सरकारी कंपनी REC का PFC में विलय, राष्ट्रपति की मंजूरी मिली
Pawan Modiya | Jun 11, 2026, 24:30 IST
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सरकारी कंपनी आरईसी लिमिटेड (REC Limited) का पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) में विलय अब लगभग तय हो गया है। 10 जून को आरईसी ने स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया कि राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है।
समझें क्या है पूरा मामला
- सरकारी कंपनी आरईसी लिमिटेड का पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन में विलय प्रस्तावित है।
- 16 मई 2026 को आरईसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा था।
- 10 जून 2026 को विद्युत मंत्रालय ने राष्ट्रपति की मंजूरी की जानकारी दी।
- आरईसी ने यह सूचना NSE और BSE दोनों एक्सचेंज को आधिकारिक रूप से दी।
- यह विलय भारत के पावर सेक्टर की फाइनेंसिंग व्यवस्था को नया आकार देगा।
दो सरकारी दिग्गजों का विलय
यह कोई छोटा-मोटा कारोबारी फैसला नहीं है। देश के पावर सेक्टर (Power Sector) की फाइनेंसिंग में इन दोनों कंपनियों की मिलाकर भूमिका अरबों रुपए के स्तर पर है।
16 मई से चली थी यह प्रक्रिया
10 जून को विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) ने एक पत्र के जरिए आरईसी को सूचित किया कि राष्ट्रपति की स्वीकृति इस प्रस्ताव पर मिल गई है। इसके बाद आरईसी ने सेबी (SEBI - Securities and Exchange Board of India) के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशंस (Listing Obligations and Disclosure Requirements Regulations), 2015 के नियम 30 के तहत यह सूचना स्टॉक एक्सचेंज को देना अनिवार्य था।
आरईसी और पीएफसी क्या हैं?
इस विलय के बाद बनने वाली संयुक्त इकाई पावर सेक्टर की फाइनेंसिंग में देश की सबसे बड़ी संस्था बन जाएगी। इससे सरकार दोहरी प्रशासनिक संरचना की बजाय एकीकृत ढांचे से काम कर सकेगी।
जरूरी FAQ
भारत सरकार ने पावर सेक्टर की वित्तीय संरचना को सुव्यवस्थित और मजबूत बनाने के लिए यह फैसला लिया है। आरईसी लिमिटेड (REC Limited - Rural Electrification Corporation) और पीएफसी (PFC - Power Finance Corporation) दोनों एक ही क्षेत्र में काम करती हैं। दोनों का विलय करने से दोहरी प्रशासनिक लागत कम होगी, पूंजी का बेहतर उपयोग होगा और बिजली परियोजनाओं को वित्त पोषण देने में ज्यादा ताकत मिलेगी। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 16 मई 2026 को यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा था और 10 जून 2026 को मंजूरी मिल गई।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब विलय की अगली प्रक्रिया क्या होगी?
राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद विलय की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें सेबी (SEBI - Securities and Exchange Board of India) और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT - National Company Law Tribunal) से मंजूरी लेनी होगी। शेयरधारकों की बैठक बुलाई जाएगी जहां विलय की शर्तें, शेयर अदला-बदली अनुपात और अन्य विवरण तय होंगे। इसके बाद दोनों कंपनियों का कानूनी रूप से एकीकरण होगा।
आरईसी और पीएफसी के विलय का आम निवेशकों पर क्या असर होगा?
आरईसी (Scrip Code: NSE पर RECLTD, BSE पर 532955) और पीएफसी दोनों शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियां हैं। विलय की प्रक्रिया में शेयर अदला-बदली का अनुपात तय होगा जिसके आधार पर आरईसी के शेयरधारकों को पीएफसी के शेयर मिल सकते हैं। यह जानकारी मूल्य संवेदनशील होने के कारण सेबी नियमों के तहत तुरंत सार्वजनिक की गई। निवेशकों को आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना चाहिए। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर सलाह लें।
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