मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, चेतावनी के बाद बढ़ा दबाव
Jitendra Shrivastava | Aug 05, 2026, 20:14 IST
Photograph: (THESOOTR)
मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से माफी मांगी। डीपफेक कंटेंट, चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM) और पीएम मोदी की पोस्ट विवाद पर सरकार सख्त रही।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- सरकार ने दिया तीन दिन का अल्टीमेटम।
- जुकरबर्ग ने मांगी बिना शर्त माफी।
- पीएम मोदी पोस्ट विवाद बना कारण।
- CSAM और डीपफेक पर जवाब मांगा।
- Meta की कानूनी सुरक्षा पर संकट।
संसदीय समिति ने कंपनी को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया था। इस पूरे मामले में पीएम मोदी की पोस्ट हटाने, आईटी नियमों के पालन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे मुद्दे केंद्र में हैं।
विवाद कैसे शुरू हुआ
सरकार ने इसे गंभीर माना। कंपनी ने तकनीकी गलती बताई। बाद में पोस्ट दोबारा बहाल कर दी गई। इसके बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ। सरकार ने जवाब मांगा। मामला संसदीय समिति तक पहुंच गया।
सरकार ने क्यों जताई नाराजगी
सरकार ने कंटेंट मॉडरेशन पर आपत्ति जताई। वीआईपी अकाउंट सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। आईटी नियमों के पालन की समीक्षा हुई। कंपनी की जवाबदेही पर जोर दिया गया। मंत्रालय ने विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा। अधिकारियों को दिल्ली बुलाया गया।
जुकरबर्ग ने मांगी माफी
कंपनी ने तकनीकी कमियों को स्वीकार किया। सरकार ने सुधार की अपेक्षा जताई। माफी के बाद भी जांच जारी रहेगी। नियमों के पालन की समीक्षा होगी।
संसदीय समिति का अल्टीमेटम
समिति ने कानूनी सुरक्षा वापस लेने की चेतावनी दी। आईटी कानून की छूट पर भी सवाल उठे। समिति ने जवाबदेही तय करने की बात कही। आगे कानूनी कार्रवाई संभव बताई गई।
आईटी मंत्रालय की जांच
कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली की समीक्षा हुई। व्हाट्सएप नीति पर भी चर्चा हुई। इंस्टाग्राम सुरक्षा व्यवस्था जांची गई। बच्चों से जुड़े कंटेंट पर सवाल पूछे गए। तकनीकी सुरक्षा को लेकर जवाब मांगा गया।
पीएम मोदी पोस्ट विवाद
कंपनी ने तकनीकी त्रुटि स्वीकार की। सरकार ने जवाब संतोषजनक नहीं माना। इसी विवाद ने मामला गंभीर बनाया। सोशल मीडिया निगरानी बढ़ गई।
एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
करोड़ों भारतीयों पर असर
जवाबदेही और बढ़ सकती है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा प्राथमिकता बनेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म अधिक पारदर्शी बन सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है
कंपनियों को जवाबदेह बनना होगा। यूजर अधिकारों पर अधिक ध्यान रहेगा। डिजिटल सुरक्षा मजबूत होने की संभावना है। आने वाले दिनों में और फैसले संभव हैं।
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