CJP के सौरव दास ने बार काउंसिल से पूछा हिसाब, सालभर में 14 करोड़ कैसे खर्च हुए.?
Pawan Modiya | Aug 14, 2026, 17:13 IST
सौरव दास के आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने दावा किया कि बीसीआई ने एक साल में मीटिंग-कॉन्फ्रेंस पर 14 करोड़ रुपए खर्च किए। गजट में प्रकाशित ऑडिट रिपोर्ट से यह आंकड़ा सही निकला। जानें पूरा मामला।
समझें क्या है पूरा मामला
- सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने बीसीआई पर सवाल उठाए।
- उन्होंने दावा किया कि बीसीआई ने एक साल में 14 करोड़ रुपए खर्च किए।
- यह खर्च मीटिंग-कॉन्फ्रेंस और यात्रा पर बताया गया।
- दास की यह पोस्ट नालसार आदेश वापसी वाले दिन आई।
- भारत के राजपत्र में प्रकाशित ऑडिट रिपोर्ट से दास का दावा सही साबित हुआ।
दास ने एक और आंकड़ा भी दिया। इसमें से 12 करोड़ रुपए यात्रा और ठहरने पर गए। उनकी यह पोस्ट उसी दिन आई। उसी दिन बीसीआई ने नालसार छात्रों पर अपना आदेश वापस लिया।
🚨Friends, Mr. Manan Kumar Mishra’s Bar Council of India spent 14 CRORES on meetings and conferences in just one year.
Today, he had to withdraw a portion of his outrageous order on NALSAR students within 1 hour. So where and how is this 14 crores being spent?
12 crores was… pic.twitter.com/1OXU4YniIG
— Saurav Das (@SauravDassss) August 13, 2026
अब सवाल है कि दास का यह दावा कितना सही है। भारत के राजपत्र में प्रकाशित बीसीआई की ऑडिट रिपोर्ट में इसका जवाब मिलता है। रिपोर्ट के मुताबिक बीसीआई ने काउंसिल की गतिविधियों और बैठकों पर बड़ा खर्च किया। यह खर्च वित्त वर्ष 2024-25 में 14 करोड़ 22 लाख रुपए से ज्यादा रहा। यानी दास का आंकड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल खाता है।
क्या था नालसार वाला विवाद
आदेश जारी होते ही वकीलों और छात्रों में नाराजगी फैल गई। कई सीनियर वकीलों ने भी इस फैसले की आलोचना की। आखिरकार बीसीआई ने कुछ ही घंटों में अपना आदेश वापस ले लिया।
दास ने इसी घटनाक्रम को अपनी पोस्ट में जोड़ा। उन्होंने लिखा कि आदेश एक घंटे में वापस लेना कुछ दिखाता है। इससे लगता है कि फैसला जल्दबाजी में हुआ था। उनका कहना था कि यही जल्दबाजी खर्च के मामलों में भी दिखनी चाहिए। यानी खर्च का हिसाब भी उतनी ही तेजी से सार्वजनिक होना चाहिए।
गजट में दर्ज असली आंकड़े
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा यात्रा और बैठक खर्च का है। यह आंकड़ा 12 करोड़ 65 लाख 19 हजार रुपए से ज्यादा है। दास के दावे के मुताबिक यह रकम भी करीब 12 करोड़ रुपए ही थी। काउंसिल सदस्यों की यात्रा पर करीब 4 करोड़ 78 लाख रुपए खर्च हुए। विदेश यात्रा पर 2 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च किए गए। अनुशासन समिति की बैठकों की यात्रा पर 1 करोड़ 51 लाख रुपए गए। सामान्य बैठक खर्च 1 करोड़ 44 लाख रुपए रहा।
गोवा में हुई काउंसिल की बैठक पर भी खर्च दर्ज है। यह आंकड़ा 50 लाख रुपए से ज्यादा है। कानूनी शिक्षा समिति की बैठकों की यात्रा पर 36 लाख रुपए खर्च हुए। इसके अलावा कॉन्फ्रेंस, सेमिनार और वर्कशॉप पर करीब 79 लाख रुपए खर्च हुए। पुरस्कार और सम्मान समारोह पर 58 लाख रुपए से ज्यादा खर्च दर्ज है।
पिछले साल से कम रहा खर्च
मिश्रा और बीसीआई ने क्या कहा
मिश्रा ने अपनी पोस्ट में एक बात और कही। लोकतंत्र में असहमति का स्वागत है। लेकिन उन्होंने जोड़ा कि संवैधानिक संस्थाओं का सार्वजनिक मजाक बनाना सही नहीं है। दास की खर्च वाली पोस्ट पर बीसीआई ने अभी जवाब नहीं दिया है। मिश्रा बीसीआई के चेयरमैन का पद 2014 से संभाल रहे हैं। वे बिहार से राज्यसभा सांसद भी हैं।
अब आगे क्या होगा
जरूरी FAQ
वकील सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बीसीआई ने एक साल में मीटिंग और कॉन्फ्रेंस पर 14 करोड़ रुपए खर्च किए। इसमें से करीब 12 करोड़ रुपए यात्रा और ठहरने पर खर्च हुए। उन्होंने बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा से इस खर्च का हिसाब मांगा।
क्या सौरव दास का दावा सही निकला?
भारत के राजपत्र में प्रकाशित बीसीआई की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक दास का दावा काफी हद तक सही है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 का कुल खर्च 14 करोड़ 22 लाख रुपए से ज्यादा दर्ज है, जबकि यात्रा और बैठक खर्च करीब 12 करोड़ 65 लाख रुपए है।
सौरव दास की पोस्ट नालसार मामले से कैसे जुड़ी है?
दास की पोस्ट उसी दिन आई, जिस दिन बीसीआई ने नालसार यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों पर अपना विवादित आदेश वापस लिया। दास ने कहा कि आदेश एक घंटे में वापस लेना दिखाता है कि फैसला जल्दबाजी में हुआ था, और खर्च का हिसाब भी उतनी ही तेजी से सार्वजनिक होना चाहिए।
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