RNG Awards 2026: क्यों वायरल है इंडियन एक्सप्रेस के संपादक राजकमल झा का भाषण?
Anjali Dwivedi | Mar 28, 2026, 16:56 IST
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28 मार्च 2026 को 20वें RNG अवॉर्ड्स में राजकमल झा का भाषण वायरल हो गया। उन्होंने पत्रकारिता के बहाने वर्तमान समाज के कई कड़वे सच उजागर किए। वे क्या बोले, खासतौर पर पत्रकारों के लिए पढ़ने- सुनने लायक है…
हम वो सच कह सकें, जो पाठक कभी सुनना नहीं चाहता…
28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार (RNG Awards- Ramnath Goenka Excellence in Journalism Awards) का 20वां संस्करण आयोजित हुआ। इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर राजकमल झा ने कहा कि अच्छी पत्रकारिता वह है, जो ऐसी कहानियां सुनाए जिन्हें सत्ता में बैठे लोग दबाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार को पाठक का भरोसा जीतने के लिए सच बोलना होगा, न कि वह जो लोग सुनना चाहते हैं।
राजकमल झा ने कहा कि अच्छी पत्रकारिता हमेशा उन कहानियों के बारे में होगी जो हम नहीं जानते थे- वे कहानियां जो सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति हमें बताना नहीं चाहता।
उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को पाठकों का भरोसा वह बोलकर नहीं जीतना है जो वे सुनना चाहते हैं, बल्कि सच बोलकर जीतना है। जब यह बात माइक से निकली, तो हॉल में तालियां गूंज उठीं।
झा का यह भाषण इसलिए भी खास था क्योंकि यह न तो सरकार पर सीधा हमला था, न ही चापलूसी। यह पत्रकारिता के बुनियादी मकसद की याद दिलाना था- सरल शब्दों में, लेकिन गहरी बात।
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पिछले महीने के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में एक टीचर ने कुछ बहुत खास कहा। उन्होंने कहा, "तुम्हारा 6 मेरा 9 हो सकता है।" हम सब हंस पड़े। लेकिन ये एक खास पल था। कई सालों में ऐसा दुर्लभ समय था, जब हमें झूठ की साफ परिभाषा मिली। कोई आईटी सेल वाला खड़ा नहीं हुआ कहने को कि 6 को 9 कहा जा सकता है। किसी ने नहीं कहा, 'बीजिंग में बने रोबोट को ग्रेटर नोएडा में बना रोबोट कहा जा सकता है।' हम सब एकमत थे कि क्या झूठ है और क्या नहीं।
एक कहानी है जो माता-पिता की दिल दहला देने वाली ताकत दिखाती है। वे अपने बच्चे के सम्मान से मरने के अधिकार के लिए लड़ रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सुनवाई की और बच्चा इस हफ्ते चला गया। एक और कहानी है जो दुनिया की सबसे अमीर कंपनी के सप्लायर की जांच करती है। उसने शादीशुदा महिलाओं के जॉब आवेदनों को ठुकरा दिया। ये अच्छी पत्रकारिता का उदाहरण है।
हमें पत्रकारिता के सर्टिफिकेट दिए जाते हैं। राष्ट्रवाद के सर्टिफिकेट दिए जाते हैं। एक तो राजनेता है जो एडिटर बनने की कोशिश कर रहा है। दूसरा पत्रकार है जो राजनेता बनने की कोशिश कर रहा है। ये शोर हमेशा लगा रहता है। कभी-कभी हम मानने लगते हैं कि यही मायने रखता है। लेकिन ये मायने नहीं रखता। हमें इन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं। हमें चाहिए पाठक का सम्मान। वो पाठक जो हमारी ओर लौटता है... क्योंकि हमने उसे वो बताया जो वो सुनना नहीं चाहता।
जैसा कि जॉर्ज ऑरवेल ने लिखा- हमारे समय के सबसे पसंदीदा सूत्रधार- हमें आजादी चाहिए ये कहने की कि दो और दो चार बनते हैं। और ताकत व हिम्मत चाहिए ये कहने की कि 6 कभी 9 नहीं हो सकता। बहुत-बहुत धन्यवाद।
राजकमल झा के पिछले भाषणों को याद करें तो 2016 में उन्होंने सेल्फी जर्नलिज्म पर निशाना साधा था। 2016 में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में झा ने कहा था कि सरकार की आलोचना पत्रकारिता के लिए सम्मान का बैज है। साल 2023 में उन्होंने पत्रकारों की गिरफ्तारी और दबाव का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट को ध्रुव तारा कहा था।
साल 2025 में उन्होंने युवा पत्रकारों पर भरोसा जताते हुए पत्रकारिता के मृत्युलेख लिखने वालों को जवाब दिया था। और 2026 में उनका संदेश और भी पैना हो गया। अब वे सीधे कह रहे हैं कि पत्रकारिता का काम है वह कहना जो सत्ता नहीं चाहती। यह बात आज के दौर में बहुत मायने रखती है।
सोशल मीडिया पर इस भाषण को इसलिए इतना शेयर किया जा रहा है क्योंकि यह उस सवाल का जवाब देता है जो हर आम आदमी के मन में है- क्या आज की मीडिया सच बोलती है? राजकमल झा ने साफ कहा कि असली पत्रकारिता वही है जो बिना डरे, बिना लालच के, सच कहे। इंडियन एक्सप्रेस ने इस भाषण (राजकमल झा की स्पीच वायरल) का वीडियो X पर शेयर किया, जिसे लाखों लोगों ने देखा और आगे फैलाया।
एक्सप्रेस ग्रुप के चेयरमैन विवेक गोयनका ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि अगले 20 सालों का पत्रकार एक साथ तकनीकी रूप से पहले से ज्यादा सक्षम और इंसानी भावनाओं की दृष्टि से पहले से ज्यादा अपरिहार्य होना होगा।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का बुनियादी मिशन नहीं बदला है- पक्ष लेना नहीं, बल्कि रोशनी देना। नागरिकों को वह जानकारी देना जो उन्हें दुनिया समझने और अपनी आजादी का इस्तेमाल करने में मदद करे। यह बात डिजिटल और एआई (AI- Artificial Intelligence) के दौर में और भी जरूरी हो गई है।
28 मार्च 2026 को दिल्ली में पत्रकारिता का सबसे बड़ा उत्सव था। 20वें रामनाथ गोयनका अवार्ड समारोह (Ramnath Goenka Award ceremony) में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि रहे। इस मौके पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू भी मौजूद थे।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद की बुनियादी भूमिका है। उन्होंने कहा कि बहस, चर्चा और असहमति से ही नीतियां बेहतर बनती हैं और फैसलों को वैधता मिलती है।
राधाकृष्णन ने रामनाथ गोयनका की उस ऐतिहासिक हिम्मत को याद किया, जब आपातकाल (Emergency) के दौरान इंडियन एक्सप्रेस ने अपना संपादकीय (Editorial) खाली छोड़ दिया था। यह प्रेस की आजादी और संपादकीय साहस का एक ताकतवर प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा कि इन पुरस्कारों की 20 साल की विरासत इसी साहस को सलाम करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना है। उन्होंने जोर दिया कि विकास समावेशी होना चाहिए।
समारोह में लोकसभा सांसद अनिल मनीष तेवारी, अनिल बलूनी और राजीव कुमार राय, राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला, भाजपा (BJP- Bharatiya Janata Party) नेता राजेंद्र अग्रवाल, सीपीआई (CPI- Communist Party of India) महासचिव डी. राजा और मंगोलियाई राजदूत गंबोल्ड दांबाजव भी शामिल हुए। राजनीति के दोनों ध्रुवों का एक मंच पर मौजूद होना ही इस समारोह की खासियत है।
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28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार (RNG Awards- Ramnath Goenka Excellence in Journalism Awards) का 20वां संस्करण आयोजित हुआ। इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर राजकमल झा ने कहा कि अच्छी पत्रकारिता वह है, जो ऐसी कहानियां सुनाए जिन्हें सत्ता में बैठे लोग दबाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार को पाठक का भरोसा जीतने के लिए सच बोलना होगा, न कि वह जो लोग सुनना चाहते हैं।
राजकमल झा ने क्या कहा?
उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को पाठकों का भरोसा वह बोलकर नहीं जीतना है जो वे सुनना चाहते हैं, बल्कि सच बोलकर जीतना है। जब यह बात माइक से निकली, तो हॉल में तालियां गूंज उठीं।
झा का यह भाषण इसलिए भी खास था क्योंकि यह न तो सरकार पर सीधा हमला था, न ही चापलूसी। यह पत्रकारिता के बुनियादी मकसद की याद दिलाना था- सरल शब्दों में, लेकिन गहरी बात।
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राजकमल झा जो बोले, उन्हीं के शब्दों में…
एक कहानी है जो माता-पिता की दिल दहला देने वाली ताकत दिखाती है। वे अपने बच्चे के सम्मान से मरने के अधिकार के लिए लड़ रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सुनवाई की और बच्चा इस हफ्ते चला गया। एक और कहानी है जो दुनिया की सबसे अमीर कंपनी के सप्लायर की जांच करती है। उसने शादीशुदा महिलाओं के जॉब आवेदनों को ठुकरा दिया। ये अच्छी पत्रकारिता का उदाहरण है।
हमें पत्रकारिता के सर्टिफिकेट दिए जाते हैं। राष्ट्रवाद के सर्टिफिकेट दिए जाते हैं। एक तो राजनेता है जो एडिटर बनने की कोशिश कर रहा है। दूसरा पत्रकार है जो राजनेता बनने की कोशिश कर रहा है। ये शोर हमेशा लगा रहता है। कभी-कभी हम मानने लगते हैं कि यही मायने रखता है। लेकिन ये मायने नहीं रखता। हमें इन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं। हमें चाहिए पाठक का सम्मान। वो पाठक जो हमारी ओर लौटता है... क्योंकि हमने उसे वो बताया जो वो सुनना नहीं चाहता।
जैसा कि जॉर्ज ऑरवेल ने लिखा- हमारे समय के सबसे पसंदीदा सूत्रधार- हमें आजादी चाहिए ये कहने की कि दो और दो चार बनते हैं। और ताकत व हिम्मत चाहिए ये कहने की कि 6 कभी 9 नहीं हो सकता। बहुत-बहुत धन्यवाद।
पिछले भाषणों से कैसे अलग है यह भाषण?
साल 2025 में उन्होंने युवा पत्रकारों पर भरोसा जताते हुए पत्रकारिता के मृत्युलेख लिखने वालों को जवाब दिया था। और 2026 में उनका संदेश और भी पैना हो गया। अब वे सीधे कह रहे हैं कि पत्रकारिता का काम है वह कहना जो सत्ता नहीं चाहती। यह बात आज के दौर में बहुत मायने रखती है।
यह भाषण वायरल क्यों हुआ?
विवेक गोयनका ने भविष्य की बात कही
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का बुनियादी मिशन नहीं बदला है- पक्ष लेना नहीं, बल्कि रोशनी देना। नागरिकों को वह जानकारी देना जो उन्हें दुनिया समझने और अपनी आजादी का इस्तेमाल करने में मदद करे। यह बात डिजिटल और एआई (AI- Artificial Intelligence) के दौर में और भी जरूरी हो गई है।
RNG अवॉर्ड्स 2026 कहां और कब हुआ?
उपराष्ट्रपति ने असहमति पर क्या कहा?
राधाकृष्णन ने रामनाथ गोयनका की उस ऐतिहासिक हिम्मत को याद किया, जब आपातकाल (Emergency) के दौरान इंडियन एक्सप्रेस ने अपना संपादकीय (Editorial) खाली छोड़ दिया था। यह प्रेस की आजादी और संपादकीय साहस का एक ताकतवर प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा कि इन पुरस्कारों की 20 साल की विरासत इसी साहस को सलाम करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना है। उन्होंने जोर दिया कि विकास समावेशी होना चाहिए।
समारोह में लोकसभा सांसद अनिल मनीष तेवारी, अनिल बलूनी और राजीव कुमार राय, राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला, भाजपा (BJP- Bharatiya Janata Party) नेता राजेंद्र अग्रवाल, सीपीआई (CPI- Communist Party of India) महासचिव डी. राजा और मंगोलियाई राजदूत गंबोल्ड दांबाजव भी शामिल हुए। राजनीति के दोनों ध्रुवों का एक मंच पर मौजूद होना ही इस समारोह की खासियत है।
FAQ
- रामनाथ गोयनका अवॉर्ड्स 2026 में क्या खास था?
यह इस पुरस्कार का 20वां यानी दो दशक पुराना संस्करण था। इस बार मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन थे। इंडियन एक्सप्रेस के प्रधान संपादक राजकमल झा और एक्सप्रेस ग्रुप के चेयरमैन विवेक गोएनका ने पत्रकारिता के भविष्य पर महत्वपूर्ण बातें कहीं। समारोह में राजनीति के अलग-अलग दलों के नेता, सांसद और राजनयिक मौजूद थे। रामनाथ गोएनका के आपातकाल वाले साहस को भी याद किया गया। - राजकमल झा के 2026 के भाषण का मुख्य संदेश क्या था?
राजकमल झा का मुख्य संदेश बेहद सीधा और गहरा था- अच्छी पत्रकारिता वह है जो वे कहानियां बताए जो सत्ता में बैठे लोग छुपाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार का काम पाठकों को वह बताना नहीं है जो वे सुनना चाहते हैं, बल्कि वह बताना है जो सच है। इसी भरोसे पर पत्रकारिता टिकी है। यह बात उन्होंने ऐसे वक्त में कही जब देश में मीडिया की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठते रहते हैं।
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