सड़क हादसों में हर साल 1.77 लाख मौतें, फिर भी देश में लाइफ-सेविंग इंतजाम का बुरा हाल
Manya Jain | Jun 26, 2026, 16:50 IST
supreme court trauma states road accident
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 34 राज्यों ने ट्रॉमा केयर पर रिपोर्ट सौंपी। एक भी राज्य 5 जरूरी इंतजाम पूरे नहीं कर पाया। भारत में हर साल 1.77 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। MP और राजस्थान भी पिछड़े हुए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- भारत में हर साल सड़क हादसों में करीब 1.77 लाख लोगों की जान चली जाती है।
- सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में पांच जरूरी ट्रॉमा सुविधाओं के आदेश दिए थे।
- हेल्पलाइन, GPS एंबुलेंस और गुड सेमेरिटन कानून इनमें प्रमुख इंतजाम हैं।
- 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी।
- एक भी राज्य अब तक सभी पांच जरूरी ट्रॉमा इंतजाम पूरी तरह लागू नहीं कर पाया।
हर साल 1.77 लाख मौतें, पर व्यवस्था जीरो
सुप्रीम कोर्ट ने इसी को गंभीरता से लिया। दिल्ली की संस्था सेवलाइफ फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 26 मई 2026 को सभी राज्यों को 9 इंतजाम करने के आदेश दिए। इनमें से 5 सबसे जरूरी थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगे थे ये 5 इंतजाम
दूसरा - जीपीएस एंबुलेंस। 13 राज्यों में या तो जीपीएस नहीं है या केवल सरकारी एंबुलेंस में है। निजी एंबुलेंस की कोई ट्रैकिंग नहीं होती। 6 राज्यों के पास डैशबोर्ड है लेकिन वह आम लोगों के लिए खुला नहीं है।
तीसरा - गुड सेमेरिटन कानून। सड़क पर घायल की मदद करने वाले को पुलिस और अस्पताल से परेशानी का डर होता है। इसी डर को खत्म करने के लिए 2020 में केंद्र ने गुड सेमेरिटन नियम बनाए। मदद करने वाले को 25 हजार रुपए का इनाम भी है। लेकिन 8 में से केवल 2 राज्यों - महाराष्ट्र और कर्नाटक - के पास इसके लिए शिकायत निवारण प्रणाली है।
चौथा - ट्रॉमा रजिस्ट्री। यह एक डेटाबेस है जो घायल व्यक्ति की पूरी यात्रा ट्रैक करता है - हादसे की जगह से लेकर एंबुलेंस, अस्पताल और डिस्चार्ज तक। 22 राज्यों के पास ट्रॉमा रजिस्ट्री ही नहीं है। 8 में से केवल तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश ने कहा कि उनके पास यह व्यवस्था है।
पांचवां - रेस्क्यू प्रोटोकॉल। हादसे की जगह से घायल को अस्पताल तक ले जाने का तरीका तय होना चाहिए। 17 राज्यों के पास यह प्रोटोकॉल है। कर्नाटक के पास यह भी नहीं है।
गोल्डन ऑवर- जिंदगी और मौत के बीच 60 मिनट
road accidents data
MP और राजस्थान की स्थिति
राजस्थान के पास ट्रॉमा केयर रजिस्ट्री का एसओपी (SOP – Standard Operating Procedure) अभी बन रहा है। गुड सेमेरिटन के लिए बिहार की तरह सामान्य शिकायत व्यवस्था का हवाला दिया है।
MP और राजस्थान- 2024 सड़क मौतों के आंकड़े
mp road accidents data
UP-सबसे ज्यादा मौतें, व्यवस्था सबसे पीछे
10 साल बाद भी नहीं बदला हाल
FAQ
- गोल्डन ऑवर क्या होता है और यह सड़क हादसों में क्यों जरूरी है?
गोल्डन ऑवर हादसे के बाद के पहले 60 मिनट होते हैं। इस दौरान सही इलाज मिलने पर जान बचने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। देश में 30 फीसदी ट्रॉमा मौतें सिर्फ देरी से इलाज मिलने के कारण होती हैं। - गुड सेमेरिटन कानून क्या है और इससे क्या फायदा होता है?
यह कानून सड़क पर घायल की मदद करने वाले को पुलिस और अस्पताल की परेशानी से बचाता है। 2020 में केंद्र ने नियम बनाए। मदद करने वाले को 25 हजार रुपए का इनाम भी मिल सकता है। लेकिन अधिकांश राज्यों ने इसे अभी तक ठीक से लागू नहीं किया। - ट्रॉमा रजिस्ट्री क्या होती है और यह क्यों जरूरी है?
यह एक डेटाबेस है जो हादसे से लेकर अस्पताल से छुट्टी तक घायल की पूरी जानकारी रखता है। इससे इलाज की गुणवत्ता जांची जा सकती है और नीतियां बेहतर बनाई जा सकती हैं। लेकिन 22 राज्यों के पास यह व्यवस्था ही नहीं है।
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