किन 5 लोगों को नहीं देखनी चाहिए होलिका दहन, जानें इसके पीछे का राज

होलिका दहन 3 मार्च 2026 को है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक नई दुल्हन, गर्भवती महिलाओं और इकलौती संतान के माता-पिता को होलिका की अग्नि नहीं देखनी चाहिए।

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Kaushiki
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Latest Religious News: रंगों का पावन त्योहार होली अब बेहद करीब आ चुका है। हिंदू धर्म में होली का उत्सव दो दिनों तक मनाया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होलिका दहन होता है। इस साल होलिका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार को किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि के समय भद्रा रहित काल में ही दहन करना शास्त्र सम्मत है।

स्थानीय पंचांग के मुताबिक शुभ मुहूर्त शाम के समय शुरू होगा। लोग चौराहों पर एकत्रित होकर विधि-विधान से अग्नि का पूजन करते हैं। लेकिन शास्त्रों और लोक मान्यताओं में अग्नि दर्शन के कुछ कड़े नियम हैं। शास्त्रों के मुताबिक, कुछ विशेष लोगों के लिए होलिका की अग्नि देखना वर्जित माना गया है। आइए जानें होलिका दहन देखें या नहीं...

नई दुल्हन का होलिका दहन से संबंध

शादी के बाद पहली होली पर नई दुल्हन अक्सर मायके चली जाती है। हिंदू परंपरा के मुताबिक, नई दुल्हन को ससुराल में होलिका पूजन नहीं देखना चाहिए। इसके पीछे एक प्राचीन पौराणिक कथा छिपी हुई है।

होलिका का विवाह इलोजी नाम के राजकुमार से तय हो चुका था। लेकिन विवाह से ठीक पहले होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई थी। राजकुमार की मां अपनी होने वाली बहू की चिता देखकर अत्यंत दुखी हुई। तब से नई दुल्हन का जलती हुई होलिका देखना अशुभ माना जाता है।

रिश्तों पर पड़ता है असर

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, होलिका पूजन (Holika Dahan) देखते समय सास और बहू को कभी साथ नहीं खड़ा होना चाहिए। उनके बीच दूरी होना बहुत जरूरी माना जाता है।

कहते हैं कि साथ अग्नि देखने से रिश्तों में भारी खटास आती है। इससे घर में आपसी मतभेद और क्लेश बढ़ने की संभावना रहती है। परिवार की सुख-शांति के लिए इस परंपरा का पालन किया जाता है। घर की खुशहाली के लिए दोनों को अलग-अलग समय पर पूजन करना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं के लिए नियम

जिन माता-पिता की केवल एक ही संतान है, उन्हें भी होलिका पूजन देखने से परहेज करना चाहिए। उन्हें होलिका पूजन की जलती हुई अग्नि को सीधे नहीं देखना चाहिए।

पौराणिक कथा के मुताबिक, प्रह्लाद अपने पिता की इकलौती संतान ही थे। साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी इस अनुष्ठान से दूर रखा जाता है।

वैज्ञानिक नजरिए से अग्नि का तेज ताप गर्भ के लिए ठीक नहीं होता। धुएं से सांस लेने में तकलीफ होने का डर भी बना रहता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को परिक्रमा करने से भी मना किया जाता है।

नवजात शिशुओं की सुरक्षा

छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं को दहन स्थल पर ले जाना वर्जित है। मान्यताओं के मुताबिक, चौराहों पर होलिका दहन के समय नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है। नवजात शिशु बहुत कोमल होते हैं और उन पर बुरा असर पड़ सकता है।

तंत्र-मंत्र की क्रियाओं के डर से भी बच्चों को घर में रखा जाता है। अग्नि की लपटों और शोर से बच्चे डर भी सकते हैं। सुरक्षित रहने के लिए बच्चों को घर के अंदर रखना ही बेहतर है।

होलिका दहन की भस्म का महत्व

शास्त्रों के मुताबिक, होलिका दहन के अगले दिन उसकी ठंडी राख घर लाना शुभ होता है। इस राख या भस्म को माथे पर लगाने से नकारात्मकता दूर होती है।

कई लोग इस भस्म को घर के कोनों में भी छिड़कते हैं। इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। परंपराओं का सम्मान करने से त्योहार की खुशियां कई गुना बढ़ जाती हैं। आप सभी को होली और होलिका दहन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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