अब देश में सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर 112, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Anjali Dwivedi | May 28, 2026, 18:25 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने देश में इमरजेंसी रेस्पॉन्स के लिए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी राज्यों को तीन महीने में सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर 112 शुरू करने को कहा है। यह कदम सड़क हादसों में लोगों की जान बचाने के लिए उठाया गया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी मेडिकल केयर को नागरिकों का मूल अधिकार माना है।
- सभी राज्यों को तीन महीने में एकल इमरजेंसी नंबर 112 चालू करना होगा।
- सड़क हादसों में घायलों की मदद करने वालों के लिए विशेष सुरक्षा मिलेगी।
- मददगारों की शिकायतों को दूर करने के लिए नया सिस्टम बनाया जाएगा।
- राज्यों को हर महीने इस आदेश पर अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट देनी होगी।
इमरजेंसी सेवाओं के लिए अब सिर्फ 112 नंबर
अक्सर लोग सड़क हादसों में घायलों की मदद करने से काफी डरते हैं। उन्हें लगता है कि वे पुलिस और कानूनी पचड़ों में फंस जाएंगे। अदालत ने इस डर को पूरी तरह दूर करने का आदेश दिया है। अब नेक मददगारों की सुरक्षा के लिए एक विशेष शिकायत निवारण सिस्टम बनेगा।
राज्यों को हर महीने देना है अनुपालन रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कुछ बहुत ही भावुक बातें कहीं। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना का शिकार व्यक्ति बहुत ज्यादा सदमे में होता है। उस नाजुक वक्त में घायल इंसान खुद को बेहद बेबस महसूस करता है। उसे उम्मीद होती है कि आसपास के लोग उसकी जान बचाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला एक विशेष जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। यह याचिका सेवलाइफ फाउंडेशन नाम की संस्था ने कोर्ट में दायर की थी। संस्था ने सड़क हादसों में मरने वाले लोगों का गंभीर मुद्दा उठाया था। कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए नए नियम तय किए।
अब एम्बुलेंस के लिए नहीं भटकेंगे लोग
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक और महत्वपूर्ण काम सौंप दिया है। कोर्ट ने पीएम राहत कैशलेस इलाज योजना को जल्द शुरू करने को कहा है। इस योजना के आने से घायलों का इलाज बिना पैसों के तुरंत शुरू हो सकेगा। पैसों की कमी से अब किसी भी घायल की जान नहीं जाएगी।
कानूनी पचड़ों के डर को दूर करना बहुत जरूरी
यह फैसला देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। एकल हेल्पलाइन नंबर 112 से पूरी आपातकालीन व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। तकनीक और सही नियमों के तालमेल से अब हर नागरिक सुरक्षित महसूस करेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
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