नाबालिग पत्नी से संबंध बनाना POCSO में अपराध, HC ने खारिज की मुस्लिम पर्सनल लॉ की दलील
Sanjay Dhiman | Sept 26, 2026, 17:35 IST
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, नाबालिग से शादी करने पर भी POCSO का अपराध नहीं मिटता। मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला मान्य नहीं। 16 साल की पत्नी की गर्भावस्था के दौरान जांच में उम्र सामने आई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि नाबालिग से शादी करने पर भी आरोपी बच नहीं सकता। मामला 16 साल की लड़की से जुड़े रेप केस का है। आरोपी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला दिया था। कोर्ट ने यह दलील मानने से इनकार कर दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग पत्नी से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज केस रद्द करने से इनकार कर दिया। आरोपी ने दावा किया था कि पीड़िता उसकी कानूनी पत्नी है।
जस्टिस संजीव नरूला ने यह आदेश 26 सितंबर 2026 को दिया। कोर्ट ने कहा कि शादी होने से नाबालिग की उम्र नहीं बढ़ जाती। कानून इस मामले में स्पष्ट है।
आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत मामला दर्ज है। साथ ही पॉक्सो एक्ट (POCSO – Protection of Children from Sexual Offences), 2012 भी लगाया गया है। आरोपी ने अपनी शादी का हवाला देकर केस खत्म करने की मांग की थी।
उसका कहना था कि दोनों की शादी मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुई। इसलिए यह अपराध नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में चार अहम बातें कहीं। पहली, मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी वैध मानी भी जाए, तो भी पॉक्सो या बीएनएस (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) में कोई छूट नहीं मिलती।
दूसरी बात, शादी वैध थी या नहीं, इससे अपराध पर कोई फर्क नहीं पड़ता। तीसरी बात, 18 साल से कम उम्र का हर व्यक्ति पॉक्सो में बच्चा माना जाता है। बच्चे की सहमति के बावजूद संबंध बनाना अपराध है।
चौथी बात, बीएनएस की संबंधित धारा भी 18 साल से कम उम्र की महिला के साथ संबंध को रेप की श्रेणी में रखती है। कोर्ट का रुख इस मामले में बेहद स्पष्ट रहा।
इस केस में आरोपी और उसकी पत्नी दोनों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। महिला ने बताया कि शादी के समय उसकी उम्र 16 साल 3 महीने थी। पति की उम्र उस वक्त 28 साल थी।
दोनों परिवारों की सहमति से शादी हुई थी। बाद में महिला गर्भवती हुई। सरकारी अस्पताल में जांच के दौरान उसकी असली उम्र सामने आई।
महिला ने कोर्ट में कहा कि शादी उसकी अपनी मर्जी से हुई थी। उस पर किसी तरह का दबाव नहीं था। उसने पति की जमानत का भी समर्थन किया। उसने गर्भावस्था के दौरान पति को अपने साथ रखने की मांग की थी।
याचिका में यह भी कहा गया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत यौवन प्राप्त कर चुकी लड़की शादी कर सकती है। इसलिए शादी के बाद संबंधों को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
केरल हाईकोर्ट ने भी इसी साल ऐसा ही रुख अपनाया था। वहीं 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट की एक अलग बेंच ने इसके उलट राय दी थी। उस बेंच ने मुस्लिम कानून के तहत हुई नाबालिग शादी में पॉक्सो के लागू होने को अलग तरीके से देखा था।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी 2022 में इस मुद्दे पर टिप्पणी की थी। उस कोर्ट ने 15 साल से अधिक उम्र की मुस्लिम लड़की की शादी की क्षमता पर बात कही थी। इससे साफ है कि इस विषय पर अलग-अलग हाईकोर्ट का रुख अलग रहा है।
इस ताजा फैसले से यह बहस फिर तेज हो सकती है। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख आना जरूरी है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग पत्नी से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज केस रद्द करने से इनकार कर दिया। आरोपी ने दावा किया था कि पीड़िता उसकी कानूनी पत्नी है।
जस्टिस संजीव नरूला ने यह आदेश 26 सितंबर 2026 को दिया। कोर्ट ने कहा कि शादी होने से नाबालिग की उम्र नहीं बढ़ जाती। कानून इस मामले में स्पष्ट है।
क्या था पूरा केस
उसका कहना था कि दोनों की शादी मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुई। इसलिए यह अपराध नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया।
कोर्ट ने क्या कहा
दूसरी बात, शादी वैध थी या नहीं, इससे अपराध पर कोई फर्क नहीं पड़ता। तीसरी बात, 18 साल से कम उम्र का हर व्यक्ति पॉक्सो में बच्चा माना जाता है। बच्चे की सहमति के बावजूद संबंध बनाना अपराध है।
चौथी बात, बीएनएस की संबंधित धारा भी 18 साल से कम उम्र की महिला के साथ संबंध को रेप की श्रेणी में रखती है। कोर्ट का रुख इस मामले में बेहद स्पष्ट रहा।
गर्भवती होने पर सामने आई उम्र
दोनों परिवारों की सहमति से शादी हुई थी। बाद में महिला गर्भवती हुई। सरकारी अस्पताल में जांच के दौरान उसकी असली उम्र सामने आई।
महिला ने कोर्ट में कहा कि शादी उसकी अपनी मर्जी से हुई थी। उस पर किसी तरह का दबाव नहीं था। उसने पति की जमानत का भी समर्थन किया। उसने गर्भावस्था के दौरान पति को अपने साथ रखने की मांग की थी।
याचिका में यह भी कहा गया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत यौवन प्राप्त कर चुकी लड़की शादी कर सकती है। इसलिए शादी के बाद संबंधों को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
दूसरे राज्यों की अदालतों का रुख
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी 2022 में इस मुद्दे पर टिप्पणी की थी। उस कोर्ट ने 15 साल से अधिक उम्र की मुस्लिम लड़की की शादी की क्षमता पर बात कही थी। इससे साफ है कि इस विषय पर अलग-अलग हाईकोर्ट का रुख अलग रहा है।
इस ताजा फैसले से यह बहस फिर तेज हो सकती है। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख आना जरूरी है।
FAQ
- क्या नाबालिग से शादी करने पर POCSO लागू नहीं होता?
नहीं, शादी होने पर भी पॉक्सो लागू रहता है। 18 साल से कम उम्र में संबंध अपराध ही माना जाता है। कोर्ट ने इसे साफ किया है। - क्या मुस्लिम पर्सनल लॉ नाबालिग शादी को मान्यता देता है?
याचिका में यह दावा किया गया था। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे पॉक्सो के मामले में अप्रासंगिक बताया। कोर्ट ने कहा कि यह कानूनी छूट नहीं देता। - यह फैसला किसने और कब सुनाया?
जस्टिस संजीव नरूला ने यह आदेश 26 सितंबर 2026 को दिया। उन्होंने आरोपी की याचिका खारिज कर दी।
किराए के हेलीकॉप्टर-विमानों से उड़ेगी सरकार, एयर एंबुलेंस के लिए भी नया टेंडर
झीरम कांड में फंसी नक्सली प्रमिला, परिवार ने राष्ट्रपति से मांगी दया
दादा ने किया केस, पोते के समय तक चल रही सुनवाई, 63 साल पुराने मुकदमे पर हाईकोर्ट सख्त
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