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मराठी और कोंकणी हिंदुओं के लिए गुड़ी पड़वा बहुत खास है। यह पर्व नई उम्मीदों और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इसी दिन नया साल शुरू होता है।
इस साल यह त्योहार 19 मार्च को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। चैत्र माह के पहले दिन ही मराठी नववर्ष मनाया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि बनाई थी।
इसे दुनिया की शुरुआत का पहला दिन भी कहते हैं। आइए साल 2026 की सटीक तारीख और मुहूर्त जानते हैं।
2026 में गुड़ी पड़वा कब है?
द्रिक पंचांग (Drik Panchang) और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 में गुड़ी पड़वा का पर्व 19 मार्च 2026, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का भी शुभारंभ होगा और मराठी शक सम्वत 1948 की शुरूआत होगी।
तिथि और समय
प्रतिपदा तिथि का आरंभ: 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे से।
प्रतिपदा तिथि का समापन: 20 मार्च 2026 को सुबह 04:52 बजे तक।
उदया तिथि के अनुसार, 19 मार्च को ही संपूर्ण भारत में गुड़ी पड़वा का उत्सव मनाया जाना शास्त्रसम्मत है।
19 मार्च 2026 के शुभ मुहूर्त
किसी भी शुभ कार्य या गुड़ी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Auspicious Timing) का विशेष महत्व होता है। 19 मार्च 2026 के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
| मुहूर्त का नाम | समय (Time) |
| ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat) | प्रात: काल 04:51 से 05:38 तक |
| अभिजित मुहूर्त (Abhijit Muhurat) | दोपहर 12:04 से 12:53 तक |
| विजय मुहूर्त (Vijay Muhurat) | दोपहर 02:29 से 03:18 तक |
| सायाह्न सन्ध्या (Evening Prayer) | शाम 06:31 से 07:43 तक |
| सूर्योदय (Sunrise) | सुबह 06:26 बजे |
साढ़े तीन मुहूर्त में से एक है गुढ़ी पड़वा
हिंदू धर्म में कुछ ऐसे विशेष दिन होते हैं जिन्हें साढ़े तीन मुहूर्त कहा जाता है। इन दिनों को इतना शुभ माना जाता है कि किसी भी नए काम की शुरुआत करने के लिए अलग से पंचांग या मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं पड़ती। इन्हीं शुभ दिनों में से एक गुढ़ी पड़वा है।
साढ़े तीन मुहूर्त कौन-कौन से होते हैं?
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा / हिंदू नववर्ष)
- अक्षय तृतीया
- विजयादशमी (दशहरा)
- दीपावली का आधा मुहूर्त – बलिप्रतिपदा या गोवर्धन पूजा
इन्हें “तीन पूरे और एक आधा” शुभ मुहूर्त माना जाता है, इसलिए इन्हें साढ़े तीन मुहूर्त कहा जाता है।
क्यों जरूरी है गुड़ी पड़वा मनाना
स्वास्थ्य लाभ: गुड़ी पड़वा पर नीम के पत्ते और गुड़ का सेवन किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, चैत्र के महीने में नीम का सेवन रक्त शुद्ध करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
सकारात्मक ऊर्जा: घर के बाहर 'गुड़ी' (विजय पताका) फहराने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि (Prosperity) का प्रवेश होता है।
कैसे मनाए गुड़ी पड़वा
मराठी नववर्ष (Marathi New Year) के पहले दिन की शुरुआत कुछ विशेष रीति-रिवाजों के साथ होती है।
तेल-स्नान और शुद्धि (Oil Bath and Purification)
परंपरा के अनुसार, इस दिन सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तिल के तेल (Sesame Oil) या अन्य सुगंधित तेल की मालिश की जाती है और नहाया जाता है। इसे 'अभ्यंग स्नान' कहा जाता है, जो तन और मन को शुद्ध करता है। इसके बाद नए कपड़े पहने जाते हैं।
गुड़ी फहराना
घर के मुख्य द्वार या बालकनी में 'गुड़ी' फहराई जाती है। एक लंबी लकड़ी या बांस के ऊपर सुंदर जरी वाले कपड़े (अक्सर पीला या हरा) बांधा जाता है। उसके ऊपर तांबे या चांदी का लोटा उल्टा रखा जाता है और उसे नीम की टहनियों, आम के पत्तों और शक्कर की माला (गाठी) से सजाया जाता है।
विशेष प्रसाद
गुड़ी पड़वा के दिन नीम की पत्तियों, गुड़, इमली और नमक से बना विशेष मिश्रण खाया जाता है। यह जीवन के सुख-दुख (Sweet and Bitter experiences) को समान भाव से स्वीकार करने का संदेश देता है।
भारत के अन्य हिस्सों में गुड़ी पड़वा
यह त्योहार केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। भारत की सांस्कृतिक विविधता (Cultural Diversity) के कारण इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
उगादी (Ugadi): कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे नए साल के रूप में इसी दिन मनाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri): उत्तर भारत में इसी दिन से देवी दुर्गा जी की पूजा के नौ दिन शुरू होते हैं।
विक्रम संवत (Vikram Samvat): इस दिन से हिंदू नववर्ष का नया पंचांग शुरू होता है।
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