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Photograph: (thesootr)
News In Short
- भारत रूस से और ज्यादा खरीद सकता है तेल।
- अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने दिया विशेष लाइसेंस।
- रूस से सस्ता तेल भारत के लिए आर्थिक फायदा।
- ईरान संघर्ष के कारण ग्लोबल तेल बाजार प्रभावित।
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इस छूट का असर नहीं होगा।
News In Detail
iran israel war: भारत को रूस से कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) खरीदने के लिए अमेरिका ने 3 अप्रैल तक छूट दी है। यह छूट अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी की गई थी। इसका उद्देश्य ईरान संघर्ष के दौरान ग्लोबल तेल सप्लाई में हो रही अस्थिरता को कम करना है।
हालांकि, वैश्विक तेल कीमतें 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि की संभावना नहीं है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी
भारत जो कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों से तेल का आयात करता है। पिछले कुछ समय से रूस से सस्ते तेल के आयात ने भारत को एक सुरक्षित और सस्ता विकल्प दिया है।
इस बीच, ईरान और इजराइल के बीच चल रही जंग ने विश्व ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा की है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।अमेरिका ने 3 अप्रैल तक भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट दी है, जो ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव डालने के साथ आया है।
रूस भारत के लिए सुरक्षित विकल्प
रूस से कच्चा तेल सस्ते दामों पर मिलने से भारत को आर्थिक लाभ हो रहा है। भारत को यह तेल बेंचमार्क कीमतों से डिस्काउंट पर मिलता है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहती हैं और महंगाई पर काबू पाया जा सकता है।
इसके अलावा जब मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ता है और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में आपूर्ति रुकने की स्थिति बनती है, तो रूस भारत के लिए एक सुरक्षित विकल्प बन जाता है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा...
भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिका से छूट मिलने के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि-
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। ईरान संघर्ष और ग्लोबल तेल बाजार में अस्थिरता के बावजूद, रूस से सस्ता तेल भारत के लिए एक सुरक्षित विकल्प है।
इसके अलावा अन्य नेताओं ने भी इस फैसले को "भारत की ऊर्जा नीति के लिए सही दिशा" में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भारत को तेल आपूर्ति में किसी प्रकार की रुकावट का सामना नहीं होगा। यह वैश्विक तेल बाजार में एक स्थिरता लाने का काम करेगा।
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अमेरिका का छूट देने का कारण
अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए छूट दी है, ताकि ग्लोबल तेल मार्केट में तेल की आपूर्ति स्थिर बनी रहे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि
भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है, और हम चाहते हैं कि भारत को इस मुश्किल समय में समर्थन दिया जाए। भारत को यह छूट 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगी, और इसके तहत केवल उन तेल टैंकरों से सप्लाई की जाएगी, जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं।
- भारत को अमेरिका से 30 दिन की छूट मिली है: रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत को अमेरिका से विशेष लाइसेंस मिला है, जो 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा।
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी: यह छूट पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
- रूस से सस्ता तेल मिलेगा: भारत रूस से बेंचमार्क कीमतों से डिस्काउंट पर तेल खरीदने में सक्षम होगा, जिससे देश को ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- ईरान युद्ध का असर: ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन इस छूट से भारत को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- रक्षामंत्री का बयान: राजनाथ सिंह ने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की बाधा का असर सीधे तौर पर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है, लेकिन रूस से सस्ता तेल खरीदने से भारत को इसका सामना नहीं करना पड़ेगा।
रूस से तेल खरीदने के फायदे...
- सस्ता तेल:रुस भारत को बेंचमार्क कीमतों से कम कीमत पर तेल प्रदान करता है, जिससे देश को तेल के आयात पर खर्च कम करने में मदद मिलती है।
- सप्लाई सिक्योरिटी: मध्य-पूर्व में युद्ध या संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति में रुकावट आ सकती है, लेकिन रूस से तेल का आयात भारत के लिए एक सुरक्षित विकल्प है।
- आर्थिक स्थिरता: सस्ता तेल मिलने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहती हैं और महंगाई नियंत्रण में रहती है।
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत को ऊर्जा आपूर्ति के लिए भरोसेमंद स्रोत की जरूरत है, और रूस इसके लिए एक मजबूत विकल्प है।
- वैश्विक संकट के समय सहयोग: अमेरिका द्वारा दी गई छूट से यह सुनिश्चित हो जाता है कि भारत के तेल आपूर्ति संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा, विशेष रूप से वैश्विक स्तर पर हो रहे अस्थिरताओं के बीच।
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार, भारत रूस से तेल खरीदने के लिए टैंकरों में भरे लगभग 95 लाख बैरल तेल को तुरंत रिसीव कर सकता है, जो एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में खड़े हैं। इससे ट्रांसपोर्टेशन की लागत और समय दोनों ही कम होंगे।
रूस तेल आयात 30% तक पहुंचा
भारत का रूसी तेल आयात पिछले साल नवंबर में यूक्रेन संकट के बाद कम हो गया था, लेकिन अब यह फिर से बढ़कर 30% तक पहुंच गया है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियां रूस से सस्ता तेल खरीदने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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