धार भोजशाला में कब बनी मस्जिद, क्या है पूरा विवाद जानिए विस्तार से
Manya Jain | Mar 11, 2024, 16:20 IST
dhar bhojshala mandir
हिंदू पक्ष का दावा है कि अलाउद्दानी खिलजी ने सन् 1300 में और फिर 1540 में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर अटैक किया था। इस दौरान दरगाह बनाई गई थी। जबकि यह प्रचीन हिंदू धार्मिक स्थल है।
MP News. धार भोजशाला विवाद पर आज कोर्ट का बड़ा फैसला आने वाला है। सबकी निगाहें अब इंदौर हाईकोर्ट के इस अहम निर्णय पर टिकी हैं। इससे पहले कोर्ट ने पूरे परिसर के वैज्ञानिक सर्वे के आदेश दिए थे।
हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश कर चुके हैं। मुस्लिम पक्ष का दावा था कि यहां हमेशा से मस्जिद रही है। वहीं हिंदू पक्ष इसे प्राचीन और ऐतिहासिक हिंदू स्थल मानता आया है।
उनका कहना था कि यहां हिंदू संस्कृति के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं। काशी की ज्ञानवापी की तरह ही यहां भी गहन सर्वे किया गया था। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुनाएगा। इस फैसले से तय होगा कि धार भोजशाला मामला में रूप से किसका दावा सच है।
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इस वर्ग का मानना है कि यहां कमाल मौलाना की दरगाह है। यह मस्जिद ही है और 1985 के वक्फ बोर्ड के बनने पर उनके ऑर्डर में इसे जामा मस्जिद कहा गया है। इसलिए यह हमारा धर्मस्थल है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अलाउद्दीन खिलजी के समय 1307 से ही यह हमारा स्थल है, उन्हीं के समय से मस्जिद बनी हुई है। रिकॉर्ड में भोजशाला के साथ कमाल मौलाना की मस्जिद लिखी हुई है। यह पूरा स्थल हमारा है।
हिंदू संगठनों का कहना है कि यह परमार वंश के राजा भोज द्वारा बनवाया गया विश्वस्तरीय स्कूल था। यहां पर इंजीनियरिंग, म्यूजिक, आर्कियोलॉजी व अन्य विषय की श्रेठ पढ़ाई होती थी और इसकी प्रसिद्धी का स्तर नालंदा, तक्षशिला जैसा ही था।
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एक और तथ्य यह बताया जाता है कि यह 0.405 हेक्टेयर का एरिया मूल रूप से सर्वे नंबर 313 (पुराने और नए सर्वे नंबर 604) से जुड़ा हुआ है। वहीं, सर्वे नंबर 302 अलग है, उसमें दरगाह है और इसका भोजशाला से कोई लेना-देना नहीं है।
आर्कियोलॉजिकल रिपोर्ट में भी यह साबित हुआ कि यह हिंदू स्थल रहा है। जैसे कि मुख्य अधिस्थान सुरक्षित है, प्रवेश पर अर्धचंद्र की आकृति है, भगवान गणेश की प्रतिमा मिली है और विष्णु के कुर्मावतार के चिन्ह भी पाए गए हैं।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ट्रस्ट की तरफ से पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन आए थे। उन्होंने कहा कि साल 1902-03 में एएसआई की रिपोर्ट में भोजशाला का जिक्र है। यहां विष्णु, कमल, संस्कृत के शब्द भी मिले हैं।
उन्होंने कहा कि हम यहां किसी स्वामित्व या कब्जे की मांग नहीं कर रहे। हमारा सिर्फ वरशिप एक्ट 1958 के तहत पूजा करने का अधिकार चाहिए। उनके साथ अधिवक्ता विनय जोशी भी मौजूद थे।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ट्रस्ट, रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग, जितेंद्र बिसने, सुनील सास्वत ने याचिका दायर की है।
इसमें केंद्र सरकार, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ( एएसआई ), आर्कियोलॉजिकल ऑफिसर, मप्र सरकार, जिला कलेक्टर, एसपी, मौलाना कमालुद्दीन थ्रू इट्स प्रेसीडेंट अब्दुल समद खान, श्री महाराजा भोजशाला संस्थान समिति को पार्टी बनाया गया है। धार भोजशाला का होगा सर्वे
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हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश कर चुके हैं। मुस्लिम पक्ष का दावा था कि यहां हमेशा से मस्जिद रही है। वहीं हिंदू पक्ष इसे प्राचीन और ऐतिहासिक हिंदू स्थल मानता आया है।
उनका कहना था कि यहां हिंदू संस्कृति के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं। काशी की ज्ञानवापी की तरह ही यहां भी गहन सर्वे किया गया था। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुनाएगा। इस फैसले से तय होगा कि धार भोजशाला मामला में रूप से किसका दावा सच है।
मुस्लिम पक्ष के अनुसार
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इस वर्ग का मानना है कि यहां कमाल मौलाना की दरगाह है। यह मस्जिद ही है और 1985 के वक्फ बोर्ड के बनने पर उनके ऑर्डर में इसे जामा मस्जिद कहा गया है। इसलिए यह हमारा धर्मस्थल है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अलाउद्दीन खिलजी के समय 1307 से ही यह हमारा स्थल है, उन्हीं के समय से मस्जिद बनी हुई है। रिकॉर्ड में भोजशाला के साथ कमाल मौलाना की मस्जिद लिखी हुई है। यह पूरा स्थल हमारा है।
हिंदू संगठन का पक्ष
dhar bhojshala
- यह सन् एक हजार में स्थापित हुआ था। यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा थी। साथ ही यहां पर हिंदू स्ट्रक्चर के पूरे साक्ष्य मौजूद हैं। खंबों पर हिंदू संस्कृति की नक्काशी है, संस्कत व प्राकूत भाषा में शब्द लिखे हुए हैं।
- यहां कभी भी मस्जिद नहीं रही है। पुराने रिकार्ड में भी हमेशा भोजशाल शब्द का उपयोग हुआ है।
- इसलिए यह स्थल हमारी उपासना का केंद्र है। यह पूरी तरह हमे मिलना चाहिए। हिंदू पक्ष का यह भी तर्क है कि जिन कमाल मौलान की यहां मजार बताई जाती है, वह तो धार में कभी दफनाए ही नहीं गए। आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने पहले यहां खुदाई भी की थी। उस समय भी हिंदू स्थल के सबूत मिले थे, लेकिन फिर रोक दी गई। इसलिए यह खुदाई यहां की और दरगाह स्थल की भी होना चाहिए, इससे सब साफ हो जाएगा।
- यह भी तथ्य कहा जाता है कि अलाउद्दानी खिलजी ने 1300 में अटैक किया था और फिर 1540 में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर अटैक किया था। इस दौरान दरगाह बनाई गई, जो वास्तव में है ही नहीं। जबकि यह स्थल मूल रूप से एक हजार साल साल पहले राजा भोज द्वारा तैयार कराया गया स्कूल था।
रिकार्ड में क्या- क्या रहा है
- साल 1902-03 के दौरान लार्ड कर्जन ने धार,. मांडू की दौरा किया था, तब भोजशाला में मेंटनेंस के लिए 50 हजार राशि खर्च करने के आदेश दिए थे। एएसआई की तब की रिपोर्ट में भोजशाला वर्णन है, साथ ही लिखा है कि यहां संस्कृत, प्राकृत भाषा में लिखे शब्द हैं।
- साल 1951 के नोटिफिकेशन में इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है और इसमें भोजशाल व कमाल मौला की मस्जिद शब्द लिखा हुआ है। साल 1935 में तत्कालीन धार महाराज ने यहां पर विवादों को देखते हुए साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए नमाज की मंजूरी दे दी थी। साल 1944 में यहां दंगे भी हुए।
- बाबरी कांड के बादर जयभान सिंह पवैया ओर साध्वी ऋतिम्भरा ने यहां 1993, 1994 में आंदोलन किया।
- 1995 में विवाद पर तत्कालीन जिला कलेक्टर सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आदेश जारी किया कि मुस्लिम हर शुक्रवार को नमाज अदा करेंगे और हिंदू साल में सिर्फ एक बार बसंत पंचमी पर पूजन कर सकेंगे।
- साल 2003 में प्रवीण तोगड़िया ने यहां पर आंदोलन किया। इस दौरान तत्कालीन कलेक्टर संजय दुबे के साथ धक्का मुक्की भी हुई। इसके बाद फिर नया आदेश निकाला। इसमें व्यवस्था की गई की हिंदू मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजन कर सकेंगे और मुस्लिम हर शुक्रवार को दोपहर एक से तीन नमाज अदा कर सकेंगे। साथ ही बसंत पंचमी के दिन हिंदू पूजा कर सकेंगे।
यही स्थिति अब भी है
आर्कियोलॉजिकल रिपोर्ट में भी यह साबित हुआ कि यह हिंदू स्थल रहा है। जैसे कि मुख्य अधिस्थान सुरक्षित है, प्रवेश पर अर्धचंद्र की आकृति है, भगवान गणेश की प्रतिमा मिली है और विष्णु के कुर्मावतार के चिन्ह भी पाए गए हैं।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ट्रस्ट की तरफ से पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन आए थे। उन्होंने कहा कि साल 1902-03 में एएसआई की रिपोर्ट में भोजशाला का जिक्र है। यहां विष्णु, कमल, संस्कृत के शब्द भी मिले हैं।
उन्होंने कहा कि हम यहां किसी स्वामित्व या कब्जे की मांग नहीं कर रहे। हमारा सिर्फ वरशिप एक्ट 1958 के तहत पूजा करने का अधिकार चाहिए। उनके साथ अधिवक्ता विनय जोशी भी मौजूद थे।
हाईकोर्ट याचिका में यह है पक्षकार
इसमें केंद्र सरकार, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ( एएसआई ), आर्कियोलॉजिकल ऑफिसर, मप्र सरकार, जिला कलेक्टर, एसपी, मौलाना कमालुद्दीन थ्रू इट्स प्रेसीडेंट अब्दुल समद खान, श्री महाराजा भोजशाला संस्थान समिति को पार्टी बनाया गया है। धार भोजशाला का होगा सर्वे
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