पड़ोसी के वाई-फाई कनेक्शन ने छात्र को दिलाया दिल्ली IIT में प्रवेश, जानें ऐसा क्या हुआ...
Sandeep Kumar | Aug 04, 2024, 18:48 IST
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वो कहते हैं न, खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है...कुछ ऐसा ही करके दिखाया है मुंबई के रहने वाले एक छात्र ने। आइए जानते छात्र के कारनामे की इनसाइड स्टोरी...
मुंबई के लोकमान्य तिलक नगर स्लम में रहने वाले अभिषेक सुजीत शर्मा की किस्मत ने उसी दिन मानो करवट ले ली जब उनका जेईई एडवांस रिजल्ट आया। उनकी रैंक इतनी अच्छी थी कि आईआईटी दिल्ली की सीट मिल गई। आज वो झुग्गी के लड़के से आईआईटीयन बन गए हैं, जो असल में उनकी कम्युनिटी में रहने वाले लड़कों के लिए भी बड़ी जीत है।
अपने पड़ोसी के वाईफाई कनेक्शन का उपयोग करके छत पर पढ़ाई करना हो या अपने आस-पास के अंतहीन शोर और तमाम परेशानियों को नजरअंदाज करना हो, अभिषेक ने एक ही झटके में हर बाधा पार कर ली है। अब वह अपने परिवार को गरीबी से उबारने और उन्हें बेहतर जीवन स्तर देने में सक्षम होंगे।
बता दें कि अभिषेक के पिता एक स्टील फैब्रिकेशन कंपनी में मजदूर के रूप में काम करते हैं, और उनका चार सदस्यीय परिवार हरद चॉल में एक छोटे से किराए के कमरे में रहता है, जहां उन्हें 3,000 रुपए प्रति माह मिलते हैं। यह इलाका डकैती, मादक द्रव्यों के सेवन और छिटपुट झगड़ों जैसी समस्याओं से ग्रस्त है, जिससे यह शिक्षा के लिए अनुकूल नहीं है। इसके अलावा यहां बुनियादी सुविधाओं का भी गंभीर अभाव है। वहां कोई निजी शौचालय नहीं है और सभी परिवार सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल करते हैं।
हरद चॉल में एक छोटे से कमरे के घर में रहते हुए उन्होंने मेरा साथ देने के लिए अनगिनत त्याग किए। अभिषेक आगे कहते हैं कि मेरे माता-पिता जमीन पर सोते थे ताकि मैं बिस्तर पा सकूं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मेरे पास पढ़ाई करने के लिए एक आरामदायक जगह हो।
वो कहते हैं कि जब पैसे की समस्या हो तो किफायती लेकिन विश्वसनीय शिक्षा स्रोत खोजना मुश्किल हो सकता है। मैंने पीडब्ल्यू के अर्जुन और लक्ष्य बैचों की ऑनलाइन कक्षाओं से अध्ययन किया, जिसने न केवल जेईई पाठ्यक्रम की व्यापक कवरेज प्रदान की, बल्कि रेगुलर टेस्ट और डाउट क्लियरिंग सेशन भी किए। अभिषेक अपनी सफलता का श्रेय फिजिक्स वाला के मार्गदर्शन को देते हैं। वो कहते हैं कि अलख पांडे से व्यक्तिगत रूप से मिलने से उनका जीवन बदल गया।
अभिषेक कहते हैं कि जो भी छात्र JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने की आकांक्षा रखते हैं, मेरे पास केवल एक ही संदेश है कि खुद पर विश्वास रखें और चुनौतियों के बावजूद अपने लक्ष्यों पर केंद्रित रहें। हमारी परिस्थितियां हमारी क्षमता को परिभाषित नहीं करती हैं।
![sandeep mishr]()
अपने पड़ोसी के वाईफाई कनेक्शन का उपयोग करके छत पर पढ़ाई करना हो या अपने आस-पास के अंतहीन शोर और तमाम परेशानियों को नजरअंदाज करना हो, अभिषेक ने एक ही झटके में हर बाधा पार कर ली है। अब वह अपने परिवार को गरीबी से उबारने और उन्हें बेहतर जीवन स्तर देने में सक्षम होंगे।
पिता की 3000 कमाई में चला परिवार
मेरे माता-पिता ने अनगिनत त्याग किए हैं : छात्र
मंजिल पाना है तो खुद पर विश्वास रखें
अभिषेक कहते हैं कि जो भी छात्र JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने की आकांक्षा रखते हैं, मेरे पास केवल एक ही संदेश है कि खुद पर विश्वास रखें और चुनौतियों के बावजूद अपने लक्ष्यों पर केंद्रित रहें। हमारी परिस्थितियां हमारी क्षमता को परिभाषित नहीं करती हैं।
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