MP का ये गांव जहां रंगों से नहीं, दिलों से खेली जाती है होली

मध्य प्रदेश के चोली गांव में होली के दिन रंग नहीं खेले जाते, बल्कि दुखी परिवारों के साथ सांत्वना साझा की जाती है। वहीं, अगले दिन पूरे गांव में धूमधाम से होली मनाई जाती है।

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Kaushiki
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Holi 2026: भारत में होली का पर्व हर जगह धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के चोली गांव में यह त्यौहार कुछ अलग तरीके से मनाया जाता है।

इस गांव में होली के दिन कोई रंगों से खेलता नहीं है। यहां की एक प्राचीन परंपरा के मुताबिक, लोग इस दिन शांति से दुख और दर्द को साझा करते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जो गांव के बुजुर्गों ने शुरू की थी।

चोली गांव, जिसे देवगढ़ के नाम से भी जाना जाता है, विंध्याचल पर्वत की तलहटी में स्थित है और यह ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि, यहां पर होली के दिन कोई भी रंग नहीं खेलता है। बल्कि प्राचीन परंपरा के मुताबिक, इस दिन का उद्देश्य दुखों को साझा करना और एक-दूसरे के दुःख में साझेदार बनना होता है।

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दुख बांटने की परंपरा

प्राचीन परंपरा के मुताबिक, एमपी के चोली गांव में होली के दिन कोई उत्सव नहीं मनाया जाता है। इस दिन गांव के लोग उन परिवारों के पास जाते हैं, जिन्होंने हाल ही में किसी प्रियजन को खोया है। वे उन्हें गुलाल लगाकर सांत्वना देते हैं और उनके दुख में सहभागी बनते हैं। यह परंपरा आपसी भाईचारे और सहानुभूति को बढ़ावा देती है।

यहां के लोग मानते हैं कि होली सिर्फ खुशियां मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के साथ खड़े होने का मौका है जो दुख से जूझ रहे हैं। इस परंपरा से यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी परिवार त्योहार की खुशी से वंचित न रहे।

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अगले दिन होती है रंगों वाली होली

इस गांव में होली की परंपरा का एक और दिलचस्प पहलू है। यहां जब लोग दुखों को बांटने के बाद सांत्वना दे चुके होते हैं, तब अगले दिन पूरे गांव में होली खेली जाती है।

यह दिन उल्लास और खुशी से भरा होता है, जहां लोग एक-दूसरे पर रंग लगाकर होली की परंपरा निभाते हैं। यह परंपरा यह सुनिश्चित करती है कि गांव के सभी लोग त्योहार की खुशी का अनुभव कर सकें, खासकर वे परिवार जिनके जीवन में हाल ही में कोई दुखद घटना घटी हो।

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होली का ऐतिहासिक महत्व

होली का त्योहार भगवान श्री कृष्ण और भक्त प्रह्लाद की कथाओं से जुड़ा हुआ है। भारत में होली का त्यौहार रंगों से खेला जाता है, जो वसंत ऋतु के आगमन की खुशी को दर्शाता है।

होली (Holi festival) का उद्देश्य न केवल आनंद और उल्लास है, बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को भी मजबूत करता है। चोली गांव की परंपरा यह सिद्ध करती है कि होली का उद्देश्य सिर्फ रंगों में रंगना नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन के कठिन समय में एक-दूसरे के साथ खड़ा होने का भी है।

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