भारत का विभाजन करने वालों का होगा विभाजन? UK में लगी बंटवारे की चिंगारी
Amresh Kushwaha | Sept 15, 2026, 14:45 IST
UK में लगी बंटवारे की चिंगारी
भारत का विभाजन करने वाला ब्रिटेन अब खुद बंटवारे की कगार पर खड़ा है। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के नेताओं ने कार्डिफ में ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। तीनों देश अब आजादी और जनमत संग्रह की मांग कर रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भारत का विभाजन करने वाला ब्रिटेन अब खुद टूटने की कगार पर है।
- स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड ब्रिटेन से आजादी चाहते हैं।
- तीनों देशों के नेताओं ने कार्डिफ में ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
- समझौते में जनमत संग्रह कराने का अधिकार मांगा गया है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान ने इस मांग को हवा दी है।
कार्डिफ में हुई ऐतिहासिक बैठक
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वेल्स की राजधानी कार्डिफ में सोमवार यानी 14 सितंबर 2026 को एक बड़ी बैठक हुई है। इस बैठक में स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी शामिल हुए। वेल्स के फर्स्ट मिनिस्टर रून एप इओरवेर्थ और उत्तरी आयरलैंड की नेता मिशेल ओ नील भी मौजूद रहीं। आयरलैंड की विपक्ष नेता और सिन फेन प्रमुख मैरी लू मैकडॉनल्ड भी इसमें चौथी हस्ताक्षरकर्ता बनीं।
इन चारों नेताओं ने एक साझा समझौता ज्ञापन यानी एमओयू (Memorandum Of Understanding) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में साफ कहा गया कि उनके देशों को खुद फैसला लेने का अधिकार है। नेताओं ने यह भी कहा कि किसी भी वेस्टमिंस्टर सरकार को लोकतंत्र रोकने का अधिकार नहीं है।
क्या कहता है समझौता ज्ञापन
मई में हुए वेल्स संसद चुनाव ने भी बड़ा बदलाव लाया था। इन चुनावों में प्लाइड सिमरू पार्टी जीती थी। इससे साल 1999 के बाद पहली बार वेल्स सरकार पर लेबर पार्टी का पूरा नियंत्रण खत्म हुआ। यह जीत आजादी समर्थक राजनीति के लिए बड़ा मोड़ मानी जा रही है।
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ट्रंप के बयान ने भड़काई आग
यह बयान बेहद संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे पर था। आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति दूसरे देशों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से बचते हैं, लेकिन ट्रंप ने इस परंपरा को तोड़ा। उनके इस बयान ने स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की आजादी की मांग को नई ताकत दे दी।
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तीनों देशों की सत्ताधारी पार्टियां क्या चाहती हैं
उत्तरी आयरलैंड की सत्ताधारी पार्टी सिन फेन यूके से अलग होकर आयरलैंड के साथ जुड़ना चाहती है। यह पहला मौका है जब तीनों देशों में एक साथ ऐसी सरकारें हैं, जो ब्रिटेन से आजादी के पक्ष में हैं। साल 1970 के दशक से ही यह मांग उठती रही है, लेकिन इतना मजबूत मौका पहले कभी नहीं आया।
319 साल पुराना है यूनाइटेड किंगडम
इसके बाद पिछले 104 सालों में यूनाइटेड किंगडम का नक्शा नहीं बदला, लेकिन अब हालात अलग हैं। यदि तीनों देश अलग हो गए, तो यूनाइटेड किंगडम सिर्फ इंग्लैंड तक सिमट जाएगा।
अलग होने पर कितना बचेगा ब्रिटेन
बंटवारे के बाद यह घटकर सिर्फ 0.09 प्रतिशत रह जाएगी। यह वही ब्रिटेन है, जिसने कभी करीब 100 देशों पर राज किया था। एक समय था जब कहा जाता था कि ब्रिटिश साम्राज्य में सूरज कभी अस्त नहीं होता। आज वही ब्रिटेन अपने घर को संभालने में मुश्किल महसूस कर रहा है।
बर्नहम और विपक्ष की प्रतिक्रिया
वहीं कंजर्वेटिव पार्टी की स्कॉटिश शैडो सेक्रेटरी हैरियट क्रॉस ने इस बैठक को अलगाववादी शिखर सम्मेलन बताया। उन्होंने इसे सिर्फ दिखावटी फोटो सेशन करार दिया। इससे साफ है कि ब्रिटेन की मौजूदा सरकार अभी इस मुद्दे को गंभीरता से लेने से बच रही है।
50 साल पुरानी भविष्यवाणी सच होती दिख रही
साल 1977 में स्कॉटिश दार्शनिक टॉम नायरन ने एक बड़ी भविष्यवाणी की थी। उन्होंने अपनी किताब द ब्रेकअप ऑफ ब्रिटेन में लिखा था कि यह साम्राज्य एक दिन बिखर जाएगा। नायरन ने कहा था कि इंग्लैंड की असमान आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था के कारण बाकी देश खुद को अलग कर लेंगे।
आज करीब पांच दशक बाद यह भविष्यवाणी सच होती दिख रही है। स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने भी बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि मौजूदा प्रधानमंत्री यूनाइटेड किंगडम के आखिरी प्रधानमंत्री साबित हो सकते हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, कूटनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी असर डाल सकती है। भारतीय पाठकों के लिए यह इतिहास और वर्तमान भूराजनीति को जोड़कर समझने का अच्छा मौका है। इसलिए यह विषय शिक्षा और जागरूकता दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण है।
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