टाइप नहीं कर पाए बाबू तो बना दिया चपरासी
Amresh Kushwaha | Apr 08, 2026, 15:39 IST
kanpur clerk demotion typing test fail
उत्तर प्रदेश के कलेक्ट्रेट में तीन बाबू टाइपिंग परीक्षा में दो बार फेल हुए थे। कलेक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह ने उन्हें डिमोट कर चपरासी बना दिया है। यह फैसला अब पूरे महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है।
News In Short
- यूपी के कानपुर कलेक्ट्रेट के तीन बाबू टाइपिंग परीक्षा में फेल हो गए थे।
- तीनों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे (Deceased Dependent Quota) से हुई थी।
- दो बार मौका मिला, दोनों बार 25 शब्द प्रति मिनट की स्पीड नहीं पकड़ पाए।
- कलेक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह ने तीनों को डिमोट कर चतुर्थ श्रेणी में भेज दिया।
- अब ये तीनों बाबू नहीं, चपरासी के रूप में काम करेंगे।
News In Detail
टाइपिंग फेल तो गई नौकरी की रैंक
तीनों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे से हुई थी। यह कोटा उन परिवारों को राहत देता है जिनके कमाने वाले सदस्य की सरकारी सेवा के दौरान मौत हो जाती है। इस कोटे से मिलने वाली नौकरी में भी नियम-कानून उतने ही सख्त होते हैं जितने सामान्य भर्ती में।
दो बार मिला मौका, दोनों बार हुए फेल
साल 2024 में जब पहली बार परीक्षा ली गई, तो तीनों इसमें पास नहीं हो सके। पहली असफलता पर नियम के तहत उनकी सालाना वेतन वृद्धि यानी इनक्रिमेंट (Increment) रोक दी गई थी। प्रशासन ने उन्हें एक और मौका दिया और 2025 में दूसरी बार परीक्षा दिलाई गई थी। इस बार भी तीनों तय गति हासिल नहीं कर पाए।
कलेक्टर का सख्त फैसला
कलेक्टर कैंप कार्यालय में तैनात प्रेमनाथ यादव और कलेक्ट्रेट में काम कर रहे अमित कुमार यादव व नेहा श्रीवास्तव को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में तैनात कर दिया गया है। सरकारी भाषा में इसे डिमोशन (Demotion) कहते हैं। यानी पद नीचे जाना।
बाबू के लिए टाइपिंग क्यों जरूरी है?
इसीलिए सरकारी नियमों में यह शर्त रखी गई है कि बाबू को एक तय गति से टाइप करना आना चाहिए। UPPSC (Uttar Pradesh Public Service Commission) के RO/ARO भर्ती में भी 25 शब्द प्रति मिनट की हिंदी टाइपिंग स्पीड टेस्ट क्वालिफाइंग (Qualifying) होता है। इसके बिना चयन नहीं होता।
सभी सरकारी नौकरियों में जरूरी नहीं
वहीं, क्लर्क, डेटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनोग्राफर, PA (Personal Assistant) और RO/ARO जैसे पदों पर टाइपिंग या कंप्यूटर टेस्ट लिया जाता है। यदि किसी भर्ती के नोटिफिकेशन में टाइपिंग का जिक्र है, तो उम्मीदवार को वह मानक पूरा करना ही होगा।
पूरे महकमे में फैली सतर्कता
कानपुर शहर में यह मामला खासा चर्चित हो रहा है। एक तरफ लोग इसे प्रशासन की सख्ती का सकारात्मक उदाहरण मान रहे हैं, तो दूसरी तरफ मृतक आश्रित कोटे से होने वाली नियुक्तियों की योग्यता पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या इस कोटे में नियुक्ति से पहले बुनियादी कौशल की जांच होनी चाहिए?
फिलहाल तीनों कर्मचारी चपरासी के रूप में अपना काम जारी रखेंगे। नियम की यह कड़ी कार्रवाई यह बताती है कि सरकारी सेवा में सिर्फ नियुक्ति काफी नहीं, योग्यता भी बनाए रखनी होती है।
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