मर्जी से वेश्यावृत्ति करना अपराध नहीं, पुलिस प्रताड़ित नहीं कर सकती- सुप्रीम कोर्ट

Aman Vaishnav | Jun 02, 2026, 17:07 IST
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sc verdict voluntary sex work not crime india
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सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि सहमति से वेश्यावृत्ति करना अपराध नहीं है। पुलिस बालिग सेक्स वर्कर्स को परेशान या गिरफ्तार नहीं कर सकती हालांकि वेश्यालय चलाना गैरकानूनी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई बालिग अपनी मर्जी से वेश्यावृत्तिकरती है तो यह अपराध नहीं है।
  • अदालत ने पुलिस को हिदायत दी है कि ऐसी महिलाओं को गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है।
  • जबरदस्ती देह व्यापार कराना या वेश्यालय चलाना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
  • कोर्ट ने साफ किया कि संविधान के के तहत सेक्स वर्कर्स को भी सम्मान से जीने का पूरा अधिकार है।
  • कोई अपनी मर्जी से यह काम कर रहा है, तो उसे हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।

मर्जी से सेक्स वर्क अपराध नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सेक्स वर्कर्स के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पुलिस को साफ शब्दों में हिदायत दी है कि, अगर कोई भी बालिग अपनी मर्जी से सेक्स वर्क करती है, तो इसे अपराध की कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी महिलाओं को न तो गिरफ्तार करने की जरूरत है। न ही उन्हें परेशान किया जाना चाहिए।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन ने एक और बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी इच्छा से काम करने वाली महिलाओं को हिरासत में रखने या सुधार गृह भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है।

हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर कमर्शियल सेक्स के लिए मानव तस्करी की जाती है या किसी को धोखे और मजबूरी में इस दलदल में धकेला जाता है, तो वहां इमोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन ऐक्ट यानी आईटीपीए के तहत सख्त कार्रवाई होगी।

क्या है इमोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन ऐक्ट?

भारत देश में देह व्यापार को रोकने और रेगुलेट करने के लिए साल 1956 में इमोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन ऐक्ट बनाया गया था। इस कानून में कहीं भी सहमति से सेक्स करने को अपराध नहीं बताया गया है। बल्कि इसके जरिए वेश्यालय या कोठे चलाने और जबरदस्ती देह व्यापार कराने पर रोक लगाई गई है।

कानून की धारा क्या है प्रावधान
धारा 3 कोई व्यक्ति देह व्यापार के लिए अपनी जगह या मकान किराए पर देता है, तो उसे 1 से 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
धारा 4 कोई व्यक्ति किसी सेक्स वर्कर की कमाई पर पलता है या उसकी कमाई का इस्तेमाल करता है, तो यह अपराध है। यह नियम सेक्स वर्कर के परिवार पर भी लागू होता है।
धारा 5 किसी को बहला-फुसलाकर, डराकर या मजबूरी का फायदा उठाकर जबरदस्ती देह व्यापार के दलदल में धकेलना पूरी तरह अपराध है।
धारा 7किसी भी सार्वजनिक जगह या धार्मिक स्थल के 200 मीटर के दायरे में सेक्स वर्क करना कानूनन अपराध माना गया है।

सेक्स वर्कर्स को भी सम्मान से जीने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने सेक्स वर्कर्स के अधिकारों को लेकर बड़ी बात कही थी।

अदालत ने कहा था कि भारतीय संविधान के तहत हर नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। सेक्स वर्कर्स भी भारत की नागरिक हैं। इसलिए उन्हें भी कानून की तरफ से पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

लॉ कमीशन ऑफ इंडिया की जांच में भी कई बार ऐसी बात सामने आ चुकी है। सेक्स वर्कर्स के साथ पुलिस का रवैया अच्छा नहीं रहता है। इससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंचती है।

कोर्ट ने अब साफ कर दिया है कि जब तक कोई व्यक्ति आईटीपीए की बाकी धाराओं का उल्लंघन नहीं कर रहा है, तब तक पुलिस उसे अपनी मर्जी से काम करने के लिए परेशान नहीं कर सकती।

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