अब कब लगेगा अगला अधिक मास? जानें इसका वैज्ञानिक और धार्मिक कारण
Kaushiki | Jun 26, 2026, 16:15 IST
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साल 2026 का अधिक मास 15 जून को समाप्त हो गया है। अब अगला अधिक मास साल 2029 में लगेगा। यह चैत्र के महीने में आएगा। इसकी शुरुआत 16 मार्च 2029 से होगी।
Adhik Maas: साल 2026 का अधिक मास 15 जून को पूरी तरह संपन्न हो गया। अब सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर शुरू हो गए हैं। शादियां और मुंडन जैसे शुभ काम अब आसानी से हो सकेंगे। नए व्यापार की शुरुआत भी अब की जा सकती है।
इस साल ये महीना ज्येष्ठ के दौरान आया था। इस वजह से इस बार दो ज्येष्ठ महीने पड़ रहे थे। सोमवार के दिन अमावस्या होना बहुत शुभ माना जाता है। भक्तों ने पवित्र नदियों में स्नान करके पूजा की। उन्होंने दान पुण्य करके इस महीने को विदाई दी। अब 16 जून से शुद्ध
ज्येष्ठ मास शुरू हो गया है। यह पक्ष 29 जून को पूर्णिमा के साथ समाप्त हो जाएगा। शुभ कार्यों के शुरू होने से बाजारों में रौनक लौट आई है। ऐसे में आइए जानें कि अगला अधिक मास कब लगेगा।
![Adhik Maas 2029]()
अब लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है। लोग जानना चाहते हैं कि अगला अधिक मास कब आएगा। इसके लिए आपको थोड़ा लंबा इंतजार करना होगा। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, अब यह तीन साल बाद फिर से अधिक मास आएगा। तो ऐसे में अगला अधिक मास साल 2029 में लगने वाला है।
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, साल 2029 में ये चैत्र के महीने में लगेगा। यह मलमास 16 मार्च 2029 से शुरू होकर 13 अप्रैल 2029 को होगा। इस दौरान सभी शुभ कार्यों पर फिर रोक लग जाएगी। लोग केवल भगवान की भक्ति में समय बिताएंगे।
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ज्योतिषियों ने आगे के सालों की भी गणना की है। साल 2029 के बाद भी अधिक मास आएंगे। साल 2031 में ये भाद्रपद के महीने में लगेगा। इसे हम भादो का महीना भी कहते हैं। इसके बाद साल 2034 में यह आषाढ़ में आएगा।
फिर साल 2037 में ये दोबारा ज्येष्ठ में आएगा। यानी 11 साल बाद यह ज्येष्ठ में वापस आएगा। इस तरह पंचांग का यह चक्र लगातार चलता रहता है। हर बार इसका एक विशेष महत्व होता है। लोग इस दौरान विशेष पूजा पाठ का आयोजन करते हैं। धार्मिक नजरिए से यह समय बहुत उत्तम होता है।
![Adhik Maas 2029]()
अधिक मास का आना केवल एक धार्मिक मान्यता नहीं है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण भी छिपा है। यह खगोलीय और गणितीय गणना का अद्भुत नमूना है। हमारे पंचांग में सौर वर्ष और चंद्र वर्ष होते हैं। सौर वर्ष में कुल 365 दिन 6 घंटे होते हैं।
वहीं चंद्र वर्ष में केवल 354 दिन होते हैं। दोनों वर्षों के बीच हर साल 11 दिन का अंतर आता है। तीन सालों में यह अंतर बढ़कर 33 दिन हो जाता है। यह समय लगभग एक महीने से थोड़ा ज्यादा होता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए अधिक मास आता है।
मौसम के चक्र को सही रखने के लिए यह जरूरी है। हर तीसरे साल पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है। इसे ही हम सब अधिक मास या मलमास कहते हैं। जब किसी चंद्र मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती तब यह पड़ता है। वैज्ञानिक रूप से यह समय को सही रखने का जरिया है। इससे हमारे सभी त्योहार सही मौसम में आते हैं।
![What can you donate in Adhik Maas - Guruweshvar Shani Foundation]()
इस महीने को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसके पीछे एक बहुत ही सुंदर पौराणिक कथा है। प्राचीन समय में इस महीने का कोई स्वामी नहीं था। इस महीने में सूर्य संक्रांति बिल्कुल नहीं होती है। इस वजह से इसे मलमास या अशुद्ध माना जाता था।
कोई भी देवता इसका स्वामी बनने को तैयार नहीं था। इस कारण संसार में इस महीने की उपेक्षा होती थी। इसमें कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता था। अपनी इस दुर्दशा से यह महीना बहुत दुखी हुआ। दुखी होकर वह भगवान विष्णु के पास पहुंच गया।
उसने भगवान विष्णु को अपनी पूरी व्यथा सुनाई। भगवान विष्णु बहुत दयालु हैं। उन्होंने इस दुखी महीने की पूरी बात ध्यान से सुनी। श्रीहरि ने इस अशुद्ध महीने को तुरंत अपना लिया। उन्होंने इसे अपना सबसे उत्तम नाम पुरुषोत्तम सौंप दिया।
भगवान विष्णु ने इस महीने को एक बड़ा वरदान दिया। उन्होंने कहा कि जो भी इसमें मेरी पूजा करेगा उसे फल मिलेगा। उसे पूरे वर्ष की पूजा से भी अधिक फल मिलेगा। तभी से यह महीना सबसे श्रेष्ठ माना जाने लगा। लोग इस महीने में जप और तप करते हैं।
इस पवित्र महीने (भगवान विष्णु की पूजा) में कुछ विशेष नियम होते हैं। लोगों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इस दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करना उत्तम है और श्रीमद्भागवत गीताका पाठ करें।
आपको ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना चाहिए। इस महीने में दान करने का बहुत महत्व है। गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान करें। इस समय श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करना चाहिए। इससे घर में सुख और शांति का वास होता है।
सभी प्रकार के मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं। व्यक्ति को जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। इस महीने में सात्विक भोजन ही करना चाहिए। किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहना चाहिए।
अधिक मास (ज्येष्ठ माह) हमें विज्ञान और धर्म का संगम सिखाता है। यह पंचांग को संतुलित करने का सुंदर तरीका है। साथ ही यह भक्ति का एक बड़ा अवसर देता है। भगवान विष्णु की कृपा पाने का यह उत्तम समय होगा। इस दौरान अपने मन को शुद्ध रखना सबसे जरूरी है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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इस साल ये महीना ज्येष्ठ के दौरान आया था। इस वजह से इस बार दो ज्येष्ठ महीने पड़ रहे थे। सोमवार के दिन अमावस्या होना बहुत शुभ माना जाता है। भक्तों ने पवित्र नदियों में स्नान करके पूजा की। उन्होंने दान पुण्य करके इस महीने को विदाई दी। अब 16 जून से शुद्ध
ज्येष्ठ मास शुरू हो गया है। यह पक्ष 29 जून को पूर्णिमा के साथ समाप्त हो जाएगा। शुभ कार्यों के शुरू होने से बाजारों में रौनक लौट आई है। ऐसे में आइए जानें कि अगला अधिक मास कब लगेगा।
Adhik Maas 2029
अगला अधिक मास कब लगेगा
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, साल 2029 में ये चैत्र के महीने में लगेगा। यह मलमास 16 मार्च 2029 से शुरू होकर 13 अप्रैल 2029 को होगा। इस दौरान सभी शुभ कार्यों पर फिर रोक लग जाएगी। लोग केवल भगवान की भक्ति में समय बिताएंगे।
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आगामी अधिक मास का पूरा कैलेंडर
फिर साल 2037 में ये दोबारा ज्येष्ठ में आएगा। यानी 11 साल बाद यह ज्येष्ठ में वापस आएगा। इस तरह पंचांग का यह चक्र लगातार चलता रहता है। हर बार इसका एक विशेष महत्व होता है। लोग इस दौरान विशेष पूजा पाठ का आयोजन करते हैं। धार्मिक नजरिए से यह समय बहुत उत्तम होता है।
Adhik Maas 2029
अधिक मास का वैज्ञानिक कारण
वहीं चंद्र वर्ष में केवल 354 दिन होते हैं। दोनों वर्षों के बीच हर साल 11 दिन का अंतर आता है। तीन सालों में यह अंतर बढ़कर 33 दिन हो जाता है। यह समय लगभग एक महीने से थोड़ा ज्यादा होता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए अधिक मास आता है।
मौसम के चक्र को सही रखने के लिए यह जरूरी है। हर तीसरे साल पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है। इसे ही हम सब अधिक मास या मलमास कहते हैं। जब किसी चंद्र मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती तब यह पड़ता है। वैज्ञानिक रूप से यह समय को सही रखने का जरिया है। इससे हमारे सभी त्योहार सही मौसम में आते हैं।
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पुरुषोत्तम मास की पौराणिक कथा
कोई भी देवता इसका स्वामी बनने को तैयार नहीं था। इस कारण संसार में इस महीने की उपेक्षा होती थी। इसमें कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता था। अपनी इस दुर्दशा से यह महीना बहुत दुखी हुआ। दुखी होकर वह भगवान विष्णु के पास पहुंच गया।
उसने भगवान विष्णु को अपनी पूरी व्यथा सुनाई। भगवान विष्णु बहुत दयालु हैं। उन्होंने इस दुखी महीने की पूरी बात ध्यान से सुनी। श्रीहरि ने इस अशुद्ध महीने को तुरंत अपना लिया। उन्होंने इसे अपना सबसे उत्तम नाम पुरुषोत्तम सौंप दिया।
भगवान विष्णु ने इस महीने को एक बड़ा वरदान दिया। उन्होंने कहा कि जो भी इसमें मेरी पूजा करेगा उसे फल मिलेगा। उसे पूरे वर्ष की पूजा से भी अधिक फल मिलेगा। तभी से यह महीना सबसे श्रेष्ठ माना जाने लगा। लोग इस महीने में जप और तप करते हैं।
अधिक मास में क्या करना चाहिए
आपको ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना चाहिए। इस महीने में दान करने का बहुत महत्व है। गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान करें। इस समय श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करना चाहिए। इससे घर में सुख और शांति का वास होता है।
सभी प्रकार के मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं। व्यक्ति को जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। इस महीने में सात्विक भोजन ही करना चाहिए। किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहना चाहिए।
अधिक मास (ज्येष्ठ माह) हमें विज्ञान और धर्म का संगम सिखाता है। यह पंचांग को संतुलित करने का सुंदर तरीका है। साथ ही यह भक्ति का एक बड़ा अवसर देता है। भगवान विष्णु की कृपा पाने का यह उत्तम समय होगा। इस दौरान अपने मन को शुद्ध रखना सबसे जरूरी है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- अगला अधिक मास कब लगेगा?
हिंदू पंचांग के मुताबिक, अगला अधिक मास साल 2029 में लगेगा। यह चैत्र के महीने में आएगा। इसकी शुरुआत 16 मार्च 2029 से होगी और समापन 13 अप्रैल 2029 को होगा। - अधिक मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?
पौराणिक कथा के मुताबिक, इस महीने का कोई स्वामी नहीं था। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना उत्तम नाम पुरुषोत्तम दिया। उन्होंने वरदान दिया कि इस महीने पूजा करने से कई गुना फल मिलेगा। - अधिक मास आने का वैज्ञानिक कारण क्या है?
सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच हर साल 11 दिन का अंतर होता है। तीन साल में यह अंतर 33 दिन यानी एक महीने का हो जाता है। इसी अंतर को पाटने और मौसम संतुलित करने के लिए अधिक मास आता है।
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