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NEWS IN SHORT
ट्रेन लेट होने से NEET छात्रा समृद्धि की परीक्षा 2018 में छूट गई थी।
छात्रा ने हार नहीं मानी और 8 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी।
उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की देरी को सेवा में गंभीर कमी माना।
रेलवे को छात्रा को 9.10 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है।
यह फैसला परीक्षा देने वाले यात्रियों के अधिकारों की बड़ी जीत है।
NEWS IN DETAIL
देश दुनिया न्यूज: न्याय मिलने में समय लगा पर छात्रा की मेहनत रंग लाई। यूपी की नीट छात्रा समृद्धि ने रेलवे को जवाबदेह बना दिया। साल 2018 में ट्रेन लेट होने से समृद्धि की परीक्षा छूट गई थी। समृद्धि ने हार नहीं मानी और 8 साल तक संघर्ष किया।
अब उपभोक्ता आयोग ने उनके हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने रेलवे को भारी जुर्माना भरने का आदेश दिया है। रेलवे अब छात्रा को 9 लाख 10 हजार रुपए का मुआवजा देगा। यह फैसला सभी यात्रियों के लिए एक बड़ी जीत है। इससे ट्रेन की देरी पर अब रेलवे अपनी जिम्मेदारी से नहीं बचेगा।
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क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक हैरान करने वाला मामला आया है। साल 2018 में समृद्धि नाम की छात्रा नीट की परीक्षा देने निकली थी। उसने बस्ती से लखनऊ जाने वाली सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट लिया था।
ट्रेन को सुबह 11 बजे लखनऊ स्टेशन पर पहुंचना था। परीक्षा केंद्र पर पहुंचने का समय दोपहर 12:30 बजे तय था। छात्रा सही समय पर अपनी ट्रेन में सवार हुई थी। लेकिन ट्रेन अपने समय से ढाई घंटे की देरी से पहुंची। देरी की वजह से परीक्षा केंद्र के दरवाजे बंद हो चुके थे। रेलवे की इस गलती से छात्रा का पूरा एक साल बर्बाद हुआ था।
उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना
छात्रा ने हार मानने के बजाय कानून का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता प्रभाकर मिश्रा के माध्यम से उन्होंने उपभोक्ता आयोग में रेलवे के खिलाफ ₹20 लाख के मुआवजे का दावा पेश किया था।
रेलवे की दलील और कोर्ट की फटकार
कोर्ट में सुनवाई के दौरान रेलवे ने अपनी गलती मानी। रेलवे ने माना कि ट्रेन स्टेशन पर देरी से पहुंची थी। रेलवे देरी की कोई ठोस वजह नहीं बता पाया। तकनीकी खराबी या आपदा का कोई सबूत नहीं मिला। उपभोक्ता आयोग के जज अमरजीत वर्मा ने इसे गलत माना। रेलवे की इस लापरवाही को सेवा में दोष माना गया।
आयोग के जज ने सुनाए ये फैसले
रेलवे को 45 दिनों के भीतर 9.10 लाख रुपए का भुगतान करना होगा।
यदि भुगतान में देरी होती है, तो रेलवे को 12% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आयोग ने स्पष्ट किया कि यात्रियों का समय कीमती है और रेलवे को अपनी टाइमटेबल के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
छात्रों के लिए जरूरी कानूनी अधिकार
यह मामला उन लाखों छात्रों के लिए एक नजीर (Precedent) है जो हर साल प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं (UPSC, SSC, JEE, NEET) के लिए लंबी यात्राएं करते हैं।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019
यदि किसी सरकारी विभाग या परिवहन सेवा की लापरवाही से आपका शैक्षणिक नुकसान होता है, तो आप धारा 2(11) के तहत 'सेवा में कमी' का केस दर्ज कर सकते हैं।
ट्रेन या बस का मूल टिकट।
परीक्षा का एडमिट कार्ड (Admit Card)।
रेलवे से प्राप्त डिले सर्टिफिकेट (Delay Certificate)।
आरटीआई (railway news) के माध्यम से प्राप्त देरी का कारण।
SOOTR KNOWLEDGE
क्या हैं यात्रियों के कानून?
ट्रेन में सफर करने वाले हर यात्री को अपने इन कानूनी अधिकारों के बारे में जरूर जानना चाहिए।
ट्रेन लेट होने पर रिफंड: अगर ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट है, तो आप पूरा पैसा वापस पा सकते हैं।
मुफ्त भोजन की सुविधा: शताब्दी या राजधानी जैसी ट्रेनों के लेट होने पर रेलवे मुफ्त खाना देता है।
सेवा में कमी पर मुआवजा: लापरवाही से नुकसान होने पर आप उपभोक्ता कोर्ट में केस कर सकते हैं।
टिकट अपग्रेड का नियम: सीट खाली होने पर टीटीई आपकी क्लास को अपग्रेड कर सकता है।
सुरक्षा और मदद: सफर में तबीयत खराब होने पर आप मेडिकल मदद मांग सकते हैं।
सामान चोरी होने पर जवाबदेही: सुरक्षा में चूक होने पर रेलवे से सामान का हर्जाना मांगा जा सकता है।
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ALERTS
शिकायत करने के तरीके
आप ट्रेन लेट होने पर कई तरह से शिकायत कर सकते हैं।
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हेल्पलाइन नंबर 139: यह भारतीय रेलवे का एकल नंबर है, जहां आप यात्रा (भारतीय रेलवे न्यूज) के दौरान भी शिकायत कर सकते हैं।
RailMadad ऐप/वेबसाइट: रेल मदद (RailMadad ) ऐप या रेल मदद वेबसाइट के माध्यम से आप अपनी शिकायत और सुझाव दर्ज कर सकते हैं।
SMS: यात्री अपनी शिकायत का विवरण 139 पर SMS के माध्यम से भी भेज सकते हैं।
ऑनबोर्ड स्टाफ: आप चलती ट्रेन में टीटीई (TTE) या कोच अटेंडेंट को भी शिकायत बता सकते हैं।
सुरक्षा संबंधी शिकायतें: सुरक्षा से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए 182 पर कॉल करें।
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