नेपाल में बाढ़ का तबाही पर बड़ा अपडेट, अब तक 392 की मौत, 1500 से ज्यादा लापता
Pawan Modiya | Aug 28, 2026, 24:39 IST
नेपाल में बाढ़
नेपाल फ्लैश फ्लड में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है। 1500 से अधिक लोग लापता हैं। भोटेकोशी नदी में दोबारा बाढ़ का खतरा बना है। करीब 290 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया। भारत ने राहत सामग्री भेजकर सीमावर्ती राज्यों को सतर्क किया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- नेपाल फ्लैश फ्लड में 392 लोगों की मौत हुई है।
- बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 1500 से ज्यादा लोग लापता हैं।
- करीब 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा।
- भोटेकोशी नदी में दोबारा तेज बाढ़ का खतरा है।
- भारत ने राहत भेजकर सीमावर्ती क्षेत्रों को सतर्क किया है।
नेपाल में भारी तबाही
सबसे ज्यादा नुकसान भोटेकोशी नदी के आसपास हुआ है। रसुवा, धादिंग, नुवाकोट और चितवन गंभीर रूप से प्रभावित हैं। तेज पानी कई शहरों और गांवों तक पहुंच गया। नेपाल सेना, पुलिस और स्थानीय बचाव दल अभियान चला रहे हैं। मुश्किल मौसम और टूटी सड़कें अभियान में बाधा बन रही हैं। कई स्थानों पर हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।
बुनियादी ढांचा तबाह
बाढ़ से 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। कई परियोजनाओं में बिजली उत्पादन रोकना पड़ा है। पानी के साथ वाहन और भारी मशीनें भी बह गईं। बाढ़ ने संचार व्यवस्था को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क काम नहीं कर रहा। इस कारण लापता लोगों की सही संख्या बदल रही है।
भोटेकोशी पर नया खतरा
यह झील लगभग 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। झील का पानी लगातार बढ़ने की जानकारी सामने आई है। प्राकृतिक बांध टूटने पर पानी तेजी से नीचे आएगा। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वालों को सतर्क किया है। यात्रियों और बचावकर्मियों को भी दूर रहने को कहा गया। जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थान भेजा जा रहा है।
कैसे आई विनाशकारी बाढ़
यह मलबा लेंडे खोला नदी में तेजी से पहुंचा। इसके बाद भोटेकोशी नदी का बहाव अचानक बढ़ गया। पानी आगे त्रिशूली और नारायणी नदी तक पहुंच गया। हालांकि आपदा की असली वजह पर जांच अभी जारी है। इसलिए ग्लेशियर टूटने की बात अंतिम निष्कर्ष नहीं है। अधिकारियों ने सत्यापित जानकारी का इंतजार करने को कहा है।
भारतीयों की तलाश जारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी साझा की। उन्होंने पहले 288 भारतीयों वाले पांच समूहों का विवरण बताया। इन समूहों में पर्यटक, यात्री और परियोजना कर्मचारी शामिल हैं।
एक समूह में त्रिशूली परियोजना के 73 कर्मचारी थे। तमिलनाडु के दो समूहों में 37 और 49 यात्री थे। पश्चिम बंगाल के समूह में 32 लोग शामिल थे। अन्य राज्यों के समूह में 61 नागरिक बताए गए थे। केरल के एक समूह में 33 लोग शामिल थे। बाद में संपर्कविहीन भारतीयों की संख्या 290 बताई गई।
अधिकारियों के अनुसार यह संख्या लगातार बदल सकती है। मोबाइल नेटवर्क बंद होने से संपर्क टूटना भी संभव है। इसलिए संपर्कविहीन व्यक्ति को मृत घोषित नहीं किया जा सकता।
भारतीयों का रेस्क्यू
हैदराबाद के 31 कैलाश मानसरोवर यात्री सुरक्षित मिले हैं। यह समूह बाढ़ आने से पहले क्षेत्र छोड़ चुका था। सभी यात्रियों के तिब्बत के सागा में होने की सूचना मिली।
नेपाल सेना ने त्रिशूली जलविद्युत सुरंग में बड़ा अभियान चलाया। सुरंग में 350 मजदूर और कर्मचारी फंसे हुए थे। सेना ने सभी लोगों को सुरक्षित निकालने की जानकारी दी।
इन कर्मचारियों में कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इससे कई परिवारों को बड़ी राहत मिली है। बाकी संपर्कविहीन लोगों की तलाश अभी जारी है।
विदेशी पर्यटक भी लापता
अमेरिका, यूक्रेन, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया के पर्यटक भी प्रभावित हैं। ब्रिटेन और कनाडा के कई यात्रियों से संपर्क नहीं हुआ। अन्य देशों के नागरिकों की तलाश भी जारी है।
नेपाल सरकार का बयान
बालेन शाह ने कहा कि स्थिति अभी चुनौतीपूर्ण बनी है। सभी सरकारी और सुरक्षा तंत्र मैदान में तैनात हैं। उन्होंने लोगों से प्रशासन के निर्देश मानने की अपील की।
नेपाल सरकार ने विदेशी सहायता के लिए पोर्टल भी खोला है। इसके जरिए राहत कोष में आर्थिक सहायता दी जा सकेगी। सरकार ने पारदर्शी व्यवस्था से सहयोग लेने की बात कही है।
नेपाल पुलिस ने भी लोगों को गंभीर चेतावनी दी है। कुछ लोग बहता सामान निकालने नदी में उतर रहे थे। पुलिस ने ऐसा नहीं करने की सख्त अपील की है।
भारत ने भेजी सहायता
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सहायता पहुंचने की जानकारी दी। उन्होंने अतिरिक्त मदद जुटाने की बात भी कही। भारत ने राहत अभियान में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह से फोन पर बात की। उन्होंने नेपाल को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया। मोदी ने नेपाली नागरिकों के प्रति संवेदना भी जताई।
भारत और नेपाल के अधिकारी लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। भारतीय नागरिकों की खोज को प्राथमिकता दी जा रही है। परिवारों को सत्यापित जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश जारी है।
यूपी-बिहार में सतर्कता
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