हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, नया कानून जरूरी नहीं, पुराने का सख्ती से पालन करो
CHAKRESH | May 03, 2026, 14:34 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर अलग कानून बनाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मौजूदा कानून पर्याप्त हैं, लेकिन उनका सही से पालन नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि हेट स्पीच भाईचारे और सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाती है।
News In Short
- सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर अलग से कानून बनाने से मना कर दिया है।
- कोर्ट ने कहा कि कानून बनाना संसद का काम है।
- मौजूदा कानूनों में हेट स्पीच से निपटने के प्रावधान हैं।
- असली समस्या कानून न होना नहीं बल्कि उनका पालन न होना है।
- कोर्ट का कहना है कि हेट स्पीच से समाज में हिंसा और नफरत फैलती है।
News In Detail
हेट स्पीच क्या है और क्यों उठा मामला
कोर्ट ने इन याचिकाओं को गंभीरता से सुना, लेकिन नया कानून बनाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह काम संसद और विधायिका का है न कि न्यायपालिका का।
कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने यह भी कहा कि हेट स्पीच सिर्फ बुरे शब्द नहीं हैं। यह समाज के नैतिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाती है। भारत की सभ्यता वसुधैव कुटुम्बकम् , जिसका अर्थ है पूरी दुनिया एक परिवार है के विचार पर खड़ी है। हेट स्पीच इस भावना को कमजोर करती है।
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भाईचारे पर सीधा हमला
भारत एक विविधताओं से भरा देश है। यहां हर धर्म, जाति और भाषा के लोग साथ रहते हैं। इस विविधता को बनाए रखने के लिए भाईचारा जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि हेट स्पीच इस जरूरत को सीधे चोट पहुंचाती है।
हिंसा और अफवाहें कैसे जुड़ी हैं
आज के दौर में सोशल मीडिया ने इस समस्या को और बड़ा बना दिया है। एक अफवाह मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है।
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मौजूदा कानून पर्याप्त हैं
इसलिए नए कानून की जरूरत नहीं है। असली जरूरत यह है कि मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। अभी अधिकारी समय पर कार्रवाई नहीं करते हैं। इसी वजह से अपराध दोबारा होते हैं।
शक्तियों के बंटवारे का सिद्धांत
अगर अदालत कानून बनाने लगे तो सरकार के तीनों अंगों के बीच का संतुलन बिगड़ जाएगा। इसलिए कोर्ट ने कहा कि अगर संसद चाहे तो इस विषय पर नया कानून ला सकती है। लेकिन यह फैसला संसद को ही करना होगा।
आगे का रास्ता क्या है
पहला यह कि पुलिस और प्रशासन को हेट स्पीच के मामलों में तुरंत और बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करनी चाहिए। यदि वे कार्रवाई नहीं करते तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए।
दूसरा यह कि संविधान के मूल्यों जैसे समानता, सम्मान और भाईचारे को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए।
शिक्षा और नागरिक भागीदारी इस काम में मदद कर सकती है।
तीसरा यह कि धर्म, जाति और पहचान पर आधारित गहरी सामाजिक खाइयों को पाटने की कोशिश हो। ये खाइयां ही हेट स्पीच के लिए जमीन तैयार करती हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी उचित सीमाओं के बीच के नाजुक संतुलन को सामने रखता है।
डिजिटल युग में जब एक क्लिक पर नफरत हजारों लोगों तक पहुंच जाती है, तो कानून के सही अमल का महत्व और बढ़ जाता है। सामाजिक नैतिकता के लिहाज से भी यह जरूरी है कि नागरिक समझें कि शब्दों की ताकत सड़कों पर हिंसा को जन्म दे सकती है।
FAQ
- भारत में हेट स्पीच के लिए कौन से कानून मौजूद हैं?
भारत में हेट स्पीच से निपटने के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) में प्रावधान हैं। इन कानूनों के तहत ऐसे भाषण या सामग्री जो धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर नफरत फैलाए, उस पर कार्रवाई की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन्हीं कानूनों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।
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