भूख हड़ताल खत्म करने को कैसे माने सोनम वांगचुक, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
Kaushiki | Jul 25, 2026, 16:00 IST
sonam wangchuk hunger strike
सोनम वांगचुक ने तीन दिन की बातचीत के बाद भूख हड़ताल खत्म की। पत्नी गीतांजलि और वकील विवेक तन्खा की भूमिका अहम रही। सरकार ने लिखित आश्वासन दिया।
Sonam Wangchuk hunger strike: नई दिल्ली में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। सोनम वांगचुक जंतर मंतर आंदोलन के प्रमुख चेहरे थे। वे कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे। तीन दिन की बातचीत के बाद उन्होंने गुरुवार रात अनशन तोड़ा। सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने का लिखित आश्वासन दिया।
पत्नी गीतांजलि अंगमो की भूमिका इस फैसले में निर्णायक रही। सरकार ने 20 जुलाई के प्रदर्शनकारियों पर कोई केस दर्ज न करने, नीट मामले में संसद में चर्चा और पीड़ितों को मुआवजे का भरोसा दिया है। सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हो गया है, पर युवाओं का आंदोलन अभी जारी रहेगा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे एपीसोड में सीनियर एडवोकेट विवेक तनखा की अहम भूमिका रही है। हालांकि खुल विवेक तनखा ने इससे इंकार किया है।
![सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ऐसी चर्चा - BBC News हिंदी]()
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने 20 जुलाई की शाम से ही सोनम वांगचुक से संपर्क साधना शुरू किया था। उसी दिन संसद मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे। इसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया था।
सोनम वांगचुक के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA – National Security Act) केस में शामिल रहे वकील विवेक तन्खा ने अहम भूमिका निभाई। वे कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं और सोनम वांगचुक के करीबी माने जाते हैं। एक सूत्र ने बताया कि विवेक तन्खा की चिंता पूरी तरह सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर थी। वे 11 किलो से ज्यादा वजन घटा चुके थे।
दूसरी ओर विवेक तन्खा ने मीडिया और राजनीतिक स्वार्थ के चलते फैलाए जा रहे दावों को झूठा करार देते हुए कानूनी नोटिस जारी करने की बात कही है। विवेक तन्खा का कहना है कि बीजेपी या अमित शाह द्वारा संपर्क किए जाने की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
इस मामले पर विवेक तन्खा ने ट्वीट कर सोनम वांगचुक को समर्थन देने की बात से इनकार किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि,
21 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे। दोनों ने सोनम वांगचुक से मुलाकात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनके मुद्दे संसद में उठाए जाएंगे। इससे पहले जितेंद्र सिंह गीतांजलि अंगमो से भी बात कर चुके थे।
22 जुलाई को विवेक तन्खा के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल सोनम वांगचुक और अंगमो से मिला। इस दल ने पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग को राष्ट्रीय मुद्दा बताया। कई अन्य सांसद भी मिलने पहुंचे, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली।
प्रतिनिधिमंडल ने एक साझा पत्र भी सौंपा। इसमें शशि थरूर, तिरुची शिवा, रामगोपाल यादव, कपिल सिब्बल, जॉन ब्रिटास और सागरिका घोष जैसे नेता शामिल थे। पत्र में लिखा था कि देश और युवाओं को उनके त्याग से ज्यादा उनके मार्गदर्शन की जरूरत है।
सूत्रों के मुताबिक, सोनम वांगचुक अनशन तोड़ने में हिचकिचा रहे थे। वे छात्रों की तय लाइन का पालन करना चाहते थे। लेकिन पत्नी गीतांजलि ने साफ कह दिया कि वे अपनी बात से पीछे नहीं हट सकते। एक मंत्री ने बताया कि आखिरकार उनकी पत्नी ने ही उन्हें मनाया।
23 जुलाई की देर रात नड्डा और सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे। वे सरकार का लिखित आश्वासन लेकर आए थे। इसमें कहा गया कि 20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर और संसद मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर मामले दर्ज नहीं किए जाएंगे।
सरकार ने संसद में चर्चा और एनईईटी (NEET – National Eligibility cum Entrance Test) पेपर लीक मामले में आत्महत्या करने वाले पीड़ितों को उचित मुआवजा देने का भी भरोसा दिलाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही पेपर लीक रोकने के लिए नया विधेयक लाने की घोषणा कर चुके थे।
लद्दाख से सिविल सोसाइटी के नेता भी 21 जुलाई को दिल्ली पहुंचे थे। वे 21 और 22 जुलाई को सोनम वांगचुक से मिलने में असफल रहे। आखिरकार 23 जुलाई की सुबह उन्हें मुलाकात की अनुमति मिली। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB – Intelligence Bureau) के एक अधिकारी की मौजूदगी में यह मुलाकात हुई।
लद्दाख प्रतिनिधिमंडल के एक नेता ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि आंदोलन अब उनसे आगे बढ़ चुका था। उन्होंने अपना काम कर दिया था। जब हम मिले, तब तक सरकार और उनके बीच समझ बन चुकी थी। उन्हें बस लिखित आश्वासन चाहिए था, जो देर रात मिला। उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए भी सोनम वांगचुक की जरूरत है।
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पत्नी गीतांजलि अंगमो की भूमिका इस फैसले में निर्णायक रही। सरकार ने 20 जुलाई के प्रदर्शनकारियों पर कोई केस दर्ज न करने, नीट मामले में संसद में चर्चा और पीड़ितों को मुआवजे का भरोसा दिया है। सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हो गया है, पर युवाओं का आंदोलन अभी जारी रहेगा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे एपीसोड में सीनियर एडवोकेट विवेक तनखा की अहम भूमिका रही है। हालांकि खुल विवेक तनखा ने इससे इंकार किया है।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ऐसी चर्चा - BBC News हिंदी
तीन दिन की जद्दोजहद
सोनम वांगचुक के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA – National Security Act) केस में शामिल रहे वकील विवेक तन्खा ने अहम भूमिका निभाई। वे कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं और सोनम वांगचुक के करीबी माने जाते हैं। एक सूत्र ने बताया कि विवेक तन्खा की चिंता पूरी तरह सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर थी। वे 11 किलो से ज्यादा वजन घटा चुके थे।
इधर विवेक तन्खा की सफाई
द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक, विवेक तन्खा ने कहा कि सरकार ने इसके लिए मुझसे संपर्क नहीं किया। वे गीतांजलि से बात कर रहे थे। हां, मैंने पूरी प्रक्रिया में गीतांजलि और सोनम की मदद की, क्योंकि वे मुझसे लगातार सलाह ले रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि सोनम वांगचुक का अनशन खत्म करना आंदोलन से अलग विषय है। युवाओं का आंदोलन जारी रहेगा। तन्खा ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक को 20 जुलाई को ही अनशन खत्म करना था, लेकिन सरकार के व्यवहार के कारण उन्होंने अनशन जारी रखा।
विवेक तन्खा ने किया इंकार
मीडिया और निहित राजनीतिक स्वार्थों द्वारा फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। सोनम वांगचुक के खिलाफ भ्रामक प्रचार और बीजेपी/अमित शाह द्वारा संपर्क किए जाने के झूठे दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए मामले को अदालत में ले जाने का निर्णय लिया गया है।
Legal Notice today :: A first hand exp of Journalism & political vested interests combining to create false narratives ; First ag Sonam Wanchuk ( leaving him deeply hurt ) ; and ag me by attributing Amit Shah ji / BJP contacted me ;; A complete lie. Let them answer in Court !
— Vivek Tankha (@VTankha) July 26, 2026
सरकार की पहल
22 जुलाई को विवेक तन्खा के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल सोनम वांगचुक और अंगमो से मिला। इस दल ने पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग को राष्ट्रीय मुद्दा बताया। कई अन्य सांसद भी मिलने पहुंचे, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली।
सांसदों की चिट्ठी
पत्नी गीतांजलि का दृढ़ निर्णय
23 जुलाई की देर रात नड्डा और सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे। वे सरकार का लिखित आश्वासन लेकर आए थे। इसमें कहा गया कि 20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर और संसद मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर मामले दर्ज नहीं किए जाएंगे।
एनईईटी को लेकर भी आश्वासन
लद्दाख के नेताओं की भूमिका
लद्दाख प्रतिनिधिमंडल के एक नेता ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि आंदोलन अब उनसे आगे बढ़ चुका था। उन्होंने अपना काम कर दिया था। जब हम मिले, तब तक सरकार और उनके बीच समझ बन चुकी थी। उन्हें बस लिखित आश्वासन चाहिए था, जो देर रात मिला। उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए भी सोनम वांगचुक की जरूरत है।
FAQ
- सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल क्यों खत्म की?
सरकार के लिखित आश्वासन और पत्नी गीतांजलि के आग्रह पर उन्होंने अनशन खत्म किया। उनकी बिगड़ती सेहत भी बड़ी वजह थी। सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने का भरोसा दिया। - वांगचुक को मनाने में किसकी भूमिका सबसे अहम रही?
वकील विवेक तन्खा और पत्नी गीतांजलि अंगमो की भूमिका अहम रही। लद्दाख के नागरिक नेताओं ने भी प्रयास किए। कई सांसदों ने साझा पत्र भी सौंपा। - सरकार ने क्या लिखित आश्वासन दिया?
सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर मामले न दर्ज करने का आश्वासन दिया। संसद में मुद्दे उठाने की बात भी कही गई। एनईईटी पेपर लीक पीड़ितों को मुआवजे का भरोसा भी दिया गया।
बच्चों को प्यार दें, उनके सवालों के जवाब दें, NEET प्रदर्शन के बीच मोहन भागवत
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