नवंबर में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल, आम आदमी की जेब पर बढ़ेगा बोझ, महंगाई बढ़ने का भी खतरा

Sourabh Bhatnagar | Oct 17, 2026, 11:39 IST
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नवंबर में पेट्रोल-डीजल देगा झटका?
नवंबर में पेट्रोल-डीजल देगा झटका?

देश में नवंबर के दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई गई है। आर्थिक रिसर्च संस्थान ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुताबिक, ईंधन के दाम में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो आम लोगों के खर्च पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही महंगाई बढ़ने और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना भी बन सकती है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की प्रमुख अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद ने कहा कि नवंबर में पेट्रोल की कीमतें बढ़ने की संभावना है। उनके मुताबिक, अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनावी प्रचार तेज होने से पहले ईंधन के दाम बढ़ाने के लिए सीमित समय मिल सकता है।

मई के मुकाबले कम हो सकती है बढ़ोतरी

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि नवंबर में ईंधन की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी मई में हुई बढ़ोतरी की आधी हो सकती है। मई में मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण खुदरा ईंधन की कीमतें बढ़ी थीं।

अगले साल सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में मार्च से मई के बीच मतदान होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का फैसला आर्थिक के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी अहम हो सकता है।

महंगाई दर 6 फीसदी से ऊपर जाने का अनुमान

ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर रोजमर्रा की चीजों और परिवहन की लागत पर भी पड़ सकता है। इससे आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुमान के मुताबिक, अगर ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो खुदरा महंगाई दर अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 6.2 फीसदी तक पहुंच सकती है। वहीं, 2027 के पहले तीन महीनों में यह बढ़कर 6.5 फीसदी हो सकती है।

यह आंकड़ा RBI के दो से छह फीसदी के महंगाई लक्ष्य से अधिक होगा। हालांकि, ये अनुमान संभावित कीमत बढ़ोतरी पर आधारित हैं, न कि महंगाई के वास्तविक आंकड़ों पर।

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त्योहारों पर महंगाई की तिहरी मार, खुदरा महंगाई 5.54% और थोक दर 11% के पार, EMI का भी बढ़ा बोझ
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त्योहारी सीजन की शुरुआत में ही आम आदमी को महंगाई की तिहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। सितंबर में खुदरा महंगाई दर 5.54% और थोक महंगाई दर 11.39% पर पहुंच गई है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 7.74% होने से रोजमर्रा की रसोई का बजट भी बिगड़ गया है। रसोई के 42 सामानों में से 41 के दाम बीते एक साल में बहुत बढ़ चुके हैं।
त्योहारी सीजन की शुरुआत में ही आम आदमी को महंगाई की तिहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। सितंबर में खुदरा महंगाई दर 5.54% और थोक महंगाई दर 11.39% पर पहुंच गई है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 7.74% होने से रोजमर्रा की रसोई का बजट भी बिगड़ गया है। रसोई के 42 सामानों में से 41 के दाम बीते एक साल में बहुत बढ़ चुके हैं।

RBI का महंगाई को लेकर क्या अनुमान है?

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया Monetary Policy Review में अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए महंगाई दर 6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। इसके बाद जनवरी-मार्च तिमाही में महंगाई घटकर 5.7 फीसदी रहने की उम्मीद बताई गई थी।

दूसरी ओर, ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का मानना है कि आने वाले समय में कीमतों का दबाव बढ़ सकता है। मार्च में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए उसने महंगाई दर 5.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जबकि RBI का अनुमान 5.2 फीसदी है।

दोनों अनुमानों में अंतर से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

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त्योहारों से पहले महंगाई का झटका, चीनी 12 रुपए महंगी, दाल और तेल की कीमतों ने बिगाड़ा बजट
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त्योहारी सीजन में महंगाई ने आम परिवारों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में चीनी, दाल, चावल और तेल महंगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि चीनी 50 से बढ़कर 62 रुपए किलो पहुंच गई। अरहर दाल भी 15 रुपए किलो महंगी हुई है। चावल और सरसों तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। दुकानदारों के मुताबिक थोक भाव रोज बदल रहे हैं।
त्योहारी सीजन में महंगाई ने आम परिवारों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में चीनी, दाल, चावल और तेल महंगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि चीनी 50 से बढ़कर 62 रुपए किलो पहुंच गई। अरहर दाल भी 15 रुपए किलो महंगी हुई है। चावल और सरसों तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। दुकानदारों के मुताबिक थोक भाव रोज बदल रहे हैं।

क्या बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुताबिक, यदि नवंबर में ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ती हैं, तो आने वाली तिमाहियों के लिए उसके महंगाई अनुमान में 10 से 30 बेसिस पॉइंट की कमी आ सकती है। इसके बावजूद महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।

रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि ऐसी स्थिति में RBI दिसंबर और फरवरी की मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है। अक्टूबर में चौथाई प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी के बाद आगे 25 से 50 बेसिस पॉइंट तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी की संभावना भी बताई गई है।

Repo Rate वह प्रमुख ब्याज दर है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों के कर्ज की लागत बढ़ सकती है और इसका असर होम लोन, कार लोन तथा दूसरे कर्जों की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, ब्याज दरों में बढ़ोतरी अभी एक संभावना है, कोई घोषित फैसला नहीं।

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रुपए की स्थिरता पर भी तेल की कीमतों का असर

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद के मुताबिक, मुद्रा बाजार में RBI की ओर से हाल में उठाए गए कदम रुपए में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी फंडिंग से जुड़ा लगातार दबाव रुपए की स्थिरता के लिए चुनौती बने रह सकते हैं। ऐसे में केवल बाजार में हस्तक्षेप करने से रुपए को लंबे समय तक स्थिर रखना मुश्किल हो सकता है।

कुल मिलाकर, नवंबर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी फिलहाल एक अनुमान है। यदि दाम बढ़ते हैं, तो महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और RBI की ब्याज दर नीति भी प्रभावित हो सकती है। अंतिम असर ईंधन की वास्तविक कीमतों और आने वाले महंगाई आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
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