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Photograph: (the sootr)
New Delhi. देश की राजनीति और प्रशासन में आज बड़ा संवैधानिक बदलाव देखने को मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई राज्यों में राज्यपाल और उपराज्यपाल बदलने का फैसला किया। इस फैसले से दिल्ली, लद्दाख, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे बड़े राज्य प्रभावित हुए। सरकार ने एक साथ कई संवैधानिक पदों पर नई जिम्मेदारियां तय कीं।
यह फेरबदल केवल खाली पद भरने तक सीमित नहीं माना जा रहा। केंद्र सरकार ने अनुभवी लोगों को नई जगह जिम्मेदारी देकर संतुलन बनाने की कोशिश की। अब समझते हैं कि आखिर किस राज्य में क्या बदलाव हुआ है।
दिल्ली को मिला नया उपराज्यपाल
दिल्ली के प्रशासन में बड़ा बदलाव हुआ है। पूर्व भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल बनाया गया। तरनजीत सिंह संधू विदेश सेवा के अनुभवी अधिकारी रहे हैं।
वे अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं और कई अहम पद संभाल चुके हैं। सरकार का मानना है कि उनका अनुभव राजधानी के प्रशासन में काम आएगा। दिल्ली में केंद्र और राज्य सरकार के बीच संतुलन भी अहम माना जाता है। इसी वजह से अनुभवी और भरोसेमंद चेहरे को जिम्मेदारी दी गई है।
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वीके सक्सेना अब लद्दाख के उपराज्यपाल
दिल्ली के मौजूदा LG विनय कुमार सक्सेना को नई जिम्मेदारी मिली है। उन्हें अब केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है। लद्दाख रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण इलाका माना जाता है। इस क्षेत्र में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारी की जरूरत रहती है। सरकार ने इसी कारण वीके सक्सेना को वहां तैनात करने का फैसला किया। वे दिल्ली में भी प्रशासनिक फैसलों को लेकर अक्सर चर्चा में रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में भी बड़ा बदलाव
पश्चिम बंगाल में राज्यपाल पद अचानक खाली हो गया था। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने तुरंत नई नियुक्ति की घोषणा कर दी। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को पश्चिम बंगाल भेजा गया है। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था बनी रहे। राज्यपाल का पद राज्य और केंद्र के बीच महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।
तेलंगाना और महाराष्ट्र में अदला-बदली
तेलंगाना और महाराष्ट्र में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना भेजा गया है। वहीं तेलंगाना के मौजूदा राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र भेजा गया। इस तरह दोनों राज्यों में राज्यपालों की अदला-बदली जैसी स्थिति बन गई। सरकार का मानना है कि नए नेतृत्व से प्रशासनिक काम बेहतर होंगे।
बिहार में सेना के पूर्व अधिकारी को जिम्मेदारी
बिहार के लिए भी नई नियुक्ति की घोषणा की गई है। लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया। वे भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। उनका प्रशासनिक और सुरक्षा मामलों का अनुभव काफी व्यापक माना जाता है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा।
तमिलनाडु को फिलहाल अतिरिक्त प्रभार
तमिलनाडु में फिलहाल स्थायी राज्यपाल नियुक्त नहीं किया गया है। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई। वे अपने मौजूदा पद के साथ तमिलनाडु का काम भी देखेंगे। जब तक स्थायी नियुक्ति नहीं होती तब तक यही व्यवस्था रहेगी।
हिमाचल और नागालैंड में भी नई नियुक्ति
हिमाचल प्रदेश में भी राज्यपाल पद पर बदलाव किया गया है। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल का राज्यपाल बनाया गया। वहीं नागालैंड के लिए नंद किशोर यादव का नाम घोषित किया गया। इस फैसले से उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में भी प्रशासनिक बदलाव हुआ।
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एक साथ नौ बड़े पदों पर बदलाव
सरकार की ओर से जारी आदेश में कुल नौ पदों पर बदलाव दर्ज किए गए। इसमें राज्यपाल और उपराज्यपाल दोनों पद शामिल हैं। दिल्ली और लद्दाख जैसे अहम क्षेत्रों में बदलाव ज्यादा चर्चा में रहे। आने वाले दिनों में सभी नियुक्त अधिकारी अपना कार्यभार संभालेंगे। इसके बाद संबंधित राज्यों में प्रशासनिक प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होगी।
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