20 अप्रैल का इतिहास: Adolf Hitler, एक साधारण पेंटर कैसे बना दुनिया का सबसे खूंखार तानाशाह?
Kaushiki | Apr 20, 2026, 08:00 IST
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एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 को हुआ था। वह नाजी पार्टी का नेता और एक क्रूर तानाशाह बना। उसने अपनी ताक़त से पूरी दुनिया को हिला दिया था।
आज के दिन की कहानी: कहानी शुरू होती है ऑस्ट्रिया के एक छोटे से कस्बे ब्रौनाउ एम इन से। तारीख थी 20 अप्रैल 1889, जब एक साधारण परिवार में हिटलर का जन्म हुआ।
किसी ने नहीं सोचा था कि यह बच्चा एक दिन दुनिया को दहला देगा। वह बचपन में एक महान कलाकार या पेंटर बनना चाहता था। उसने वियना के आर्ट कॉलेज में दाखिले की बहुत कोशिश की थी। लेकिन किस्मत को शायद दुनिया का विनाश मंजूर था, उसे रिजेक्शन मिला।
यही रिजेक्शन हिटलर के मन में नफरत और बदले की आग बन गया। प्रथम विश्व युद्ध ने उसे एक साधारण सिपाही से नेता बना दिया। उसकी आवाज में जादू था, जो लोगों को दीवाना बना देता था।
![एडॉल्फ हिटलर: प्रारंभिक वर्ष, 1889-1921 | होलोकॉस्ट विश्वकोश]()
प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी बहुत बुरी हालत में था। लोग गरीबी, बेरोजगारी और अपमान की आग में जल रहे थे। हिटलर ने इसी गुस्से को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।
हिटलर ने नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी यानी नाजी पार्टी बनाई। वह लोगों को एक सुनहरे जर्मनी का सपना दिखाने लगा था। हिटलर की भाषण देने की कला बहुत ही अद्भुत और प्रभावशाली थी। वह मंच पर खड़े होकर लोगों के जज्बात से खेलता था।
साल 1933 में वह जर्मनी का चांसलर और फिर तानाशाह बन गया। उसने खुद को फ्यूहरर यानी सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया था। उसने लोकतंत्र को खत्म कर अपनी मनमर्जी चलाना शुरू किया।
![एडॉल्फ हिटलर: सत्ता में उदय, प्रभाव और मृत्यु | इतिहास]()
तानाशाह वह होता है जो अपनी सत्ता के आगे कुछ नहीं सुनता। हिटलर ने जर्मनी में विपक्ष और मीडिया की आवाज पूरी तरह दबा दी। उसने अपनी निजी सेना SS और गुप्त पुलिस गेस्टापो बनाई थी।
जो भी उसके खिलाफ बोलता, उसे सीधे मौत की सजा मिलती थी। हिटलर की सबसे बड़ी क्रूरता होलोकॉस्ट (Holocaust) के नाम से जानी जाती है। उसने लाखों यहूदियों को गैस चैंबरों में डालकर बेरहमी से मार दिया।
हिटलर का मानना था कि केवल जर्मन आर्य ही दुनिया पर राज करेंगे। इसी नस्ली नफरत ने करोड़ों निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। उसकी तानाशाही ने मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह से कुचल दिया था।
![एडॉल्फ हिटलर | इतिहास, जीवनी, कार्य और तथ्य | ब्रिटानिका]()
हिटलर और भारत के रिश्तों की बात अक्सर चर्चा में रहती है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस हिटलर से मिलने जर्मनी गए थे। नेताजी चाहते थे कि हिटलर भारत की आजादी में मदद करे।
हिटलर ने नेताजी को आजाद हिंद फौज बनाने में सहयोग दिया था। हालांकि, हिटलर की विचारधारा भारतीयों के लिए बहुत अच्छी नहीं थी। उसने अपनी किताब 'मीन कैम्फ' में भारतीयों के प्रति कड़वाहट दिखाई थी।
हिटलर ने कभी भी खुले दिल से भारत की आज़ादी का समर्थन नहीं किया। लेकिन नेताजी के व्यक्तित्व से वह काफी प्रभावित जरूर हुआ था। हिटलर ने ही सुभाष चंद्र बोस को पहली बार 'नेताजी' कहा था। यह मुलाकात इतिहास के पन्नों में एक दिलचस्प मोड़ मानी जाती है।
![एडॉल्फ हिटलर: जीवनी, तथ्य, सत्ता में उदय और तस्वीरें | हिस्ट्रीएक्स्ट्रा]()
यह कहना मुश्किल है कि तानाशाह के काम पूरी तरह सही थे। लेकिन उसने जर्मनी की अर्थव्यवस्था को कुछ समय के लिए संभाला था। उसने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में फॉक्सवैगन जैसी मशहूर कार कंपनी शुरू करवाई।
जर्मनी में सड़कों का जाल बिछाने का श्रेय भी उसे जाता है। उसने बेरोज़गारी दूर करने के लिए कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शुरू किए। विज्ञान और तकनीक के मामले में जर्मनी उसके दौर में आगे बढ़ा।
रॉकेट तकनीक और जेट विमानों की शुरुआत भी उसी समय हुई थी। लेकिन ये सभी विकास युद्ध की तैयारी के लिए किए गए थे। मानवता की भलाई के लिए इनका उद्देश्य कभी नहीं रहा था।
![एडॉल्फ हिटलर: जीवनी, तथ्य, सत्ता में उदय और तस्वीरें | हिस्ट्रीएक्स्ट्रा]()
साल 1939 में हिटलर ने पोलैंड पर हमला कर युद्ध छेड़ा। यह दूसरे विश्व युद्ध की एक भयावह और खूनी शुरुआत थी। शुरुआती सालों में हिटलर की सेना ने लगभग पूरे यूरोप को जीता। लेकिन उसकी सबसे बड़ी गलती रूस (सोवियत संघ) पर हमला करना थी।
रूसी ठंड और वहां की सेना ने नाजियों की कमर तोड़ दी। धीरे-धीरे मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी को हर तरफ से घेर लिया। 30 अप्रैल 1945 को हिटलर को अपनी हार साफ दिखने लगी। उसने बर्लिन में अपने भूमिगत बंकर (Führerbunker) में अपनी पत्नी इवा ब्रौन के साथ आत्महत्या कर ली।
हिटलर ने खुद को सिर में गोली मारी, जबकि इवा ने सायनाइड (जहर) खाकर अपनी जान दी। हिटलर की वसीयत के मुताबिक, उसके शव को बंकर के बाहर ले जाकर जला दिया गया था ताकि दुश्मन उसके शरीर का अपमान न कर सकें। इस तरह एक तानाशाह के आतंक का अंत हुआ।
दुनिया के सबसे खूंखार तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने 30 अप्रैल 1945 को आत्महत्या की थी। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह थी उसकी करारी हार का डर।
दूसरे विश्व युद्ध के अंत में सोवियत संघ की रेड आर्मी ने बर्लिन को चारों तरफ से घेर लिया था। हिटलर को पता था कि अगर वह पकड़ा गया, तो उसे सड़कों पर घसीटा जाएगा और बड़ी बेइज्जती के साथ मारा जाएगा।
वह मुसोलिनी की तरह अपमानजनक मौत नहीं चाहता था। इसलिए, उसने अपने भूमिगत बंकर में खुद को गोली मार ली और अपनी पत्नी इवा ब्रौन को जहर दे दिया। हार का यही डर उसकी मौत की असली वजह बना।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 20 अप्रैल का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 20 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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किसी ने नहीं सोचा था कि यह बच्चा एक दिन दुनिया को दहला देगा। वह बचपन में एक महान कलाकार या पेंटर बनना चाहता था। उसने वियना के आर्ट कॉलेज में दाखिले की बहुत कोशिश की थी। लेकिन किस्मत को शायद दुनिया का विनाश मंजूर था, उसे रिजेक्शन मिला।
यही रिजेक्शन हिटलर के मन में नफरत और बदले की आग बन गया। प्रथम विश्व युद्ध ने उसे एक साधारण सिपाही से नेता बना दिया। उसकी आवाज में जादू था, जो लोगों को दीवाना बना देता था।
एडॉल्फ हिटलर: प्रारंभिक वर्ष, 1889-1921 | होलोकॉस्ट विश्वकोश
हिटलर का उदय: नाजी पार्टी और तानाशाही
हिटलर ने नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी यानी नाजी पार्टी बनाई। वह लोगों को एक सुनहरे जर्मनी का सपना दिखाने लगा था। हिटलर की भाषण देने की कला बहुत ही अद्भुत और प्रभावशाली थी। वह मंच पर खड़े होकर लोगों के जज्बात से खेलता था।
साल 1933 में वह जर्मनी का चांसलर और फिर तानाशाह बन गया। उसने खुद को फ्यूहरर यानी सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया था। उसने लोकतंत्र को खत्म कर अपनी मनमर्जी चलाना शुरू किया।
एडॉल्फ हिटलर: सत्ता में उदय, प्रभाव और मृत्यु | इतिहास
क्यों कहा गया हिटलर को तानाशाह
जो भी उसके खिलाफ बोलता, उसे सीधे मौत की सजा मिलती थी। हिटलर की सबसे बड़ी क्रूरता होलोकॉस्ट (Holocaust) के नाम से जानी जाती है। उसने लाखों यहूदियों को गैस चैंबरों में डालकर बेरहमी से मार दिया।
हिटलर का मानना था कि केवल जर्मन आर्य ही दुनिया पर राज करेंगे। इसी नस्ली नफरत ने करोड़ों निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। उसकी तानाशाही ने मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह से कुचल दिया था।
एडॉल्फ हिटलर | इतिहास, जीवनी, कार्य और तथ्य | ब्रिटानिका
हिटलर का भारत से रिश्ता
हिटलर ने नेताजी को आजाद हिंद फौज बनाने में सहयोग दिया था। हालांकि, हिटलर की विचारधारा भारतीयों के लिए बहुत अच्छी नहीं थी। उसने अपनी किताब 'मीन कैम्फ' में भारतीयों के प्रति कड़वाहट दिखाई थी।
हिटलर ने कभी भी खुले दिल से भारत की आज़ादी का समर्थन नहीं किया। लेकिन नेताजी के व्यक्तित्व से वह काफी प्रभावित जरूर हुआ था। हिटलर ने ही सुभाष चंद्र बोस को पहली बार 'नेताजी' कहा था। यह मुलाकात इतिहास के पन्नों में एक दिलचस्प मोड़ मानी जाती है।
एडॉल्फ हिटलर: जीवनी, तथ्य, सत्ता में उदय और तस्वीरें | हिस्ट्रीएक्स्ट्रा
हिटलर के जीवन के कुछ पॉजिटिव पहलू
जर्मनी में सड़कों का जाल बिछाने का श्रेय भी उसे जाता है। उसने बेरोज़गारी दूर करने के लिए कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शुरू किए। विज्ञान और तकनीक के मामले में जर्मनी उसके दौर में आगे बढ़ा।
रॉकेट तकनीक और जेट विमानों की शुरुआत भी उसी समय हुई थी। लेकिन ये सभी विकास युद्ध की तैयारी के लिए किए गए थे। मानवता की भलाई के लिए इनका उद्देश्य कभी नहीं रहा था।
एडॉल्फ हिटलर: जीवनी, तथ्य, सत्ता में उदय और तस्वीरें | हिस्ट्रीएक्स्ट्रा
दूसरे विश्व युद्ध का विनाश और अंत
रूसी ठंड और वहां की सेना ने नाजियों की कमर तोड़ दी। धीरे-धीरे मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी को हर तरफ से घेर लिया। 30 अप्रैल 1945 को हिटलर को अपनी हार साफ दिखने लगी। उसने बर्लिन में अपने भूमिगत बंकर (Führerbunker) में अपनी पत्नी इवा ब्रौन के साथ आत्महत्या कर ली।
हिटलर ने खुद को सिर में गोली मारी, जबकि इवा ने सायनाइड (जहर) खाकर अपनी जान दी। हिटलर की वसीयत के मुताबिक, उसके शव को बंकर के बाहर ले जाकर जला दिया गया था ताकि दुश्मन उसके शरीर का अपमान न कर सकें। इस तरह एक तानाशाह के आतंक का अंत हुआ।
हिटलर ने क्यों की थी आत्महत्या
दूसरे विश्व युद्ध के अंत में सोवियत संघ की रेड आर्मी ने बर्लिन को चारों तरफ से घेर लिया था। हिटलर को पता था कि अगर वह पकड़ा गया, तो उसे सड़कों पर घसीटा जाएगा और बड़ी बेइज्जती के साथ मारा जाएगा।
वह मुसोलिनी की तरह अपमानजनक मौत नहीं चाहता था। इसलिए, उसने अपने भूमिगत बंकर में खुद को गोली मार ली और अपनी पत्नी इवा ब्रौन को जहर दे दिया। हार का यही डर उसकी मौत की असली वजह बना।
Reference Links:
- Britannica - Adolf Hitler Biography
- History.com - Hitler's Rise to Power
- BBC History - Adolf Hitler Profile
- National WWII Museum - The Death of Hitler
20 अप्रैल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 20 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1535: स्टॉकहोम (स्वीडन) में आसमान में अद्भुत 'सूरज कुत्तों' (Sun Dogs) को देखकर मशहूर चित्रकारी 'वैडरोलस्टावलान' बनी।
- 1657: ब्रिटिश एडमिरल रॉबर्ट ब्लेक ने सांता क्रुज़ में स्पेनिश खजाने वाले समुद्री बेड़े को पूरी तरह तबाह कर दिया।
- 1770: जॉर्जियाई राजा एरिकले द्वितीय ने असपिन्द्रा की लड़ाई में विशाल तुर्क सेना को धूल चटा दी थी।
- 1777: न्यूयॉर्क ने एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अपने नए और पहले संविधान को आधिकारिक रूप से अपनाया।
- 1785: किंग जॉर्ज तृतीय ने थॉमस वार्टन को ब्रिटेन का राजकवि (Poet Laureate) नियुक्त किया था।
- 1792: फ्रांस ने ऑस्ट्रिया के खिलाफ युद्ध की घोषणा की, जिससे फ्रांसीसी क्रांतिकारी युद्धों की शुरुआत हुई।
- 1818: इंग्लैंड की कोर्ट में 'बैटल बाय ट्रायल' (लड़कर न्याय) के अधिकार पर अंतिम बार बहस के बाद इसे रोक दिया गया।
- 1828: फ्रांसीसी खोजी रेने कैलीए टिम्बकटू शहर में प्रवेश करने वाले पहले गैर-मुस्लिम यात्री बने।
- 1836: अमेरिका में विस्कॉन्सिन क्षेत्र का गठन हुआ और बेल्मॉन्ट को इसकी पहली राजधानी बनाया गया।
- 1845: रोमोन कैस्टिला ने पेरू के राष्ट्रपति के रूप में देश की कमान संभाली थी।
- 1878: ऑस्ट्रेलिया में मशहूर 'स्टॉवेल गिफ्ट' नामक दौड़ प्रतियोगिता की पहली बार शुरुआत की गई थी।
- 1884: पोप लियो XIII ने फ्रीमेसनरी और चर्च-राज्य के अलगाव के खिलाफ अपना कड़ा संदेश जारी किया।
- 1889: जर्मन तानाशाह और नाजी पार्टी के नेता एडोल्फ हिटलर का जन्म ऑस्ट्रिया में हुआ था।
- 1914: कोलोराडो में खदान मजदूरों और सुरक्षा बलों के बीच हुए 'लुडलो नरसंहार' में 17 लोगों की जान गई।
- 1920: अमेरिका के अलबामा और मिसीसीपी राज्यों में आए भीषण तूफान ने 219 लोगों की जान ले ली थी।
- 1921: फेरेंक मोलनर के मशहूर नाटक 'लिलीओम' का पहली बार ब्रॉडवे (न्यूयॉर्क) में अंग्रेजी मंचन हुआ।
- 1939: मशहूर गायिका बिली हॉलिडे ने 'स्ट्रेंज फ्रूट' गाना रिकॉर्ड किया, जो नागरिक अधिकारों का प्रतीक बना।
- 1939: जर्मनी में तानाशाह एडोल्फ हिटलर के 50वें जन्मदिन को पूरे देश में राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया गया।
- 1968: ब्रिटिश सांसद हनोक पॉवेल ने आव्रजन के खिलाफ अपना चर्चित 'रिवर्स ऑफ ब्लड' भाषण दिया था।
- 1968: पियरे ट्रूडो ने कनाडा के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर कार्यभार संभाला था।
- 1969: उत्तरी आयरलैंड में हिंसा रोकने और शांति बहाली के लिए ब्रिटिश सैनिकों की पहली टुकड़ी पहुंची।
- 1972: अपोलो-16 मिशन के तहत जॉन यंग और चार्ल्स ड्यूक की टीम चंद्रमा पर उतरने वाली पांचवीं टीम बनी।
- 1973: कनाडा ने अपना पहला व्यावसायिक उपग्रह 'एएमआईके ए-2' सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लॉन्च किया था।
- 1978: सोवियत संघ ने अपने हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने पर कोरियाई एयरलाइंस की फ्लाइट 902 को मार गिराया।
- 1986: न्यूयॉर्क के सेंट जेम्स थिएटर में मशहूर शो "जेरी की लड़कियां" का 139वां और आखिरी प्रदर्शन हुआ।
- 1990: ओक्सलैंड ए के खिलाड़ी ब्रायन होल्मन का 'परफेक्ट गेम' आखिरी समय में एक होम रन से खराब हो गया।
- 1997: बेसबॉल टीम 'न्यूयॉर्क मेट्स' ने लगातार 14 गेम हारकर लीग की सबसे खराब शुरुआत का रिकॉर्ड बनाया।
- 1998: जर्मनी के हिंसक क्रांतिकारी समूह 'रेड आर्मी गुट' ने खुद को भंग करने की आधिकारिक घोषणा की।
- 1999: कोलोराडो के कोलंबाइन हाई स्कूल में गोलीबारी की घटना में 12 छात्रों और एक शिक्षक की हत्या हुई।
- 1999: जर्मनी के पूर्व चांसलर हेल्मुट कोल को अमेरिका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'प्रेसिडेन्शियल मेडल ऑफ फ्रीडम' से नवाजा गया।
- 2008: फर्नांडो लुगो पैराग्वे के राष्ट्रपति बने, जिससे वहां 61 साल से चला आ रहा एक पार्टी का शासन खत्म हुआ।
- 2008: पहली दक्षिण कोरियाई अंतरिक्ष यात्री यी सो-योन आईएसएस पर 9 दिन बिताने के बाद सुरक्षित पृथ्वी पर लौटीं।
- 2010: मेक्सिको की खाड़ी में 'डीपवाटर होराइजन' तेल रिग में विस्फोट हुआ, जो इतिहास का सबसे बड़ा तेल रिसाव बना।
- 2011: नाइजीरिया में हुए राष्ट्रपति चुनाव के बाद गुड लक जोनाथन को देश का नया विजेता घोषित किया गया।
- 2011: चीन की सरकार ने दो प्रमुख मानवाधिकार वकीलों लियू शियाओयुआन और जियांग तियानपोंग को रिहा किया।
- 2012: डिज़नी स्टूडियो के अध्यक्ष रिच रॉस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
- 2012: मिस्र में सैन्य शासन के विरोध में काहिरा के तहरीर चौक पर हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया।
भारत के इतिहास की घटनाएं...
- 1997: इन्द्र कुमार गुजराल ने भारत के 12वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर देश की कमान संभाली।
- 2011: इसरो (ISRO) के प्रक्षेपण यान PSLV-C16 ने एक साथ तीन उपग्रहों को सफलतापूर्वक उनकी कक्षा में स्थापित किया।
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