सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री : सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
Sanjay Dhiman | May 14, 2026, 23:51 IST
Photograph: (the sootr)
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। 16 दिन चली सुनवाई में संवैधानिक सवालों पर लंबी बहस हुई। आस्था और संविधान की इस जंग पर अब फैसला जल्द आ सकता है।
सबरीमाला मंदिर का मामला एक बार फिर सुर्खियों में छा गया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस पर सुनवाई पूरी कर ली है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली 9 जजों की बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा है। पूरे 16 दिनों तक कोर्ट में दलीलों और तीखी बहसों का दौर चला। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि आखिर जीत किसकी होगी। क्या सदियों पुरानी परंपरा बरकरार रहेगी या फिर संविधान की जीत होगी?
केरल के मशहूर सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री बैन है। माना जाता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं, इसलिए यह पाबंदी लगी है। साल 2018 में कोर्ट ने इस बैन को पूरी तरह हटा दिया था। लेकिन इसके बाद भारी विरोध प्रदर्शन हुए और कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं। मामला इतना उलझ गया कि इसे 9 जजों की बड़ी बेंच को भेजा गया। अब यह सिर्फ एक मंदिर का नहीं, बल्कि धार्मिक आजादी का मुद्दा है।
![1b87c8eb-f08]()
मोदी सरकार ने इस मामले में खुलकर मंदिर की परंपराओं का समर्थन किया है। केंद्र ने साफ कहा कि धार्मिक आस्था के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। सरकार की दलील है कि देश में कई ऐसे मंदिर भी हैं जहां पुरुषों का जाना मना है। इसलिए सबरीमाला की इस खास परंपरा को भी सम्मान मिलना ही चाहिए। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में कहा कि यह संप्रदाय की अपनी स्वायत्तता का मामला है।
इस सुनवाई में केवल सबरीमाला ही नहीं, बल्कि और भी कई मुद्दे शामिल हैं। मुस्लिम महिलाओं का मस्जिदों में जाना और पारसी महिलाओं के अधिकार भी इसमें जुड़े हैं। कोर्ट यह तय करेगा कि धार्मिक आजादी का दायरा आखिर कितना बड़ा है। क्या जजों को यह हक है कि वे तय करें कि कौन सी रस्म सही है? अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मिलने वाले अधिकारों की व्याख्या अब नए सिरे से होगी।
इस मुद्दे पर देश की राजनीति भी पूरी तरह से दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ वो लोग हैं जो इसे महिलाओं के बराबरी के अधिकार से जोड़ते हैं। दूसरी तरफ वो करोड़ों भक्त हैं जिनकी भावनाएं भगवान अयप्पा की परंपरा से जुड़ी हैं। चुनाव के वक्त भी सबरीमाला का मुद्दा केरल में बहुत बड़ा फैक्टर साबित होता रहा है। नेताओं के लिए यह आस्था और वोट बैंक के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
साल 2018 के फैसले के बाद केरल की सड़कों पर जो संग्राम दिखा, वो डराने वाला था। उस वक्त कोर्ट ने कहा था कि बायोलॉजिकल वजहों से भेदभाव करना पूरी तरह गलत है। लेकिन अब 9 जजों की बेंच को यह देखना है कि क्या धर्म के आंतरिक मामलों में कानून आ सकता है। अगर फैसला महिलाओं के हक में आता है, तो यह एक बड़ी सामाजिक क्रांति होगी।
फिलहाल गेंद अब पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के पाले में चली गई है। जजों ने केंद्र, याचिकाकर्ताओं और धार्मिक संस्थाओं की बातें बहुत गहराई से सुनी हैं। फैसला कब आएगा, इसकी कोई तारीख तय नहीं है, लेकिन इसका असर सदियों तक रहेगा। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि जो भी फैसला आए, उससे समाज में समरसता बनी रहे।
यह खबरें भी पढ़ें...
सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश: हिंदू समाज एकजुट रहे
सबरीमाला मंदिर विवाद : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, क्या छूने से भगवान अपवित्र हो जाते हैं?
सबरीमाला मंदिर विवाद: महिलाओं की एंट्री पर SC में बहस, आस्था vs अधिकार का बड़ा सवाल
सबरीमाला मंदिर का वो सच जो महिलाओं पर पड़ गया फीका, जानें इस मंदिर का इतिहास
क्या है पूरा मामला? आसान भाषा में समझिए
1b87c8eb-f08
केंद्र सरकार का स्टैंड: परंपराओं के साथ खड़ा है प्रशासन
9 जजों की बेंच और वो 7 बड़े संवैधानिक सवाल
सियासी गलियारों में हलचल और जनता की राय
इतिहास और भविष्य: क्या बदलेगा सबरीमाला का स्वरूप?
निष्कर्ष: फैसले का इंतजार और शांति की अपील
यह खबरें भी पढ़ें...
सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश: हिंदू समाज एकजुट रहे
सबरीमाला मंदिर विवाद : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, क्या छूने से भगवान अपवित्र हो जाते हैं?
सबरीमाला मंदिर विवाद: महिलाओं की एंट्री पर SC में बहस, आस्था vs अधिकार का बड़ा सवाल
सबरीमाला मंदिर का वो सच जो महिलाओं पर पड़ गया फीका, जानें इस मंदिर का इतिहास
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava