PM मोदी रील विवाद: संसदीय समिति ने जुकरबर्ग को दी चेतावनी, माफी मांगो नहीं तो...
Jitendra Shrivastava | Aug 05, 2026, 16:37 IST
Photograph: (THESOOTR)
NEW DELHI. पीएम मोदी रील विवाद (PM Modi Reel Controversy) में संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने Meta CEO मार्क जुकरबर्ग से माफी की मांग की है। धारा 79 सेफ हार्बर सुरक्षा पर सवाल उठे।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- पीएम मोदी की रील कुछ समय के लिए हटाई गई।
- निशिकांत दुबे की जुकरबर्ग से माफी की चेतावनी।
- Meta की सेफ हार्बर सुरक्षा पर सवाल।
- IT एक्ट की धारा 79 का हुआ जिक्र।
- एल्गोरिदम गलती बताकर Meta ने मांगी माफी।
निशिकांत का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook रील को हटाना गंभीर मामला है। उन्होंने माफी नहीं मांगने पर Meta की कानूनी सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
पीएम मोदी रील विवाद: Meta पर उठे सवाल
निशिकांत दुबे ने कहा कि पीएम मोदी की रील कुछ समय के लिए हटाई गई थी। उन्होंने इसे गंभीर डिजिटल प्लेटफॉर्म विवाद (Digital Platform Controversy) बताया है। उनके अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।
यह मामला 23 जुलाई को अपलोड की गई प्रधानमंत्री मोदी की रील से जुड़ा है। इस वीडियो में NEET-UG पेपर लीक मामले पर जानकारी दी गई थी। वीडियो में सरकार के प्रस्तावित कानूनों का भी जिक्र किया गया था।
Meta CEO को चेतावनी
IT एक्ट धारा 79 (IT Act Section 79) के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को मध्यस्थ सुरक्षा मिलती है। इसे सेफ हार्बर सुरक्षा (Safe Harbour Protection) कहा जाता है। इसके तहत कंपनियां यूजर द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए सीमित जिम्मेदारी रखती हैं।
दुबे ने कहा कि Meta को यह समझना होगा कि भारत में कानूनों का पालन जरूरी है। उन्होंने संसदीय समिति की बैठक में यह मुद्दा उठाया।
इस बैठक में Meta, Google, YouTube, X और Snapchat के अधिकारी मौजूद थे। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
Meta ने दी सफाई
हालांकि, Meta की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए पूरे मामले पर कंपनी की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस विवाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर नई चर्चा शुरू कर दी है। डिजिटल कंपनियों के फैसलों और उनके एल्गोरिदम पर भी सवाल उठ रहे हैं।
धारा 79 पर बहस
वहीं विपक्षी सांसदों ने सेफ हार्बर सुरक्षा हटाने के किसी भी कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों जरूरी हैं।
विपक्ष ने साइबर फ्रॉड, डीपफेक और बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त नियमों का समर्थन किया है। हालांकि उन्होंने सरकार की आलोचना वाले कंटेंट को अलग नजरिए से देखने की बात कही है। यह विवाद भारत में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी और स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस को आगे बढ़ा रहा है।
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