कई शुभ संयोगों से होगी भाद्रपद माह की शुरुआत, जानें इस महीने के पीछे का रहस्य
Kaushiki | Aug 20, 2026, 15:30 IST
September Bhadra Rajyog
भाद्रपद 2026 का महीना 29 अगस्त से शुरू होकर 26 सितंबर तक चलेगा। इस बार भादों का महीना 29 दिनों का होगा। पहले ही दिन त्रिपुष्कर योग का शुभ संयोग बन रहा है। इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी की विशेष पूजा का महत्व है।
September Bhadra Rajyog: सनातन धर्म में भाद्रपद महीने का अपना एक विशेष और बहुत बड़ा धार्मिक महत्व माना गया है। सावन महीने के समापन के ठीक अगले दिन से भाद्रपद की शुरुआत हो जाती है। आषाढ़ और सावन के बाद आने वाला यह हिंदू कैलेंडर का छठा महीना कहलाता है। आम बोलचाल की भाषा में लोग इसे भादों का महीना भी कहकर पुकारते हैं।
इस साल 2026 में सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के पर्व के साथ सावन समाप्त होगा। इसके बाद 29 अगस्त 2026 से भाद्रपद महीने का शुभ आरंभ होने जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि को भाद्रपद नक्षत्र होने से यह नाम पड़ा है।
यह महीना भगवान विष्णु के हृषिकेश स्वरूप को पूरी तरह समर्पित माना जाता है। लोगों को मानसिक शांति मिलती है और उनके घर में खुशहाली का आगमन होता है। आइए जानें इस साल भाद्रपद कब से शुरू हो रहा है और इस दौरान कौन से शुभ योग बन रहे हैं।
![Bhadrapada Month]()
सनातन परंपरा में भाद्रपद (भादों) हिंदू कैलेंडर का छठा महीना है। हर हिंदी महीने का नाम उस पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसके आधार पर रखा जाता है। भाद्रपद माह की पूर्णिमा को चंद्रमा पूर्वाभाद्रपद या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में होता है। इसलिए ऋषियों और मुनियों द्वारा प्राचीन काल में इस महीने का नाम भाद्रपद रखा गया।
'भाद्र' का अर्थ 'कल्याणकारी' और 'पद' का अर्थ 'चरण' होता है, जिसका मतलब है कल्याणकारी फल देने वाला समय। यह महीना भक्ति और संयम का प्रतीक है। इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण (जन्माष्टमी) और विघ्नहर्ता श्री गणेश (गणेश चतुर्थी) का जन्म हुआ था। इसलिए इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है।
मौसम के हिसाब से यह वर्षा ऋतु का मध्य समय होता है। आयुर्वेद के मुताबिक, इस दौरान पाचन तंत्र धीमा रहता है, इसलिए भादों में सात्विक जीवन, व्रत-जप और संयमित खान-पान का विधान बनाया गया है। इस पूरे महीने में स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस माह में किया गया जप-तप फलदायी होता है।
![Bhadrapada Month 2026:29 अगस्त से शुरू होगा भाद्रपद मास, जानें डेट, पर्व और धार्मिक महत्व - Bhadrapada Month 2026 Know The Start And End Dates And Its Religious Significance - Amar Ujala Hindi News Live]()
वैदिक पंचांग की गणना के मुताबिक, इस साल तिथियों का गणित बेहद खास रहने वाला है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का समय बहुत महत्वपूर्ण है। यह प्रतिपदा तिथि 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 48 मिनट से शुरू होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 29 अगस्त को सुबह 9:56 बजे होगा।
शास्त्रों के मुताबिक, सनातन धर्म में उदयातिथि की मान्यता को सबसे ऊपर माना जाता है। इसलिए उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद का शुभारंभ 29 अगस्त शनिवार को होगा। वहीं इस महीने का समापन भाद्रपद पूर्णिमा के दिन 26 सितंबर 2026 को होगा।
इस तरह साल 2026 में भाद्रपद का यह पवित्र महीना कुल 29 दिनों का रहेगा। 29 दिनों के इस महीने में साधकों को पूजा-अर्चना के कई शुभ अवसर मिलेंगे। हर दिन भगवान की भक्ति करके जीवन को सुखी बनाया जा सकता है।
इस साल भाद्रपद के पहले दिन एक बहुत ही दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है। प्रतिपदा तिथि यानी 29 अगस्त को त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। यह त्रिपुष्कर योग 29 अगस्त को सुबह 09:56 बजे से शुरू होकर रात भर रहेगा।
इसका समापन अगले दिन 30 अगस्त को तड़के सुबह 03:42 बजे पर होने वाला है। ज्योतिष शास्त्र में त्रिपुष्कर योग को बहुत ही ज्यादा फलदायी और शुभ माना गया है। इस योग में किए गए किसी भी शुभ काम का फल तीन गुना मिलता है।
इसके अलावा इस दिन सुबह के समय सुकर्मा और धृति योग भी बन रहे हैं। सुकर्मा योग सुबह 06:36 बजे तक रहेगा, जिसके बाद धृति योग शुरू होगा। ये दोनों ही योग धार्मिक कार्यों के लिए बेहद उत्तम और मंगलकारी माने जाते हैं। इन शुभ योगों में पूजा करने से मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी होती हैं।
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भाद्रपद माह के पहले दिन यानी 29 अगस्त को सूर्योदय सुबह 05:57 बजे होगा। वहीं शाम को सूर्यास्त का समय 06:46 बजे पंचांग में दर्ज किया गया है। इस दिन चंद्रोदय शाम को 07:27 बजे होगा और चंद्रास्त अगली सुबह 06:45 पर होगा। किसी भी शुभ काम के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम समय माना जाता है।
प्रतिपदा के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई भी नया या शुभ काम शुरू किया जा सकता है। हालांकि इस दिन पूरे समय पंचक का प्रभाव भी बना रहने वाला है।
राहुकाल का समय सुबह 09:10 बजे से लेकर 10:46 बजे तक बना रहेगा। राहुकाल के समय में कोई भी नया या मांगलिक काम करने से बचना चाहिए। अभिजीत मुहूर्त में ही शुभ काम करना हर तरह से सही रहता है।
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शास्त्रों में भाद्रपद महीने के अधिपति देव भगवान विष्णु के अवतार हृषिकेश माने गए हैं। इसलिए इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा का बहुत बड़ा महत्व होता है। इसके साथ ही इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण का बाल रूप में पूजन किया जाता है।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को पूरे देश में जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं। वहीं भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी से दस दिनों का गणेशोत्सव बड़े धूम-धाम से शुरू होता है।
इस पूरे महीने में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और गणेश जी की आराधना करनी चाहिए। सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित करने से स्वास्थ्य हमेशा बहुत अच्छा बना रहता है। सच्चे मन से की गई भक्ति से जीवन के सारे संकट तुरंत दूर हो जाते हैं। व्यक्ति को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रावण-भाद्रपद मास
शास्त्रों में भाद्रपद यानी भादों महीने के लिए कुछ नियम भी तय किए गए हैं। इस महीने में व्यक्ति को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। भादों के महीने में गुड़, दही और तेल का त्याग करना बहुत शुभ माना जाता है।
इस मौसम में पाचन तंत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है, इसलिए हल्का खाना खाएं।सात्विक जीवनशैली का पालन करते हुए लहसुन और प्याज से पूरी तरह परहेज रखें। किसी भी व्यक्ति को कड़वे शब्द न कहें और मन में शांति बनाए रखें।
इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने से बहुत लाभ मिलता है। अगर नदी जाना संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। जरूरतमंद लोगों को अनाज, कपड़े और तिल का दान करना बेहद फलदायी होता है। इन नियमों का पालन करने से व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक ऊर्जा मिलती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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इस साल 2026 में सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के पर्व के साथ सावन समाप्त होगा। इसके बाद 29 अगस्त 2026 से भाद्रपद महीने का शुभ आरंभ होने जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि को भाद्रपद नक्षत्र होने से यह नाम पड़ा है।
यह महीना भगवान विष्णु के हृषिकेश स्वरूप को पूरी तरह समर्पित माना जाता है। लोगों को मानसिक शांति मिलती है और उनके घर में खुशहाली का आगमन होता है। आइए जानें इस साल भाद्रपद कब से शुरू हो रहा है और इस दौरान कौन से शुभ योग बन रहे हैं।
Bhadrapada Month
सनातन परंपरा में भादों महीने का मतलब
'भाद्र' का अर्थ 'कल्याणकारी' और 'पद' का अर्थ 'चरण' होता है, जिसका मतलब है कल्याणकारी फल देने वाला समय। यह महीना भक्ति और संयम का प्रतीक है। इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण (जन्माष्टमी) और विघ्नहर्ता श्री गणेश (गणेश चतुर्थी) का जन्म हुआ था। इसलिए इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है।
मौसम के हिसाब से यह वर्षा ऋतु का मध्य समय होता है। आयुर्वेद के मुताबिक, इस दौरान पाचन तंत्र धीमा रहता है, इसलिए भादों में सात्विक जीवन, व्रत-जप और संयमित खान-पान का विधान बनाया गया है। इस पूरे महीने में स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस माह में किया गया जप-तप फलदायी होता है।
Bhadrapada Month 2026:29 अगस्त से शुरू होगा भाद्रपद मास, जानें डेट, पर्व और धार्मिक महत्व - Bhadrapada Month 2026 Know The Start And End Dates And Its Religious Significance - Amar Ujala Hindi News Live
भाद्रपद माह 2026 की शुरुआत
शास्त्रों के मुताबिक, सनातन धर्म में उदयातिथि की मान्यता को सबसे ऊपर माना जाता है। इसलिए उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद का शुभारंभ 29 अगस्त शनिवार को होगा। वहीं इस महीने का समापन भाद्रपद पूर्णिमा के दिन 26 सितंबर 2026 को होगा।
इस तरह साल 2026 में भाद्रपद का यह पवित्र महीना कुल 29 दिनों का रहेगा। 29 दिनों के इस महीने में साधकों को पूजा-अर्चना के कई शुभ अवसर मिलेंगे। हर दिन भगवान की भक्ति करके जीवन को सुखी बनाया जा सकता है।
पहले ही दिन त्रिपुष्कर योग का संयोग
इसका समापन अगले दिन 30 अगस्त को तड़के सुबह 03:42 बजे पर होने वाला है। ज्योतिष शास्त्र में त्रिपुष्कर योग को बहुत ही ज्यादा फलदायी और शुभ माना गया है। इस योग में किए गए किसी भी शुभ काम का फल तीन गुना मिलता है।
इसके अलावा इस दिन सुबह के समय सुकर्मा और धृति योग भी बन रहे हैं। सुकर्मा योग सुबह 06:36 बजे तक रहेगा, जिसके बाद धृति योग शुरू होगा। ये दोनों ही योग धार्मिक कार्यों के लिए बेहद उत्तम और मंगलकारी माने जाते हैं। इन शुभ योगों में पूजा करने से मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी होती हैं।
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भाद्रपद के पहले दिन का पंचांग
प्रतिपदा के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई भी नया या शुभ काम शुरू किया जा सकता है। हालांकि इस दिन पूरे समय पंचक का प्रभाव भी बना रहने वाला है।
राहुकाल का समय सुबह 09:10 बजे से लेकर 10:46 बजे तक बना रहेगा। राहुकाल के समय में कोई भी नया या मांगलिक काम करने से बचना चाहिए। अभिजीत मुहूर्त में ही शुभ काम करना हर तरह से सही रहता है।
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किन देवी-देवताओं की होती है पूजा
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को पूरे देश में जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं। वहीं भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी से दस दिनों का गणेशोत्सव बड़े धूम-धाम से शुरू होता है।
इस पूरे महीने में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और गणेश जी की आराधना करनी चाहिए। सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित करने से स्वास्थ्य हमेशा बहुत अच्छा बना रहता है। सच्चे मन से की गई भक्ति से जीवन के सारे संकट तुरंत दूर हो जाते हैं। व्यक्ति को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रावण-भाद्रपद मास
भाद्रपद महीने के नियम और सावधानियां
इस मौसम में पाचन तंत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है, इसलिए हल्का खाना खाएं।सात्विक जीवनशैली का पालन करते हुए लहसुन और प्याज से पूरी तरह परहेज रखें। किसी भी व्यक्ति को कड़वे शब्द न कहें और मन में शांति बनाए रखें।
इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने से बहुत लाभ मिलता है। अगर नदी जाना संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। जरूरतमंद लोगों को अनाज, कपड़े और तिल का दान करना बेहद फलदायी होता है। इन नियमों का पालन करने से व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक ऊर्जा मिलती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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