ब्रह्मचर्य से खराब होती है स्पर्म क्वालिटी, नियमित सेक्स है कारगर: ऑक्सफोर्ड रिसर्च
Aman Vaishnav | Mar 27, 2026, 14:31 IST
oxford study regular sex boosts sperm quality fertility
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च में सामने आया है कि नियमित सेक्स से पुरुषों की स्पर्म क्वालिटी बेहतर होती है। संयम रखने से शुक्राणुओं में डीएनए डैमेज और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। 55 हजार पुरुषों पर हुई 115 स्टडीज के विश्लेषण के बाद यह खुलासा हुआ है…
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि नियमित सेक्स या स्खलन (शारीरिक प्रक्रिया) से पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता बेहतर होती है। संयम रखने यानी लंबे समय तक सेक्स न करने से शुक्राणुओं में डीएनए (DNA - Deoxyribonucleic Acid) को नुकसान पहुंचता है।
शोधकर्ताओं ने डब्ल्यूएचओ (WHO - World Health Organisation) की मौजूदा गाइडलाइन पर भी सवाल उठाए हैं। यह रिसर्च ऐसे समय आई है जब दुनिया भर में पुरुष बांझपन एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है।
![bd41e962-6c8]()
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम ने दावा किया है कि पुरुष जितनी बार स्खलित होता है, उतनी ही उसके शुक्राणुओं की गुणवत्ता बेहतर होती है। यानी जो लोग नियमित सेक्स करते हैं या ज्यादा बार स्खलित होते हैं उनके शुक्राणु बेहतर गुणवत्ता वाले होते हैं।
इसके पीछे की वजह भी शोधकर्ताओं ने बताई है। को-लीड ऑथर डॉ. रेबेका डीन ने बताया कि, शुक्राणु बहुत तेज गति से चलते हैं। इनमें साइटोप्लाज्म (Cytoplasm) बहुत कम होता है। इस वजह से ये अपनी ऊर्जा जल्दी खर्च कर देते हैं। खुद की मरम्मत की क्षमता भी इनमें सीमित होती है।
इसीलिए 'स्टोर' यानी शरीर में लंबे समय तक रुके हुए शुक्राणुओं को दूसरी कोशिकाओं की तुलना में ज्यादा नुकसान होता है। उनके मुताबिक नियमित स्खलन से पुरुष प्रजनन क्षमता को एक छोटा लेकिन सार्थक फायदा मिल सकता है।
रिसर्च में पाया गया कि सेक्स या हस्तमैथुन से दूरी बनाने पर शुक्राणुओं में डीएनए डैमेज और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) बढ़ता है। साथ ही शुक्राणुओं की गतिशीलता और जीवन शक्ति भी कम हो जाती है।
इसके नतीजे और भी गंभीर हैं। इससे फर्टिलाइजेशन यानी निषेचन की सफलता दर कम हो जाती है। भ्रूण की गुणवत्ता भी घट जाती है। यह उन दंपतियों के लिए खासतौर पर चिंताजनक है जो संतान प्राप्ति की कोशिश में लगे हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि शरीर में 'स्टोर' रहने वाले शुक्राणु (SPERM) पुरुष की उम्र चाहे जो हो, तेजी से खराब होते हैं।
![800e2b8b-22f]()
यह कोई छोटी स्टडी नहीं है। इस रिसर्च के लिए टीम ने पहले से हो चुके शोधों का बड़े पैमाने पर विश्लेषण किया। इसमें लगभग 55 हजार पुरुषों पर हुई 115 मानव स्टडीज शामिल थीं। इसके अलावा 30 अलग-अलग प्रजातियों पर हुई 56 स्टडीज का भी विश्लेषण किया गया।
रिसर्च के लीड ऑथर डॉ. कृश संघवी कहते हैं कि, स्खलन को शुक्राणुओं की एक आबादी के रूप में देखा जाना चाहिए। इसमें जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा और चयनात्मक मृत्यु दर होती है। यह नजरिया शुक्राणु विज्ञान को एक नई दिशा देता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मौजूदा गाइडलाइन के मुताबिक सहायक प्रजनन यानी असिस्टेड रिप्रोडक्शन (Assisted Reproduction) के लिए सैंपल लेने से पहले दो से सात दिन के संयम की सलाह दी जाती है।
दूसरी तरफ इस रिसर्च की टीम ने चेतावनी दी है कि उनके निष्कर्षों के आधार पर इस गाइडलाइन में सात दिन की ऊपरी सीमा बहुत ज्यादा हो सकती है। यानी डॉक्टर जो सलाह देते आए हैं वह नई रिसर्च के हिसाब से गलत साबित हो सकती है।
यह रिसर्च ऐसे समय पर आई है जब पुरुष बांझपन एक गंभीर वैश्विक मुद्दा बन चुका है। लगभग हर सात में से एक दंपती बांझपन से जूझता है। बांझपन की परिभाषा यह है कि कम से कम एक साल तक नियमित और असुरक्षित यौन संबंध (शारीरिक संबंध) बनाने के बाद भी गर्भधारण न हो पाना।
ऑक्सफोर्ड की इस रिसर्च ने पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर कई पुरानी मान्यताओं पर नए सिरे से सोचने को मजबूर किया है।
ये खबरें भी पढ़िए...
ओरल सेक्स बन रहा कैंसर का कारण, जितने ज्यादा पार्टनर उतना ही बड़ा खतरा
AI ने बताया दिल, जिगर और कैंसर का असली राज, थाइमस ग्रंथी है जान का तोता
इंदौर हाईकोर्ट ने पत्नी–पति के शारीरिक संबंध को बलात्कार नहीं माना, याचिका खारिज
Transgender Rights Bill 2024: पहचान की एक और लड़ाई…
शोधकर्ताओं ने डब्ल्यूएचओ (WHO - World Health Organisation) की मौजूदा गाइडलाइन पर भी सवाल उठाए हैं। यह रिसर्च ऐसे समय आई है जब दुनिया भर में पुरुष बांझपन एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है।
bd41e962-6c8
नियमित सेक्स क्यों जरूरी है?
इसके पीछे की वजह भी शोधकर्ताओं ने बताई है। को-लीड ऑथर डॉ. रेबेका डीन ने बताया कि, शुक्राणु बहुत तेज गति से चलते हैं। इनमें साइटोप्लाज्म (Cytoplasm) बहुत कम होता है। इस वजह से ये अपनी ऊर्जा जल्दी खर्च कर देते हैं। खुद की मरम्मत की क्षमता भी इनमें सीमित होती है।
इसीलिए 'स्टोर' यानी शरीर में लंबे समय तक रुके हुए शुक्राणुओं को दूसरी कोशिकाओं की तुलना में ज्यादा नुकसान होता है। उनके मुताबिक नियमित स्खलन से पुरुष प्रजनन क्षमता को एक छोटा लेकिन सार्थक फायदा मिल सकता है।
संयम से क्या नुकसान होता है?
इसके नतीजे और भी गंभीर हैं। इससे फर्टिलाइजेशन यानी निषेचन की सफलता दर कम हो जाती है। भ्रूण की गुणवत्ता भी घट जाती है। यह उन दंपतियों के लिए खासतौर पर चिंताजनक है जो संतान प्राप्ति की कोशिश में लगे हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि शरीर में 'स्टोर' रहने वाले शुक्राणु (SPERM) पुरुष की उम्र चाहे जो हो, तेजी से खराब होते हैं।
800e2b8b-22f
55 हजार पुरुषों पर रिसर्च
रिसर्च के लीड ऑथर डॉ. कृश संघवी कहते हैं कि, स्खलन को शुक्राणुओं की एक आबादी के रूप में देखा जाना चाहिए। इसमें जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा और चयनात्मक मृत्यु दर होती है। यह नजरिया शुक्राणु विज्ञान को एक नई दिशा देता है।
WHO की गाइडलाइन पर सवाल
दूसरी तरफ इस रिसर्च की टीम ने चेतावनी दी है कि उनके निष्कर्षों के आधार पर इस गाइडलाइन में सात दिन की ऊपरी सीमा बहुत ज्यादा हो सकती है। यानी डॉक्टर जो सलाह देते आए हैं वह नई रिसर्च के हिसाब से गलत साबित हो सकती है।
बांझपन की बड़ी समस्या
ऑक्सफोर्ड की इस रिसर्च ने पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर कई पुरानी मान्यताओं पर नए सिरे से सोचने को मजबूर किया है।
FAQ
- क्या नियमित सेक्स से सच में
स्पर्म क्वालिटी बेहतर होती है?
हां, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च इसकी पुष्टि करती है। 55 हजार पुरुषों पर हुई 115 स्टडीज के विश्लेषण में पाया गया कि जो पुरुष नियमित रूप से स्खलित होते हैं, उनके शुक्राणुओं की गुणवत्ता बेहतर होती है। इसकी वजह यह है कि शुक्राणु शरीर में जितने लंबे समय तक रहते हैं, उतने ही खराब होते जाते हैं। उनमें डीएनए डैमेज बढ़ता है और गतिशीलता घटती है।
ये खबरें भी पढ़िए...
ओरल सेक्स बन रहा कैंसर का कारण, जितने ज्यादा पार्टनर उतना ही बड़ा खतरा
AI ने बताया दिल, जिगर और कैंसर का असली राज, थाइमस ग्रंथी है जान का तोता
इंदौर हाईकोर्ट ने पत्नी–पति के शारीरिक संबंध को बलात्कार नहीं माना, याचिका खारिज
Transgender Rights Bill 2024: पहचान की एक और लड़ाई…
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari