शिमला में NHAI को झुकना पड़ा, सेब के उजड़े बाग के लिए किसान को मिलेंगे करोड़ों रुपए
Anjali Dwivedi | May 28, 2026, 17:28 IST
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शिमला के धल्ली में हाईवे प्रोजेक्ट के कारण एक किसान के सेब के बाग को भारी नुकसान हुआ था। एनएचएआई ने पहले इसे प्राकृतिक आपदा बताया था। लेकिन अब वह पीड़ित किसान को 1.80 करोड़ रुपए का मुआवजा देने के लिए पूरी तरह तैयार हो गया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- शिमला के धल्ली में हाईवे निर्माण के कारण एक बड़ा भूस्खलन हुआ था।
- इस भू स्खलन से किसान नरिंदर सिंह राठौड़ के सेब के बाग उजड़ गए।
- NHAI ने पहले इस हादसे को एक्ट ऑफ गॉड यानी कुदरत का खेल बताया।
- किसान ने हार नहीं मानी और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया।
- अब अथॉरिटी किसान को 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर राजी हुई है।
यह पूरी घटना कालका-शिमला राष्ट्रीय मार्ग-5 पर चल रहे चार लेन के निर्माण प्रोजेक्ट के दौरान हुई थी। विकास के इस काम के बीच अचानक हुए एक बड़े हादसे ने किसान के सालों की मेहनत पर पूरी तरह पानी फेर दिया।
जब कुदरत नहीं बल्कि लापरवाही बनी काल
इस हादसे के कारण उनके फलों से लदे हुए सैकड़ों पेड़ पूरी तरह तबाह हो गए। नरिंदर सिंह ने इस भारी नुकसान के बाद सीधे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी में केस दर्ज करा दिया।
कुदरत का खेल बताकर बचने की कोशिश
अथॉरिटी ने कोर्ट में दलील दी कि यह सब एक्ट ऑफ गॉड यानी एक प्राकृतिक आपदा थी। यह कानून और बीमा की दुनिया का एक ऐसा भारी शब्द है जिसका इस्तेमाल लोग अक्सर अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए करते हैं।
किसान ने पहले ही दी थी बड़ी चेतावनी
इतना ही नहीं, हादसा होने से ठीक एक हफ्ता पहले उन्होंने विभाग को एक पत्र भी लिखा था। अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिया था कि जल्द ही कोई उनसे बात करेगा, लेकिन उससे पहले ही यह तबाही हो गई।
आखिरकार अथॉरिटी को क्यों बदलना पड़ा फैसला
इस बड़ी जीत और समझौते के बाद नरिंदर सिंह ने भी ट्रिब्यूनल से अपना केस वापस ले लिया है। यह फैसला ढलानों पर बिना सोचे-समझे किए जाने वाले निर्माण कार्यों पर एक बड़ा सबक है।
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