनी चाहिए। वे चाहते थे कि स्वतंत्र भारत के लिए बिल्कुल नया सिस्टम तैयार किया जाए। नेहरू जी पुरानी ब्यूरोक्रेसी को कोलोनियल मेंटालिटी का एंब्लेम मानते थे।
एमए मथाई की किताब में इस टकराव का जिक्र विस्तार से मिलता है। हालांकि, देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की सोच अलग थी।
पटेल जानते थे कि बिना अनुभवी अफसरों के देश चलाना बहुत मुश्किल होगा। उन्होंने नेहरू के विचार का डटकर विरोध किया और अफसरों का बचाव किया।
![National Civil Services Day: History and Background - Sanskriti IAS]()
साल 1947 में 21 अप्रैल के दिन एक ऐतिहासिक घटना घटी थी। दिल्ली के मेटकॉफ हाउस में सरदार पटेल ने युवा अफसरों को संबोधित किया। उन्होंने सिविल सेवकों को पहली बार भारत का स्टील फ्रेम कहा था।
पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) का मानना था कि अफसर ही देश की एकता को बनाए रखेंगे। उन्होंने अधिकारियों को जनता का सेवक बनकर काम करने की सलाह दी।
इस भाषण की याद में 2006 से यह दिवस मनाया जाने लगा। पटेल के प्रयासों की वजह से ही आज हमारे पास IAS सर्विस है। इसीलिए सरदार पटेल को सिविल सेवा का संरक्षक संत भी कहा जाता है।
![National Civil Services Day: History and Background - Sanskriti IAS]()
भारत में मॉडर्न सिविल सेवा (national civil services day) की नींव वारेन हेस्टिंग्स ने रखी थी। लेकिन इसमें बड़े सुधार करने का श्रेय चार्ल्स कार्नवालिस को जाता है। इसीलिए कार्नवालिस को भारतीय सिविल सेवा का जनक माना जाता है।
पहले ये परीक्षा केवल लंदन में होती थी, जो बहुत कठिन थी। साल 1922 में पहली बार ये परीक्षा भारत में आयोजित की गई थी। रवींद्रनाथ टैगोर के भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर पहले भारतीय सिविल सेवक बने थे।
अन्ना जॉर्ज मल्होत्रा भारत की पहली महिला IAS अधिकारी के रूप में चुनी गईं। वहीं, किरण बेदी देश की पहली महिला IPS बनकर इतिहास रच चुकी हैं।
![National Civil Services Day 2024 know less known facts about Sardar Vallabhbhai Patel who started this day | National Civil Services Day 2024 | Hindi News, Sardar Vallabhbhai Patel]()
साल 1926 में पहली बार संघीय लोक सेवा आयोग (Federal Public Service Commission) का गठन हुआ था। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) कर दिया गया।
अब UPSC हर साल कठिन परीक्षा के जरिए योग्य अधिकारी चुनता है। ये संस्था पूरी पारदर्शिता के साथ देश के लिए क्रीम अफसर तलाशती है। सिविल सेवा दिवस पर बेहतरीन काम करने वाले अफसरों को अवॉर्ड मिलते हैं।
प्रधानमंत्री खुद लोक प्रशासन में उत्कृष्टता पुरस्कार (Excellence in Public Administration Award) देकर उन्हें सम्मानित करते हैं। ये दिन अधिकारियों को उनके कर्तव्य और सेवा की याद दिलाता है। राष्ट्र के विकास में इन सिविल सेवकों का योगदान बहुत बड़ा है।
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ये दिन उन अधिकारियों के सम्मान में समर्पित है जो दिन-रात काम करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आजादी के समय ये सर्विस खत्म होने वाली थी? पंडित नेहरू और सरदार पटेल के बीच इसे लेकर काफी अलग विचार थे। चलिए आज हम इसी दिलचस्प कहानी के बारे में डिटेल से बात करेंगे।
सरदार पटेल के किस कदम से ख़फा हो गए थे जवाहरलाल नेहरू? यहां पढ़ें पूरा किस्सा | Sardar vallabhbhai patel jayanti 2019: Which step of Sardar Patel had upset Jawaharlal Nehru
जब नेहरू और पटेल के बीच हुआ मतभेद
पंडित नेहरू का मानना था कि ये पुरानी व्यवस्था अब खत्म होनी चाहिए। वे चाहते थे कि स्वतंत्र भारत के लिए बिल्कुल नया सिस्टम तैयार किया जाए। नेहरू जी पुरानी ब्यूरोक्रेसी को कोलोनियल मेंटालिटी का एंब्लेम मानते थे।
एमए मथाई की किताब में इस टकराव का जिक्र विस्तार से मिलता है। हालांकि, देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की सोच अलग थी।
पटेल जानते थे कि बिना अनुभवी अफसरों के देश चलाना बहुत मुश्किल होगा। उन्होंने नेहरू के विचार का डटकर विरोध किया और अफसरों का बचाव किया।
National Civil Services Day: History and Background - Sanskriti IAS
21 अप्रैल: सरदार पटेल का स्टील फ्रेम वाला भाषण
पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) का मानना था कि अफसर ही देश की एकता को बनाए रखेंगे। उन्होंने अधिकारियों को जनता का सेवक बनकर काम करने की सलाह दी।
इस भाषण की याद में 2006 से यह दिवस मनाया जाने लगा। पटेल के प्रयासों की वजह से ही आज हमारे पास IAS सर्विस है। इसीलिए सरदार पटेल को सिविल सेवा का संरक्षक संत भी कहा जाता है।
National Civil Services Day: History and Background - Sanskriti IAS
सिविल सेवा का इतिहास
पहले ये परीक्षा केवल लंदन में होती थी, जो बहुत कठिन थी। साल 1922 में पहली बार ये परीक्षा भारत में आयोजित की गई थी। रवींद्रनाथ टैगोर के भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर पहले भारतीय सिविल सेवक बने थे।
अन्ना जॉर्ज मल्होत्रा भारत की पहली महिला IAS अधिकारी के रूप में चुनी गईं। वहीं, किरण बेदी देश की पहली महिला IPS बनकर इतिहास रच चुकी हैं।
National Civil Services Day 2024 know less known facts about Sardar Vallabhbhai Patel who started this day | National Civil Services Day 2024 | Hindi News, Sardar Vallabhbhai Patel
मॉडर्न इंडिया में इसका रोल
अब UPSC हर साल कठिन परीक्षा के जरिए योग्य अधिकारी चुनता है। ये संस्था पूरी पारदर्शिता के साथ देश के लिए क्रीम अफसर तलाशती है। सिविल सेवा दिवस पर बेहतरीन काम करने वाले अफसरों को अवॉर्ड मिलते हैं।
प्रधानमंत्री खुद लोक प्रशासन में उत्कृष्टता पुरस्कार (Excellence in Public Administration Award) देकर उन्हें सम्मानित करते हैं। ये दिन अधिकारियों को उनके कर्तव्य और सेवा की याद दिलाता है। राष्ट्र के विकास में इन सिविल सेवकों का योगदान बहुत बड़ा है।
ये खबरें भी पढ़ें....
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