नितिन गडकरी को बॉम्बे HC से राहत, अपमानजनक इथेनॉल कंटेंट हटाने का आदेश
Sanjay Dhiman | Aug 05, 2026, 16:27 IST
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को इथेनॉल नीति से जुड़े आपत्तिजनक सोशल मीडिया कंटेंट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली। कोर्ट ने गलत और अपमानजनक पोस्ट हटाने के निर्देश दिए। गडकरी ने मानहानि और डीपफेक वीडियो के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को इथेनॉल मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने गडकरी से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट हटाने को कहा है। मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पोस्ट से जुड़ा है।
नितिन गडकरी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाई गई। इन पोस्ट में उन्हें इथेनॉल नीति से जोड़ा गया था। गडकरी ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था।
उन्होंने कहा कि कुछ वीडियो और पोस्ट भ्रामक थे। इनमें उनके परिवार को भी जोड़ा गया था। उन्होंने दावा किया कि कुछ सामग्री एआई और डीपफेक तकनीक से बनाई गई थी। इससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई।
विवाद का केंद्र सरकार की E20 इथेनॉल नीति है। E20 का मतलब पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाना है। यह नीति देश में पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत लागू की जाती है।
गडकरी ने कोर्ट में कहा कि उनका मंत्रालय इस नीति को नियंत्रित नहीं करता है। सड़क परिवहन मंत्रालय का इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति से सीधा संबंध नहीं है। इसलिए उन्हें निजी फायदे से जोड़ना गलत है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने गलत दावे किए। इन दावों से लोगों के बीच भ्रम पैदा हुआ। उन्होंने अदालत से ऐसे कंटेंट पर कार्रवाई की मांग की थी।
इस मामले में गडकरी ने कई डिजिटल प्लेटफॉर्म को पक्ष बनाया था। इसमें मेटा, एक्स और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शामिल हैं। उन्होंने कोर्ट से आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग की थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि गलत और अपमानजनक सामग्री पर कार्रवाई जरूरी है।
कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ऐसी सामग्री पर ध्यान देना चाहिए।
आजकल एआई तकनीक से बनाए गए डीपफेक वीडियो तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे वीडियो कई बार लोगों की छवि खराब करने के लिए इस्तेमाल होते हैं।
नितिन गडकरी के मामले में भी ऐसे कंटेंट का आरोप लगाया गया। गडकरी पक्ष ने कहा कि वीडियो वास्तविक नहीं थे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी जानकारी रोकना बड़ी चुनौती बन चुका है। सरकार और अदालतें लगातार इस मुद्दे पर सख्ती दिखा रही हैं।
नितिन गडकरी ने अपनी याचिका में मानहानि का मुद्दा उठाया है। उन्होंने करीब 11 करोड़ रुपए के नुकसान की मांग की है।
उन्होंने कहा कि झूठे आरोपों से उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है। इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें सिविल केस आगे बढ़ाने की अनुमति भी दी है। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
सोशल मीडिया राजनीति का बड़ा माध्यम बन चुका है। नेता और राजनीतिक दल अपनी बात जनता तक पहुंचाते हैं।
लेकिन फर्जी खबरें और गलत वीडियो बड़ी समस्या बन गए हैं। इससे नेताओं की छवि प्रभावित होने का खतरा रहता है।
नितिन गडकरी का मामला भी इसी डिजिटल चुनौती से जुड़ा है। कोर्ट का आदेश सोशल मीडिया जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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नितिन गडकरी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाई गई। इन पोस्ट में उन्हें इथेनॉल नीति से जोड़ा गया था। गडकरी ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था।
उन्होंने कहा कि कुछ वीडियो और पोस्ट भ्रामक थे। इनमें उनके परिवार को भी जोड़ा गया था। उन्होंने दावा किया कि कुछ सामग्री एआई और डीपफेक तकनीक से बनाई गई थी। इससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई।
इथेनॉल नीति से जुड़ा विवाद
गडकरी ने कोर्ट में कहा कि उनका मंत्रालय इस नीति को नियंत्रित नहीं करता है। सड़क परिवहन मंत्रालय का इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति से सीधा संबंध नहीं है। इसलिए उन्हें निजी फायदे से जोड़ना गलत है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने गलत दावे किए। इन दावों से लोगों के बीच भ्रम पैदा हुआ। उन्होंने अदालत से ऐसे कंटेंट पर कार्रवाई की मांग की थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बने पक्षकार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि गलत और अपमानजनक सामग्री पर कार्रवाई जरूरी है।
कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ऐसी सामग्री पर ध्यान देना चाहिए।
डीपफेक वीडियो पर बढ़ती चिंता
नितिन गडकरी के मामले में भी ऐसे कंटेंट का आरोप लगाया गया। गडकरी पक्ष ने कहा कि वीडियो वास्तविक नहीं थे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी जानकारी रोकना बड़ी चुनौती बन चुका है। सरकार और अदालतें लगातार इस मुद्दे पर सख्ती दिखा रही हैं।
11 करोड़ रुपए हर्जाने की मांग
उन्होंने कहा कि झूठे आरोपों से उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है। इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें सिविल केस आगे बढ़ाने की अनुमति भी दी है। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
सोशल मीडिया और नेताओं की छवि
लेकिन फर्जी खबरें और गलत वीडियो बड़ी समस्या बन गए हैं। इससे नेताओं की छवि प्रभावित होने का खतरा रहता है।
नितिन गडकरी का मामला भी इसी डिजिटल चुनौती से जुड़ा है। कोर्ट का आदेश सोशल मीडिया जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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