नोबेल के नॉमिनेशन के लिए नहीं दी सहमति... तो मोदी से बुरा मान गए ट्रम्प और लगा दिया टैरिफ!

Jitendra Shrivastava | Aug 30, 2025, 23:50 IST
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Trump got angry with Modi
Photograph: (THESOOTR)

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प की नोबेल पुरस्कार की ख्वाहिश और पाकिस्तान से करीबी रिश्तों के चलते भारत पर टैरिफ लगाया गया है। भारत ने ट्रम्प से साफ किया कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी...

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में एक नया मोड़ आया है, जब अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत पर टैरिफ विवाद का मुख्य कारण ट्रम्प की नोबेल पुरस्कार की ख्वाहिश है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने भारत से पाकिस्तान के साथ सीजफायर के मुद्दे पर उनके समर्थन की उम्मीद जताई थी, लेकिन भारत ने इस पर असहमति जताई, जिसके बाद अमेरिका ने भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ाया।

ट्रम्प की नोबेल ख्वाहिश

ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान, उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की उम्मीद थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत में पाकिस्तान के साथ सीजफायर पर अपनी भूमिका का हवाला दिया था और कहा कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करेगा।

ट्रम्प ने इशारों में मोदी से भी ऐसा करने का अनुरोध किया। लेकिन मोदी ने इस पर नाराजगी जताई और साफ कह दिया कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर का श्रेय केवल भारत और पाकिस्तान को ही जाता है, इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।

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मोदी-ट्रम्प के रिश्ते में तल्खी

इस घटना के बाद, दोनों देशों के नेताओं के बीच तनाव बढ़ गया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ट्रम्प ने मोदी की बात को अनदेखा किया, जिससे दोनों नेताओं के बीच रिश्ते में खटास आई। इसके बाद से, दोनों ने एक-दूसरे से बातचीत नहीं की। ट्रम्प की नीतियां और उनके व्यक्तिगत संबंध भारत अमेरिका के रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर

भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के संदर्भ में ट्रम्प का दावा है कि उनकी भूमिका से यह स्थिति बनी, लेकिन भारत इस पर सहमत नहीं है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि यह एक स्वायत्त प्रक्रिया थी, जिसमें अमेरिका का कोई योगदान नहीं था। भारत ने इस बात को स्पष्ट किया कि सीजफायर का श्रेय पाकिस्तान और भारत दोनों को ही जाता है, और अमेरिका का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं था।

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भारत की प्रतिक्रिया और टैरिफ

भारत ने डोनाल्ड ट्रम्प की नोबेल पुरस्कार नॉमिनेशन की ख्वाहिश को नकारते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिका का इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं था। इसके बाद भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ लगा दिया, जो किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे ज्यादा है। यह स्थिति भारतीय विदेश नीति और व्यापारिक रणनीति को प्रभावित कर रही है, जिससे भारत के व्यापारिक साझेदार अमेरिका से रिश्ते और भी तनावपूर्ण हो गए हैं।

ट्रम्प के खिलाफ भारतीय माहौल

भारत में अब ट्रम्प के खिलाफ नकारात्मक माहौल बन चुका है। हाल ही में महाराष्ट्र में एक त्योहार के दौरान उनका बड़ा पुतला जलाया गया, जिसमें उन्हें ‘पीठ में छुरा घोंपने वाला’ दिखाया गया।

इस घटना से यह स्पष्ट हो गया कि भारत में ट्रम्प के प्रति गुस्सा बढ़ रहा है। भारत अब ट्रम्प के खिलाफ खुलकर अपनी असहमति व्यक्त कर रहा है, जो एक स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के रिश्ते कमजोर हो रहे हैं।

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हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रम्प का असर

Trump got angry with Modi
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भारत और अमेरिका के बीच मजबूत दोस्ती की छवि तब टूट गई, जब ट्रम्प ने भारत के लिए अपने दावों को तवज्जो नहीं दी। हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रम्प जैसे कार्यक्रमों में दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की तारीफ की थी, लेकिन अब ट्रम्प की नीतियों से भारत में नकारात्मक माहौल बन रहा है।

भारत की स्थिर कूटनीतिक ताकत

भारत अपनी कूटनीतिक ताकत और वैश्विक स्थिति को मजबूत करने के लिए कदम उठा रहा है, लेकिन अमेरिका जैसे प्रमुख साझेदार से टकराव उसकी रणनीति पर असर डाल सकता है। मोदी की सरकार इस समय अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कड़ी निगरानी रखे हुए है, और अमेरिका के खिलाफ किसी भी प्रकार की नीतिगत असहमति को सीधे तौर पर चुनौती दे रही है।

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व्यक्तिगत रिश्तों की अहमियत

अमेरिका और भारत के रिश्ते व्यक्तिगत स्तर पर ट्रम्प और मोदी की दोस्ती पर निर्भर थे। दोनों नेताओं की बार-बार मुलाकातें और उनके मजबूत संबंधों ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत आवाज दी थी। लेकिन अब ट्रम्प की नीतियों और भारत से जुड़ी उनकी रणनीतियां दोनों देशों के रिश्तों में दरार डालने का कारण बन रही हैं।

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