घर-घर पहुंचा पीएनजी पाइपलाइन कनेक्शन, फिर भी क्यों बंद पड़े हैं 59 लाख चूल्हे? जानें सरकार का नया प्लान
Kaushiki | Oct 02, 2026, 14:15 IST
59 लाख घरों को नहीं मिल पा रहा पीएनजी कनेक्शन
केंद्र सरकार घर-घर पाइप्ड नेचुरल गैस पहुंचा रही है, लेकिन पीएनजी कनेक्शन का लाभ सबको नहीं मिल रहा। देश में 1.75 करोड़ कनेक्शन हैं, पर 59 लाख घरों को लाभ नहीं मिला। राजस्थान में पीएनजी कनेक्शन सिर्फ 28% और मध्यप्रदेश में 65% चालू हैं। वैट और सीमलेस सप्लाई की कमी इसकी वजह बताई गई है। इसलिए केंद्र ने गुरुवार से नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 शुरू किया।
समझें क्या है पूरा मामला
- केंद्र सरकार घरों की रसोई तक पीएनजी पहुंचाने पर जोर दे रही है।
- देश में 1.75 करोड़ कनेक्शन हैं पर 59 लाख घरों को लाभ नहीं मिला।
- रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40% कनेक्शन चालू नहीं हो पा रहे हैं।
- राजस्थान में 72% और मध्यप्रदेश में 35% कनेक्शन चालू नहीं हैं।
- इस बड़ी समस्या को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल पीएनजी ड्राइव शुरू की है।
पीएनजी कनेक्शन चालू क्यों नहीं हो रहे
इसे वैट (राज्य में बिक्री पर लगने वाला कर) कहते हैं। चौथी वजह निर्बाध आपूर्ति (Uninterrupted supply) का न होना है। इन चारों वजहों से घरेलू पीएनजी कनेक्शन चालू नहीं हो पा रहे।
पीएनजी पर वैट कितना लगता है
राजस्थान में पीएनजी की हालत कैसी
मध्यप्रदेश में पीएनजी का हाल
दूसरे राज्यों की तस्वीर कैसी है
| राज्य | कुल घरेलू कनेक्शन | एक्टिव कनेक्शन (बिल वाले) | सक्रियता (%) |
| गुजरात | 39.81 लाख | 36.78 लाख | 92.4% |
| दिल्ली | 19.94 लाख | 14.74 लाख | 73.9% |
| उत्तर प्रदेश | 23.66 लाख | 16.36 लाख | 69.1% |
| मध्य प्रदेश | 3.41 लाख | 2.24 लाख | 65.5% |
| महाराष्ट्र | 47.73 लाख | 28.14 लाख | 58.9% |
| कर्नाटक | 6.27 लाख | 3.60 लाख | 57.4% |
| राजस्थान | 5.59 लाख | 1.58 लाख | 28.3% |
| छत्तीसगढ़ | 22 हजार | 700 | 3.1% |
एवरेज कंस्यूमर की परेशानियां क्या है
सड़क खुदाई की परमिशन न मिलने से काम रुक जाता है। गैस लीक होने की डर से भी कई लोग बचते हैं। कस्टमर केयर से सही समय पर मदद नहीं मिल पाती है। बिल में गड़बड़ी होने पर सुधार कराना बहुत मुश्किल होता है।
लोकल वेंडर्स काम आधा छोड़कर गायब हो जाते हैं। सिलेंडर सरेंडर करने के बाद भी पीएनजी शुरू नहीं होती। इन वजहों से लोग पीएनजी लेने में हिचकिचा रहे हैं। इन समस्याओं को हल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सिंगल विंडो क्लियरेंस से काम में तेजी आ सकती है। स्थानीय निकायों को भी सहयोग बढ़ाना होगा। तभी हर घर तक सुरक्षित गैस पहुँचाई जा सकेगी।योजना की सफलता जमीनी सुधार पर ही टिकी हुई है।
आगे की राह और सरकारी प्रयास
कंपनियों के लिए कड़े नियम बनाए जा रहे हैं। समय पर सप्लाई न देने पर पेनल्टी लगाई जाएगी। नए रिहायशी प्रोजेक्ट्स में पीएनजी अनिवार्य की जा रही है। सुरक्षा मानकों की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं।
कंस्यूमर को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जाएंगे। टोल-फ्री नंबर से शिकायतों का जल्दी निपटारा होगा। अगर यह कदम सही से लागू हुए तो तस्वीर बदलेगी। हर घर को आसानी से रसोई गैस मिल सकेगी।
सिलेंडर की लाइन और बुकिंग का झंझट खत्म होगा। पर्यावरण को भी साफ-सुथरा रखने में मदद मिलेगी। यह योजना देश के विकास के लिए बहुत जरूरी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
क्या है नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0
ये कैंपेन कैसे काम करता है
घर के बाहर सुरक्षा के लिए एक कंट्रोल वॉल्व और प्रेशर रेगुलेटर लगाया जाता है, जो गैस के दबाव को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखता है। जब आप अपनी रसोई में चूल्हे का नॉब ऑन करते हैं। तो गैस बिना किसी रुकावट के सीधे पाइप से चूल्हे तक पहुंचती है। इसमें सिलेंडर खत्म होने या बुकिंग कराने का झंझट नहीं होता।
गैस कंपनियां अब केवल नए कनेक्शन लगाने के बजाय बंद पड़े नेटवर्क को शुरू करने पर ध्यान दे रही हैं। टेक्निकल टीम घर-घर पहुंचकर रुके हुए काम, जैसे मीटर इंस्टॉलेशन, पाइपलाइन टेस्टिंग और सेफ्टी चेक को तेजी से पूरा कर रहे हैं। इससे कंस्यूमर एलपीजी सिलेंडर छोड़कर सीधे रसोई गैस की सप्लाई का लाभ ले सकेंगे।
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