दुनिया की पहली पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन तैयार, अब शरीर खुद खत्म करेगा कैंसर
Aman Vaishnav | Aug 25, 2026, 11:48 IST
पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन
वैज्ञानिकों ने दुनिया की पहली पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन तैयार कर ली है। यह वैक्सीन मरीज के ट्यूमर से बनती है। साथ ही शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने की ट्रेनिंग देती है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- अमेरिकी कंपनियों मॉडर्ना और मर्क ने मेलेनोमा के लिए नई वैक्सीन बनाई है।
- यह दुनिया की पहली पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन मानी जा रही है।
- वैक्सीन मरीज के ट्यूमर से तैयार होती है, इसलिए हर मरीज के लिए अलग होती है।
- यह कोविड वैक्सीन वाली mRNA तकनीक पर आधारित है।
- ट्रायल के तीसरे और अंतिम चरण में नतीजे बेहद उत्साहजनक मिले हैं।
यह वैक्सीन कैंसर सर्जरी के बाद बीमारी को दोबारा लौटने से रोकने में मदद करेगी। ट्रायल के नतीजों ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है।
क्या है यह नई वैक्सीन
वैज्ञानिक मरीज के ट्यूमर का जेनेटिक कोड पढ़ते हैं। इसी आधार पर उसकी अपनी वैक्सीन तैयार होती है।
यह वैक्सीन उन मरीजों को दी जाती है जिनका मेलेनोमा सर्जरी से पहले ही हटाया जा चुका है। यानी यह बीमारी रोकने वाली नहीं, बल्कि इलाज के बाद इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन है।
ज्यादातर वैक्सीन बीमारी से पहले दी जाती हैं, लेकिन यह वैक्सीन इससे अलग तरीके से काम करती है।
कोविड वाली तकनीक से बनी वैक्सीन
डॉ. पोस्टो का कहना है कि mRNA थैरेपी अब सिर्फ प्रयोग नहीं, बल्कि हकीकत बनती दिख रही है। उनके मुताबिक कोविड वैक्सीन की सफलता ने इस तकनीक पर भरोसा और मजबूत कर दिया है।
वैक्सीन कैसे काम करती है
वैक्सीन का निशाना कैंसर कोशिकाओं की सतह पर मौजूद असामान्य प्रोटीन होते हैं, जिन्हें नियोएंटीजन कहा जाता है।
इम्यून सिस्टम इन नियोएंटीजन को पहचानकर सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला कर देता है। इससे स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना सिर्फ कैंसर कोशिकाएं खत्म होती हैं। हर मरीज के ट्यूमर में यह प्रोटीन अलग होते हैं, इसलिए हर वैक्सीन भी अलग बनानी पड़ती है।
ट्रायल के नतीजे इतने खास क्यों
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नतीजे मेलेनोमा रिसर्च के लिए निर्णायक पल हैं। मेलेनोमा तेजी से फैलने वाला स्किन कैंसर है और यह पिगमेंट बनाने वाली कोशिकाओं से शुरू होता है। यही वजह है कि स्किन कैंसर से होने वाली मौतों में इसका योगदान सबसे ज्यादा है।
भारत बन सकता है सबसे बड़ा निर्माता
डॉ. पोस्टो का मानना है कि भारत दुनिया में वैक्सीन और दवाओं का सबसे बड़ा निर्माता है। उन्हें उम्मीद है कि भारत स्किन कैंसर मरीजों की मदद के लिए यह मौका जरूर भुनाएगा। इससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है।
वैक्सीन कब तक मरीजों तक पहुंचेगी
अब अमेरिकी नियामक एफडीए इसकी समीक्षा करेगा। उम्मीद है कि कुछ महीनों में मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद ही यह साफ होगा कि आम मरीजों तक यह वैक्सीन कब पहुंचेगी।
मरीजों के लिए क्यों है यह उम्मीद की किरण
FAQ
- पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन क्या है?
यह एक ऐसी वैक्सीन है जो हर मरीज के ट्यूमर के जेनेटिक कोड के आधार पर अलग से बनाई जाती है। यह सर्जरी के बाद दी जाती है ताकि कैंसर दोबारा न लौटे। इसे मॉडर्ना और मर्क ने मिलकर विकसित किया है। - पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन काम कैसे करती है?
ह वैक्सीन इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं की सतह पर मौजूद नियोएंटीजन पहचानना सिखाती है। इसके बाद शरीर खुद ही कैंसर कोशिकाओं को ढूंढकर खत्म करता है। - पर्सनलाइज्ड वैक्सीन भारत में कब उपलब्ध होगी?
इसका फैसला भारत के नियामकों की समीक्षा प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। पहले इसे अमेरिकी नियामक एफडीए की मंजूरी मिलनी है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि भारत इस मौके का फायदा उठाकर वैक्सीन निर्माण में भी आगे आएगा।
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