EMI चूकी तो तुरंत लॉक नहीं होगा फोन और लैपटॉप, RBI ने जारी की नई गाईडलाइन
Amresh Kushwaha | Aug 08, 2026, 10:15 IST
EMI चूकी तो तुरंत नहीं होगा फोन लॉक
आरबीआई ने ईएमआई पर खरीदे गए फोन और लैपटॉप को रिमोट लॉक करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। अब 30 दिन की देरी पर ही आंशिक बैन और 60 दिन बाद पूरा लॉक लगेगा।
समझें क्या है पूरा मामला...
स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप को ईएमआई (Equated Monthly Instalment) पर खरीदने वालों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसे लेकर नए और सख्त नियम जारी किए हैं। अब तक कई मामलों में ईएमआई चूकते ही डिवाइस तुरंत लॉक कर दिया जाता था।
इससे ग्राहकों को कई बार भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी। अब आरबीआई ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए साफ नियम तय कर दिए हैं। यह नया फ्रेमवर्क 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में लागू होगा।
हाल के समय में फाइनेंस किए गए डिवाइस को रिमोट तरीके से लॉक करने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई मामलों में बैंक और फाइनेंस कंपनियां जरूरत से ज्यादा सख्ती दिखा रही थीं। इससे ग्राहकों पर अनुचित दबाव बनाने की शिकायतें भी सामने आईं।
रिजर्व बैंक का कहना है कि लेंडर्स को अपनी बकाया रकम वसूलने का पूरा अधिकार है। वहीं, इसके लिए तकनीक का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि आरबीआई ने अब इसके लिए स्पष्ट प्रक्रिया तय की है।
आरबीआई ने साफ किया है कि रिमोट बैन सिर्फ उसी डिवाइस पर लगाया जा सकता है, जिसे खरीदने के लिए खास तौर पर लोन लिया गया हो। यानी अगर किसी ने पर्सनल लोन या कोई अन्य सामान्य लोन लिया है, तो उस पैसे से खरीदे गए फोन या लैपटॉप पर यह नियम लागू नहीं होगा।
सिर्फ डिवाइस फाइनेंसिंग स्कीम के तहत खरीदे गए स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप ही इस दायरे में आएंगे। यह स्पष्टता ग्राहकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। इससे गलत तरीके से लॉक होने के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
आरबीआई ने डिवाइस पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक तय प्रक्रिया बनाई है। अब ईएमआई डिफॉल्ट होते ही डिवाइस को तुरंत रिमोट तरीके से बंद नहीं किया जा सकेगा। बैन की शुरुआत तभी हो सकेगी, जब लोन खाता कम से कम 30 दिन से ओवरड्यू हो।
इस दौरान डिवाइस पर सिर्फ आंशिक प्रतिबंध लगाया जा सकेगा। डिवाइस को पूरी तरह लॉक करने की अनुमति सिर्फ 60 दिन के ओवरड्यू के बाद ही मिलेगी। आरबीआई ने साफ निर्देश दिया है कि शुरुआत से ही पूरा डिवाइस बंद नहीं किया जा सकता।
नए नियम के तहत डिवाइस पर बैन लगने के बाद भी कुछ जरूरी सेवाएं बंद नहीं होंगी। इनमें इनकमिंग कॉल, एसएमएस (SMS) और इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली एसओएस (SOS) सेवा शामिल है। यानी लॉक होने के बावजूद ग्राहक इमरजेंसी में संपर्क कर सकेगा।
इसके अलावा नौकरी या काम के लिए जरूरी फीचर्स को भी बंद करने की इजाजत नहीं होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईएमआई में देरी होने पर भी ग्राहक पूरी तरह अलग-थलग न पड़ जाए। आरबीआई का यह कदम ग्राहकों की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
आरबीआई के नए फ्रेमवर्क में ग्राहक की प्राइवेसी को भी अहमियत दी गई है। डिवाइस पर बैन लगाते समय बैंक या लेंडर कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो, वीडियो, मैसेज, कॉल लॉग या लोकेशन हिस्ट्री जैसे निजी डेटा तक नहीं पहुंच सकेंगे। यानी लॉकिंग तकनीक सिर्फ लोन रिकवरी तक सीमित रहेगी।
इसके जरिए ग्राहक की निजी जानकारी हासिल करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह नियम ग्राहकों के डेटा सुरक्षा अधिकार को भी मजबूत करता है। कई मामलों में पहले निजी डेटा तक पहुंच बनाने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
आरबीआई ने लेंडर्स के लिए एक और अहम शर्त रखी है। लोन मंजूर करते समय ही कस्टमर को साफ तौर पर बताना होगा कि ईएमआई न भरने पर डिवाइस पर रिमोट बैन लगाया जा सकता है। इसके अलावा बैन लागू करने से पहले भी ग्राहक को इसकी अलग से सूचना देनी होगी।
इससे ग्राहक को पहले से पता रहेगा कि डिफॉल्ट होने पर उसके डिवाइस पर क्या कार्रवाई हो सकती है। यह पारदर्शिता ग्राहकों के भरोसे को बढ़ाने वाला कदम मानी जा रही है। पहले कई बार ग्राहकों को बिना सूचना के ही डिवाइस लॉक होने की शिकायत रहती थी।
नए नियम में एक और अहम प्रावधान जोड़ा गया है। अगर ग्राहक अपना पूरा बकाया चुका देता है, तो लेंडर को डिवाइस पर लगा बैन तुरंत हटाना होगा। यदि भुगतान के बाद भी डिवाइस समय पर अनलॉक नहीं किया जाता, तो इसका खामियाजा बैंक या फाइनेंस कंपनी को भुगतना होगा।
ऐसी स्थिति में बैंक या रेगुलेटेड एंटिटी को ग्राहक को हर घंटे 250 रुपए मुआवजे के तौर पर देने होंगे। यह प्रावधान लेंडर्स पर समय पर काम करने का दबाव बनाएगा। ग्राहकों के लिए यह एक बड़ी सुरक्षा गारंटी मानी जा रही है।
आरबीआई का कहना है कि इस नए फ्रेमवर्क का मकसद लोन रिकवरी के अधिकार और ग्राहक के हितों के बीच संतुलन बनाना है। एक तरफ लेंडर्स को अपना बकाया वसूलने का हक मिलता रहेगा। वहीं दूसरी तरफ ग्राहकों को मनमानी कार्रवाई से बचाया जा सकेगा।
यह कदम खासतौर पर उन ग्राहकों के लिए राहत भरा है जो डिजिटल डिवाइस पर रोजमर्रा के कामकाज के लिए निर्भर हैं। आज के समय में फोन सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि काम और पढ़ाई का भी अहम हिस्सा बन गया है। इसीलिए आरबीआई ने इसे लेकर इतनी बारीकी से नियम बनाए हैं।
1 जनवरी 2027 से यह नियम लागू होते ही बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को अपनी प्रक्रिया बदलनी होगी। सभी लेंडर्स को अपने सिस्टम में फेजवाइज बैन की व्यवस्था करनी होगी। ग्राहकों को भी लोन लेते समय इन नियमों की जानकारी दी जाएगी।
इससे डिवाइस फाइनेंसिंग को लेकर ग्राहकों का भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है। आने वाले समय में और भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के लिए ऐसे पारदर्शी नियम बन सकते हैं। कुल मिलाकर यह कदम डिजिटल लेंडिंग को ज्यादा जिम्मेदार बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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- आरबीआई ने ईएमआई परडिवाइस लॉक करने के नए नियम बनाए हैं।
- अब सिर्फ 30 दिन की देरी पर पूरा फोन लॉकनहीं होगा।
- 60 दिनओवरड्यू के बाद ही डिवाइस पूरी तरह बंदहोगा।
- समय पर अनलॉक न करने परहर घंटे 250 रुपए जुर्माना लगेगा।
- यह नयानियम 1जनवरी 2027 से पूरे देश में लागू होगा।
अब मनमाने तरीके से लॉक नहीं होगा फोन
इससे ग्राहकों को कई बार भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी। अब आरबीआई ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए साफ नियम तय कर दिए हैं। यह नया फ्रेमवर्क 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में लागू होगा।
क्यों बनाना पड़ा यह नियम
रिजर्व बैंक का कहना है कि लेंडर्स को अपनी बकाया रकम वसूलने का पूरा अधिकार है। वहीं, इसके लिए तकनीक का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि आरबीआई ने अब इसके लिए स्पष्ट प्रक्रिया तय की है।
किन डिवाइस पर लागू होगा नियम
सिर्फ डिवाइस फाइनेंसिंग स्कीम के तहत खरीदे गए स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप ही इस दायरे में आएंगे। यह स्पष्टता ग्राहकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। इससे गलत तरीके से लॉक होने के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
चरणबद्ध तरीके से होगी कार्रवाई
इस दौरान डिवाइस पर सिर्फ आंशिक प्रतिबंध लगाया जा सकेगा। डिवाइस को पूरी तरह लॉक करने की अनुमति सिर्फ 60 दिन के ओवरड्यू के बाद ही मिलेगी। आरबीआई ने साफ निर्देश दिया है कि शुरुआत से ही पूरा डिवाइस बंद नहीं किया जा सकता।
जरूरी सुविधाएं रहेंगी चालू
इसके अलावा नौकरी या काम के लिए जरूरी फीचर्स को भी बंद करने की इजाजत नहीं होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईएमआई में देरी होने पर भी ग्राहक पूरी तरह अलग-थलग न पड़ जाए। आरबीआई का यह कदम ग्राहकों की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
ग्राहक की निजता का भी रखा ध्यान
इसके जरिए ग्राहक की निजी जानकारी हासिल करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह नियम ग्राहकों के डेटा सुरक्षा अधिकार को भी मजबूत करता है। कई मामलों में पहले निजी डेटा तक पहुंच बनाने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
लोन लेते समय ही मिलेगी जानकारी
इससे ग्राहक को पहले से पता रहेगा कि डिफॉल्ट होने पर उसके डिवाइस पर क्या कार्रवाई हो सकती है। यह पारदर्शिता ग्राहकों के भरोसे को बढ़ाने वाला कदम मानी जा रही है। पहले कई बार ग्राहकों को बिना सूचना के ही डिवाइस लॉक होने की शिकायत रहती थी।
भुगतान के बाद तुरंत हटाना होगा बैन
ऐसी स्थिति में बैंक या रेगुलेटेड एंटिटी को ग्राहक को हर घंटे 250 रुपए मुआवजे के तौर पर देने होंगे। यह प्रावधान लेंडर्स पर समय पर काम करने का दबाव बनाएगा। ग्राहकों के लिए यह एक बड़ी सुरक्षा गारंटी मानी जा रही है।
क्या है इसका मकसद
यह कदम खासतौर पर उन ग्राहकों के लिए राहत भरा है जो डिजिटल डिवाइस पर रोजमर्रा के कामकाज के लिए निर्भर हैं। आज के समय में फोन सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि काम और पढ़ाई का भी अहम हिस्सा बन गया है। इसीलिए आरबीआई ने इसे लेकर इतनी बारीकी से नियम बनाए हैं।
आगे क्या बदलाव आएगा
इससे डिवाइस फाइनेंसिंग को लेकर ग्राहकों का भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है। आने वाले समय में और भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के लिए ऐसे पारदर्शी नियम बन सकते हैं। कुल मिलाकर यह कदम डिजिटल लेंडिंग को ज्यादा जिम्मेदार बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
FAQ
- आरबीआई का नया डिवाइस लॉक नियम कब से लागू होगा?
आरबीआई का यह नया फ्रेमवर्क 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में लागू होगा। इसके तहत ईएमआई पर खरीदे गए फोन, टैबलेट और लैपटॉप को लॉक करने की प्रक्रिया के लिए साफ नियम तय किए गए हैं। - ईएमआई चूकने पर डिवाइस कब पूरी तरह लॉक होगा?
लोन खाता कम से कम 30 दिन ओवरड्यू होने पर ही डिवाइस पर आंशिक बैन लगाया जा सकेगा। डिवाइस को पूरी तरह लॉक करने की अनुमति सिर्फ 60 दिन के ओवरड्यू के बाद ही मिलेगी।
RBI का बड़ा फैसला: बिना मर्जी ग्राहकों को बेची सर्विस तो लगेगा भारी जुर्माना
नया नियम लागू होने से पहले ले लो होम लोन वरना नहीं मिलेगा, जानें RBI का नया नियम
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