राम मंदिर दान जांच में सुप्रीम कोर्ट सख्त, SIT में स्वतंत्र ऑडिटर जोड़ने के निर्देश
Pawan Modiya | Jul 29, 2026, 24:47 IST
राम मंदिर दान
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान से जुड़े कथित गबन मामले की जांच कर रही SIT में स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिटर शामिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने दो सप्ताह में जांच की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- राम मंदिर दान मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट पहुंची।
- SIT में स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिटर जोड़ने का निर्देश मिला।
- अदालत ने दो सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट मांगी।
- दान रसीदें वेबसाइट पर डालने की मांग भी उठी।
- मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची भी शामिल रहे। न्यायमूर्ति वी. मोहनन भी पीठ का हिस्सा थे। अदालत ने निष्पक्ष जांच पर जोर दिया। पीठ ने स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिटर जोड़ने की बात कही। अदालत ने कहा कि ऑडिटर का अनुभव जांच में उपयोगी होगा। पीठ ने कहा कि इससे जांच की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
SIT में क्या बदलाव होगा
सरकार ने कहा कि नई टीम अदालत के निर्देशों के अनुसार बनी। पहले वाली जांच टीम का अनुभव भी उपयोग होगा। अदालत ने पूछा कि पुरानी टीम निगरानी कर सकती है या नहीं। इस पर सरकार ने जांच व्यवस्था की जानकारी दी। सुनवाई के दौरान स्वतंत्र ऑडिटर जोड़ने का सुझाव सामने आया। सॉलिसिटर जनरल ने इस सुझाव पर सहमति जताई।
अदालत ने क्यों दिया निर्देश
पीठ ने कहा कि जांच पारदर्शी होनी चाहिए। अदालत ने जांच की प्रगति पर नजर रखने की बात कही। दो सप्ताह बाद अगली सुनवाई तय की गई। तब तक SIT को स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी।
ट्रस्ट की पारदर्शिता पर भी चर्चा
उन्होंने सुझाव दिया कि सभी रसीदें वेबसाइट पर हों। इससे दानदाताओं को जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि लोग जान सकेंगे कि राशि ट्रस्ट तक पहुंची या नहीं। ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि कार्यवाही विरोधी नहीं है। साथ ही कहा गया कि छिपाने जैसा कुछ नहीं है।
अन्य याचिकाओं में क्या मांग
दूसरी याचिका राज्यसभा सांसद सुधाकर सिंह ने दायर की। उन्होंने अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की। उन्होंने व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी अपील की। याचिका में डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग उठी। इसमें बैंक स्टेटमेंट और UPI रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया।
अदालत ने क्या स्वीकार नहीं किया
अदालत ने कहा कि पहले SIT अपनी जांच पूरी करे। जरूरत पड़ने पर बाद में निर्देश दिए जाएंगे। पीठ ने कहा कि फिलहाल जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसलिए इस चरण में अतिरिक्त आदेश नहीं दिए गए।
जांच पर रखेगी नजर
पीठ ने कहा कि जांच निष्पक्ष रहनी चाहिए। साथ ही गुणवत्ता भी बनी रहनी चाहिए। इसी कारण स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिटर जोड़ने का निर्देश दिया गया।
ट्रस्ट का पक्ष क्या रहा
जांच क्यों अहम मानी जा रही
आगे क्या होगा
फिलहाल अदालत ने जांच जारी रखने को कहा है। मामले के अंतिम निष्कर्ष पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर भी अभी न्यायिक फैसला आना बाकी है।
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