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न्यूजीलैंड ने क्रिकेट की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई है। 2021 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन बनने के बाद, 2024 में भारत को उसकी ही धरती पर पहली बार क्लीन स्वीप किया था। इसके बाद 2024 में ही विमेंस टीम ने टी-20 वर्ल्ड कप भी जीत लिया था।
न्यूजीलैंड की टीम अब तक कुल 18 ICC टूर्नामेंट्स के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। इसे क्रिकेट की सबसे अनुशासित टीमों में गिना जाता है। यही कारण है कि न्यूजीलैंड को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।
अब यहीं एक सवाल यह उठता है कि इतने छोटे से देश में सिर्फ 50 लाख की आबादी के बावजूद यह टीम इतनी मजबूत और बेहतर कैसे बनी? आइए इसके बारे में हम विस्तार से जानते हैं।
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न्यूजीलैंड के क्रिकेट इतिहास की शुरुआत 1832 में हुई थी। इस दौरान एंग्लिकन मिशनरी हेनरी विलियम्स ने नॉर्थलैंड में पहला क्रिकेट मैच आयोजित किया था। यह मैच कीवियों का पहला मैच था। फिर 10 साल बाद दिसंबर 1842 में वेलिंगटन में एक और मैच खेला गया था। इस मैच का स्कोर भी दर्ज किया गया था। यह क्रिकेट इतिहास का पहला मैच था, जिसमें स्कोर को रिकॉर्ड किया गया था।
न्यूजीलैंड क्रिकेट की अहम घटनाएं
- न्यूजीलैंड की 1906 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट की शुरुआत हुई थी।
- 1930 में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेला था।
- न्यूजीलैंड ने1973 पहला वनडे मैच खेला था, जबकि 2005 में पहला T20 मैच खेला था।
- 1980 के दशक में न्यूजीलैंड ने रिकॉर्ड 9 टेस्ट सीरीज जीतीं थी।
- न्यूजीलैंड का क्रिकेट सफर निश्चित रूप से दिलचस्प और ऐतिहासिक रहा है।
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पहली जीत के लिए सालों का इंतजार
न्यूजीलैंड 1930 में टेस्ट खेलने वाला देश बना था। टीम को अपनी पहली टेस्ट जीत हासिल करने के लिए 26 साल का इंतजार करना पड़ा था। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों को हराने में कीवियों को दो और दशक लगे थे। आखिरकार उन्होंने ऑकलैंड के ईडन पार्क में वेस्टइंडीज को हराकर अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की थी।
न्यूजीलैंड ने अपना पहला वनडे 11 फरवरी 1973 को पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। इस मैच में न्यूजीलैंड ने 22 रन से जीत हासिल की थी। न्यूजीलैंड की महिला टीम ने अपना पहला टेस्ट 1935 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था।
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तीन फाइनल में से दो में हार
न्यूजीलैंड की टीम ने 2020 के बाद तीन बार ICC टूर्नामेंट्स के फाइनल में जगह बनाई है। इनमें से एक फाइनल में उसे जीत मिली जबकि दो में उसे हार का सामना करना पड़ा था।
जून 2021 में न्यूजीलैंड ने भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में 8 विकेट से हराया था। यह मैच साउथैम्प्टन के द रोज बाउल स्टेडियम में हुआ था।
उसी साल न्यूजीलैंड को टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने 8 विकेट से हराया था। यह मैच 14 नवंबर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में हुआ था। फिर साल 2025 में न्यूजीलैंड को चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत से मुकाबला करना पड़ा था। इसमें उसे 4 विकेट से हार झेलनी पड़ी थी।
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इंग्लैंड के खिलाफ किस्मत थी खराब
न्यूजीलैंड की मेंस टीम ने साल 2000 में पहली बार किसी ICC टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई थी। उस समय टीम इंडिया को 4 विकेट से हराकर चैंपियंस ट्रॉफी जीत ली थी। इसके बाद कीवियों ने अगले 20 साल में तीन और फाइनल खेले, लेकिन कोई भी नहीं जीत सके थे।
2009 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और 2015 में वनडे वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को फाइनल में हराया था। 2019 में न्यूजीलैंड की टीम फिर से फाइनल में पहुंची थी। इस बार इंग्लैंड के खिलाफ उन्हें किस्मत और ICC के बाउंड्री नियमों की वजह से हार मिली थी। न्यूजीलैंड ने साल 2021 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियंशिप जीती थी।
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न्यूजीलैंड ने गंवाए 61% सेमीफाइनल मैच
न्यूजीलैंड की टीम ऐसी है जो ज्यादा बात नहीं करती है। न ही उसके खिलाड़ी किसी भी तरह की अनुशासनहीनता दिखाते हैं। उनके खिलाड़ी जीत या हार में एक जैसा रिएक्ट करते हैं। न्यूजीलैंड की टीम शांतिपूर्ण तरीके से अपना खेल खेलती है।
NZ ने अब तक 18 बार ICC टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। इनमें से 7 बार टीम ने जीत हासिल की जबकि 11 बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। इसका मतलब है कि न्यूजीलैंड ने 61% सेमीफाइनल मैच गंवाए हैं और 38% मैच जीते हैं।
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कम जनसंख्या सबसे बड़ी ताकत
न्यूजीलैंड के इतिहासकार डॉन नीली ने कहा था कि, हम छोटे हैं इसलिए पूरे देश को एक टारगेट पर लाना आसान है। कई लोग इसे कमजोरी मानते हैं। वहीं हम इसे अपनी ताकत मानते हैं। यही बात क्रिकेट में भी लागू होती है जहां सिर्फ एक लाख रजिस्टर्ड क्रिकेटर्स हैं।
यहां के प्लेयर को छोटी उम्र में ही स्कूल और क्लब लेवल पर स्काउट किया जाता है। इसके बाद उनके स्किल डेवलपमेंट पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। संख्या कम होने के कारण कोच और एडमिनिस्ट्रेटर्स का पूरा फोकस हर प्लेयर पर ज्यादा होता है। इससे उन्हें बेहतर सुविधाएं और ट्रेनिंग मिलती है।
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न्यूजीलैंड की सबसे बड़ी ताकत
न्यूजीलैंड की असली ताकत उसका मजबूत ग्रासरूट सिस्टम है। उसके शहर भले ही छोटे हों लेकिन खेल सुविधाओं से भरपूर हैं। जैसे टौरंगा के माउंट माउंगानुई में एक छोटा लेकिन शानदार क्रिकेट स्टेडियम है। साथ ही दो रग्बी मैदान, वाइकाटो हाई-परफॉर्मेंस सेंटर, हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ और एथलेटिक्स ट्रैक भी मौजूद हैं। पास में यॉटिंग और सेलिंग क्लब भी है। इससे वहां के लोगों की जीवनशैली में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है।
न्यूजीलैंड की सफलता में आउटडोर जीवनशैली का भी बड़ा हाथ है। स्कूलों में दौड़ने, कूदने और थ्रो करने जैसी शारीरिक गतिविधियों पर जोर दिया जाता है। हर साल आधे से ज्यादा बच्चे कम से कम एक प्रतिस्पर्धी खेल में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्कूल और क्लब से प्लेयर को ढूंढने के बाद उन्हें डोमेस्टिक और नेशनल टूर्नामेंट्स में मौका दिया जाता है। इन टूर्नामेंट्स में 6 टीमें हिस्सा लेती हैं। विमेंस कैटेगरी में भी 6 टीमें खेलती हैं। टी-20 में सुपर स्मैश और मल्टी-डे क्रिकेटर्स के लिए प्लंकेट शील्ड का आयोजन होता है।
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