रेलवे की मनमानी पर संसद की लगाम: RAC यात्रियों को वापस मिले आधा किराया

संसदीय समिति ने RAC बर्थ के लिए रेलवे से आंशिक किराया वापस करने का सुझाव दिया है। सुपरफास्ट ट्रेनों के 55 किमी प्रति घंटा की स्पीड बेंचमार्क को भी बदलने की आवश्यकता बताई गई है।

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Sanjay Dhiman
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Parliament reins in the arbitrariness of Railways RAC passengers get half the fare back

Photograph: (the sootr)

NEWS IN SHORT

  • RAC रिफंड: संसदीय समिति ने RAC टिकट पर आधा किराया वापस लौटाने का सुझाव दिया।
  • पूरा किराया गलत: आधी सीट के लिए पूरा पैसा लेना यात्रियों के साथ नाइंसाफी है।
  • स्पीड बेंचमार्क: सुपरफास्ट ट्रेनों की न्यूनतम औसत रफ्तार 55 से बढ़ाकर 100 किमी/घंटा हो।
  • वसूली पर रोक: कम स्पीड वाली ट्रेनों से सुपरफास्ट सरचार्ज वसूलना तुरंत बंद किया जाए।
  • समय की पाबंदी: नई ट्रेनें चलाने के बजाय पुरानी ट्रेनों को समय पर चलाना ज़रूरी है।

NEWS IN DETAIL

New Delhi. अगर आप ट्रेन में सफर करते हैं, तो आपने कभी न कभी RAC यानी Reservation Against Cancellation का सामना जरूर किया होगा। इसमें होता क्या है? आपको एक पूरी सीट की जगह सिर्फ बैठने के लिए आधी सीट दी जाती है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि रेलवे आपसे किराया पूरा (100%) वसूलता है।

संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने इसी बात पर अपनी रिपोर्ट में कड़ी आपत्ति जताई है। बुधवार को संसद में पेश की गई इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जब यात्री को पूरी बर्थ (सोने की जगह) नहीं मिल रही, तो उससे पूरा पैसा लेना एकदम गलत है।

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संसदीय समिति की बड़ी मांगें: जनता के फायदे की बात

समिति ने रेल मंत्रालय को कुछ ठोस सुझाव दिए हैं जो आपकी जेब को राहत दे सकते हैं:

आधा किराया वापस मिले: अगर चार्ट बनने के बाद भी यात्री RAC में रहता है, तो उसे 'पार्शियल रिफंड' यानी किराए का कुछ हिस्सा वापस किया जाना चाहिए।

सुपरफास्ट का खेल खत्म हो: समिति ने कहा कि आज के जमाने में 55 किमी/घंटा की औसत रफ्तार वाली ट्रेन को 'सुपरफास्ट' कहना मज़ाक है। इसे बदलकर कम से कम 100 किमी/घंटा किया जाना चाहिए।

वसूली बंद हो: रिपोर्ट के मुताबिक, कई ट्रेनें तो सुपरफास्ट के नाम पर सिर्फ एक्स्ट्रा पैसा (Superfast Surcharge) वसूलने के लिए चलाई जा रही हैं, जबकि उनकी असल रफ्तार पैसेंजर ट्रेन जैसी ही है।

सुपरफास्ट ट्रेनों की सच्चाई

समिति ने अपनी जांच (Audit) में पाया कि करीब 478 सुपरफास्ट ट्रेनों में से 123 ट्रेनें तो 55 की स्पीड भी नहीं पकड़ पा रही हैं। रेलवे मंत्रालय ने सफाई दी कि बार-बार स्टॉपेज (ठहराव) देने की वजह से स्पीड कम हो जाती है। लेकिन समिति इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि अगर स्पीड कम हुई है, तो तुरंत उसका सुपरफास्ट टैग हटाओ और किराया कम करो।

भविष्य की तैयारी: 2030 का लक्ष्य

चीन और जापान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए समिति ने कहा कि हमें अपने ग्लोबल स्टैंडर्ड सुधारने होंगे। लक्ष्य यह होना चाहिए कि साल 2030 तक ट्रेनें अपनी पूरी यात्रा के दौरान 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार बरकरार रख सकें। सिर्फ आखिरी स्टेशन पर टाइम से पहुंचना काफी नहीं है, रास्ते में होने वाली देरी को भी खत्म करना होगा।

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रेलवे मंत्रालय का पक्ष

रेलवे मंत्रालय ने अपनी तरफ से यह कहा है कि सुपरफास्ट ट्रेनों की गति में कमी, अतिरिक्त स्टॉपेज देने के कारण हुई है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि 47 ट्रेनों की गति 55 किमी प्रति घंटे से अधिक है, जबकि बाकी ट्रेनों में स्पीड में कमी आई है। मंत्रालय ने कहा कि नई ट्रेनें शुरू करने के बजाय, पुराने ट्रेनों को बेहतर तरीके से चलाने पर ध्यान देना चाहिए।

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