सफर से पहले आसानी से बदल सकेंगे ट्रेन में सीट:13 साल की शीरीन ने बनाया CoSeat ऐप,जानिए कैसे काम करता

Arohi Raj | Sept 20, 2026, 13:30 IST
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13 साल की शीरीन ने बनाया CoSeat ऐप
13 साल की शीरीन ने बनाया CoSeat ऐप

ट्रेन और फ्लाइट में अक्सर परिवार के लोगों को अलग-अलग सीटें मिलती हैं। एक साथ बैठने के लिए दूसरों से सीट बदलने की मिन्नतें करनी पड़ती हैं। इसी परेशानी को दूर करने के लिए 13 साल की शीरीन कालरा ने CoSeat प्लेटफॉर्म बनाया है। यह तकनीक सफर शुरू होने से पहले ही सीट बदलने की इच्छा रखने वाले यात्रियों को आपस में जोड़ती है, अब बिना झंझट के सफर करेंगे।

ट्रेन में परिवार से अलग सीट मिलने पर यात्रियों को काफी परेशानी होती है। एक साथ बैठने के लिए दूसरे यात्री से सीट बदलनी पड़ती है। लेकिन कई बार सामने वाला यात्री सीट बदलने से मना कर देता है। इस समस्या का समाधान 13 साल की शीरीन कालरा ने निकाला है। शीरीन ने CoSeat नाम का एक बेहतरीन डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है।

यह प्लेटफॉर्म सफर से पहले सीट बदलने वाले यात्रियों को आपस में जोड़ता है। शीरीन को CoSeat बनाने का आइडिया अपनी एक ट्रेन यात्रा के दौरान आया था। उस सफर में उनके परिवार के सदस्यों को अलग-अलग सीटें मिली थीं। परिवार को एक साथ बैठाने के लिए उनके पिता को परेशानी उठानी पड़ी। तब शीरीन ने सोचा कि सीट बदलने की ऑनलाइन सुविधा होनी चाहिए। जब टिकट बुकिंग और खाना ऑर्डर करना ऑनलाइन संभव है, तो seat क्यों नहीं।



कैसे काम करता CoSeat

CoSeat पर सीट बदलने की प्रक्रिया PNR दर्ज करने से शुरू होती है। सबसे पहले यात्री अपना PNR नंबर दर्ज करके उसे वेरिफाई करते हैं। इसके बाद इस प्लेटफॉर्म पर यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी मिल जाती है। यात्री अपनी सीट की पसंद भी प्लेटफॉर्म पर आसानी से दर्ज कर सकते हैं। इसमें लोअर बर्थ यासाइड लोअर जैसी प्राथमिकताएं शामिल हो सकती हैं। परिवार के साथ एक ही कोच में बैठने की जरूरत भी बताई जा सकती है।

जानकारी दर्ज होने के बाद CoSeat ऐसे यात्रियों को खोजना शुरू करता है। यह सिर्फ उन यात्रियों को ढूंढता है, जिनकी जरूरतें आपस में मिलती हों। मैच मिलने पर दोनों यात्री आपस में मैसेज करके बातचीत कर सकते हैं। इसके बाद दोनों आपसी सहमति से सीट बदलने का फैसला ले सकते हैं।



रेलवे की अलॉटेड सीट में कोई बदलाव नहीं होती

CoSeat प्लेटफॉर्म रेलवे की ऑफिशियल सीट अलॉटमेंट में कोई बदलाव नहीं होती। यह सिर्फ सीट बदलने की इच्छा रखने वाले यात्रियों को आपस में जोड़ता है। सीट बदलना पूरी तरह से यात्रियों की आपसी सहमति पर निर्भर है। इस पूरी प्रक्रिया में रेलवे के नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। यात्रियों को अपनी सीट बदलने से पहले आपस में बात करनी होती है।

फ्लाइट यात्री के लिए भी सुविधा

CoSeat की यह सुविधा फ्लाइट से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी है। फ्लाइट में भी अक्सर परिवार के सदस्यों को अलग-अलग सीटें मिलती हैं। वहां भी साथ बैठने के लिए दूसरे यात्रियों से बात करनी पड़ती है। अब CoSeat के जरिए फ्लाइट यात्री भी सफर से पहले सीट बदल सकते हैं।


  1. CoSeat क्या है और यह कैसे काम करता है?
    CoSeat एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो यात्रियों को एक साथ बैठने के लिए सीट बदलने की सुविधा प्रदान करता है। यात्री अपने PNR नंबर दर्ज करके प्लेटफॉर्म पर अपनी सीट की प्राथमिकताएं बताते हैं, और CoSeat उन यात्रियों को खोजता है जिनकी जरूरतें आपस में मिलती हों।
  2. क्या CoSeat का उपयोग ट्रेन और फ्लाइट दोनों के लिए किया जा सकता है?
    हाँ, CoSeat का उपयोग ट्रेन यात्रा के साथ-साथ फ्लाइट यात्रा के लिए भी किया जा सकता है। यह प्लेटफॉर्म दोनों प्रकार के यात्रियों के लिए सीट बदलने की सुविधा प्रदान करता है।
  3. क्या CoSeat के माध्यम से सीट बदलने की प्रक्रिया में रेलवे के नियमों का पालन करना आवश्यक है?
    हाँ, CoSeat के माध्यम से सीट बदलने की पूरी प्रक्रिया में रेलवे के नियमों का पालन करना आवश्यक है। सीट बदलना पूरी तरह से यात्रियों की आपसी सहमति पर निर्भर करता है।
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