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News In Short
- 3 फरवरी को रुपया 130 पैसे की मजबूती के साथ 90.20 के स्तर पर पहुंचा, जो 3 साल की सबसे बड़ी छलांग है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) को 50% से घटाकर 18% कर दिया।
- समझौते के तहत भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात करेगा।
- भारत अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से 45 लाख करोड़ रुपए की एनर्जी और टेक्नोलॉजी खरीदेगा।
- एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि निर्यात बढ़ने से रुपया आने वाले समय में 89 के स्तर तक जा सकता है।
News In Detail
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मंगलवार (3 फरवरी, 2026) का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ने 130 पैसे की जबरदस्त छलांग लगाई और 90.20 के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले तीन सोलों की सबसे बड़ी एकल बढ़त है। पिछले क्लोजिंग भाव 91.49 के मुकाबले रुपए की यह वापसी बाजार एक्सपर्ट्स के लिए भी चौंकाने वाली रही है।
ट्रम्प की ट्रेड डील ने पलटी बाजी
रुपए की इस मजबूती के पीछे भारत और अमेरिका के बीच हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर मात्र 18% कर दिया है। पिछले साल अगस्त से टैरिफ को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई थी, वह इस ऐलान के साथ खत्म हो गई है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि इस गिव एंड टेक समझौते के तहत भारत अब रूस के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा।
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45 लाख करोड़ का निवेश और रूसी तेल से दूरी
इस समझौते के तहत भारत ने अगले कुछ सालों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर (लगभग 45 लाख करोड़ रुपए) की एनर्जी, टेक्नोलॉजी और कृषि उत्पाद खरीदने का वादा किया है। इस प्रतिबद्धता ने वैश्विक बाजार में रुपए की साख बढ़ा दी है। इससे पहले साल 2025 में रुपया करीब 5% तक टूटकर एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बन गया था और जनवरी 2026 में भी इसमें 2% की गिरावट आई थी, लेकिन इस एक डील ने पूरा परिदृश्य बदल दिया।
क्या 89 के स्तर पर पहुंचेगा रुपया?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपए में यह तेजी अभी थमने वाली नहीं है। एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, एक्सपोर्ट बढ़ने की उम्मीद से रुपए की डिमांड और बढ़ेगी, जिससे यह जल्द ही 89.50 से 89.00 के स्तर को छू सकता है। वहीं, कोटक सिक्योरिटीज के अनिंद्य बनर्जी का कहना है कि टैरिफ में कटौती ने मजबूती के रास्ते तो खोल दिए हैं, लेकिन अब नजरें RBI के हस्तक्षेप पर टिकी हैं कि वह किस स्तर पर डॉलर की खरीदारी या बिकवाली करता है।
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समझिए कैसे घटती-बढ़ती है करेंसी की कीमत
आसान शब्दों में कहें तो किसी भी करेंसी की वैल्यू उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर टिकी होती है। जब हमारे पास डॉलर का भंडार कम होता है, तो रुपया कमजोर होने लगता है। अगर हमारे पास डॉलर बढ़ेंगे, तो रुपया मजबूत होगा। मंगलवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के दबाव के बावजूद ट्रेड डील की खबर ने रुपए को ऑक्सीजन देने का काम किया।
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