अधिक मास 2026 के समय ये काम करना पड़ सकता है भारी, कहीं आप तो नहीं कर रहे गलती?
Kaushiki | Apr 16, 2026, 13:08 IST
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Adhik Maas 2026: आज 17 मई से अधिक मास शुरू हो रहा है। इस पुरुषोत्तम मास में दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। जानें क्या करें और क्या नहीं।
Adhik Maas 2026: हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, खरमास 14 अप्रैल को समाप्त हो चुका है। सूर्य के मेष राशि में आने से मांगलिक कार्य शुरू हुए थे। लेकिन अब जल्द ही अधिक मास की शुरुआत होने वाली है। अधिक मास को हम मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं।
यह महीना हर तीन साल में एक बार आता है। यह चंद्र और सूर्य वर्ष के बीच संतुलन बनाता है। इस साल ज्येष्ठ के महीने में अधिक मास लगेगा। इसे अधिक ज्येष्ठ मास के नाम से जाना जाएगा। धार्मिक दृष्टि से यह महीना भक्ति के लिए श्रेष्ठ है।
![जानें क्यों होता है अधिकमास - MyPandit Fresh WP1]()
साल 2026 में अधिक मास मई के महीने में शुरू होगा। इसकी शुरुआत आज रविवार, 17 मई 2026 से हो रही है। इसका समापन सोमवार, 15 जून 2026 को होगा।
पूरे एक महीने तक भगवान विष्णु की विशेष पूजा होगी। इस दौरान शुभ कार्यों पर फिर से रोक लग जाएगी। लेकिन आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह समय बहुत उत्तम है। श्रद्धालु इस पूरे महीने जप और तप करते हैं।
![Adhik Maas 2026 A Complete Guide to the 13th MonthDuration and What to Do|अधिक मास 2026: 13वें महीने का पूरा मार्गदर्शन, कब से कब तक रहेगा और क्या करना चाहिए]()
पौराणिक कथा के मुताबिक, हर महीने का एक स्वामी होता है। लेकिन जब अधिक मास (मलमास) की उत्पत्ति हुई, तो उसे मलिन मानकर कोई भी देवता उसका स्वामी बनने को तैयार नहीं था।
इस कारण हर जगह उसकी निंदा होने लगी। दुखी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास वैकुंठ पहुंचा और अपनी व्यथा सुनाई। उसने भगवान से अपना उद्धार करने की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने उसे अपना नाम पुरुषोत्तम दे दिया।
भगवान ने वरदान दिया कि जो भी इस महीने में भक्ति, पूजन और दान करेगा, उसे अक्षय पुण्य मिलेगा। श्रीहरि ने कहा कि अब से मैं इस मास का स्वामी हूं। इसलिए ये पुरुषोत्तम मास कहलाएगा। तब से इस महीने में विष्णु पूजा का विशेष महत्व हो गया।
![अधिक मास के बारे में आपको जो कुछ भी जानना चाहिए]()
अधिक मास केवल धार्मिक नहीं, वैज्ञानिक रूप से भी जरूरी है। सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में 11 दिन का अंतर होता है। तीन साल में यह अंतर एक महीने का हो जाता है। चूंकि इसमें सूर्य की संक्रांति (राशि परिवर्तन) नहीं होती, इसलिए इसे मलमास भी कहते हैं।
इसमें विवाह जैसे मांगलिक कार्य रुक जाते हैं, लेकिन जप, तप और दान का फल अनंत गुना बढ़ जाता है। इसी अंतर के गैप के लिए अधिक मास आता है।
आध्यात्मिक रूप से ये खुद को शुद्ध करने का समय है। ये महीना हमें संसार से हटकर ईश्वर से जोड़ता है। इसमें किए गए दान का फल अक्षय होता है। खरमास खत्म
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यह महीना हर तीन साल में एक बार आता है। यह चंद्र और सूर्य वर्ष के बीच संतुलन बनाता है। इस साल ज्येष्ठ के महीने में अधिक मास लगेगा। इसे अधिक ज्येष्ठ मास के नाम से जाना जाएगा। धार्मिक दृष्टि से यह महीना भक्ति के लिए श्रेष्ठ है।
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अधिक मास 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
पूरे एक महीने तक भगवान विष्णु की विशेष पूजा होगी। इस दौरान शुभ कार्यों पर फिर से रोक लग जाएगी। लेकिन आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह समय बहुत उत्तम है। श्रद्धालु इस पूरे महीने जप और तप करते हैं।
Adhik Maas 2026 A Complete Guide to the 13th MonthDuration and What to Do|अधिक मास 2026: 13वें महीने का पूरा मार्गदर्शन, कब से कब तक रहेगा और क्या करना चाहिए
अधिक मास की पौराणिक कथा
इस कारण हर जगह उसकी निंदा होने लगी। दुखी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास वैकुंठ पहुंचा और अपनी व्यथा सुनाई। उसने भगवान से अपना उद्धार करने की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने उसे अपना नाम पुरुषोत्तम दे दिया।
भगवान ने वरदान दिया कि जो भी इस महीने में भक्ति, पूजन और दान करेगा, उसे अक्षय पुण्य मिलेगा। श्रीहरि ने कहा कि अब से मैं इस मास का स्वामी हूं। इसलिए ये पुरुषोत्तम मास कहलाएगा। तब से इस महीने में विष्णु पूजा का विशेष महत्व हो गया।
अधिक मास के बारे में आपको जो कुछ भी जानना चाहिए
अधिक मास में क्या करना चाहिए
- इस पवित्र महीने में दान-पुण्य का बड़ा महत्व है।
- गरीबों को अन्न और वस्त्र दान करना शुभ होता है।
- रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान और ध्यान करें।
- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करें।
- श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना बहुत कल्याणकारी होता है।
- शाम को मंदिर या घर में दीपदान जरूर करें।
- किसी पवित्र नदी में स्नान करने से पाप कटते हैं।
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी फलदायी माना गया है।
- इस महीने सात्विक जीवन जीने का संकल्प लें।
भूलकर भी न करें ये काम
- अधिक मास में कुछ कार्यों की सख़्त मनाही होती है।
- इस दौरान शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।
- सगाई, मुंडन और जनेऊ संस्कार भी वर्जित होते हैं।
- नए घर की नींव रखना या गृह प्रवेश न करें।
- नई दुकान या व्यापार शुरू करने से बचना चाहिए।
- कीमती वस्तुएं जैसे सोना या गाड़ी न खरीदें।
- तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें।
- प्याज और लहसुन से भी परहेज करना चाहिए।
- किसी भी व्यक्ति का अपमान या बुराई न करें।
- नए निवेश के लिए भी यह समय ठीक नहीं है।
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलू
इसमें विवाह जैसे मांगलिक कार्य रुक जाते हैं, लेकिन जप, तप और दान का फल अनंत गुना बढ़ जाता है। इसी अंतर के गैप के लिए अधिक मास आता है।
आध्यात्मिक रूप से ये खुद को शुद्ध करने का समय है। ये महीना हमें संसार से हटकर ईश्वर से जोड़ता है। इसमें किए गए दान का फल अक्षय होता है। खरमास खत्म
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