कल से शुरू होगा भक्ति और शक्ति का महीना, जानें माघ मास 2026 के त्योहार

माघ मास 4 जनवरी 2026 से शुरू होगा, जिसमें संगम स्नान, कल्पवास और दान-पुण्य से मोक्ष मिलता है। मकर संक्रांति और बसंत पंचमी इस माह के मुख्य पर्व हैं।

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Kaushiki
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Latest Religious News:हिंदू पंचांग के मुताबिक, माघ का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में माघ मास की शुरुआत 4 जनवरी से होने जा रही है। इस पूरे महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।

ये महीना हमें संयम, सेवा और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देता है। शास्त्रों में इस माह को भगवान विष्णु और सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला बताया गया है।

प्रयागराज के संगम तट पर पवित्र नदियों में स्नान करना इस महीने की सबसे बड़ी विशेषता है। आइए, जानते हैं माघ मास के प्रमुख त्योहारों की सूची और इससे जुड़े जरूरी धार्मिक नियम।

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माघ मास के प्रमुख व्रत-त्योहार

माघ के महीने में कई बड़े त्योहार आते हैं जो हमारे जीवन में खुशियां लाते हैं।

  • संकष्टी चतुर्थी (6 जनवरी): इस दिन भगवान गणेश की पूजा से सभी दुख और संकट दूर होते हैं।

  • मकर संक्रांति (14 जनवरी): सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दान-पुण्य के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

  • षटतिला एकादशी (14 जनवरी): इस दिन तिल का छह तरह से उपयोग करने पर पापों का नाश होता है।

  • मासिक शिवरात्रि (16 जनवरी ): कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत और शिव की विशेष कृपा पाने के लिए मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी।

  • मौनी अमावस्या (18 जनवरी): इस दिन मौन रहकर संगम में स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है।

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  • बसंत पंचमी (23 जनवरी): यह दिन विद्या की देवी माँ सरस्वती की विशेष पूजा के लिए समर्पित है।

  • जया एकादशी (29 जनवरी): इस व्रत को रखने से व्यक्ति को पिशाच योनि से मुक्ति मिल जाती है।

  • प्रदोष व्रत ( 30 जनवरी): माघ माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत रखा जाएगा, जो सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए शुभ है।

  • माघ पूर्णिमा (1 फरवरी): पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करने से जन्म-मरण के बंधन टूट जाते हैं।

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मोक्ष प्राप्ति का सरल मार्ग

माघ के महीने में प्रयागराज के संगम तट पर कल्पवास (माघ मेला 2026) की प्राचीन परंपरा है। कल्पवास का अर्थ है ईश्वर के समीप रहकर कठिन अनुशासन के साथ सात्विक जीवन जीना। संगम में गंगा, यमुना और सरस्वती के मिलन स्थल पर स्नान करना महान पुण्यकारी है।

मान्यता है कि यहां स्नान करने से करोड़ों यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है। साधु-संत और भक्त पूरे महीने रेतीले तट पर रहकर जप और तप करते हैं। माघ का महीना मनुष्य को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाला होता है।

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माघ महीने का महत्व

हिंदू धर्म में माघ का महीना भक्ति, शुद्धि और दान-पुण्य के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस महीने का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इस दौरान सूर्य देव उत्तरायण की ओर बढ़ते हैं, जिससे प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, माघ के महीने में सभी पवित्र नदियों का जल अमृत के समान हो जाता है। सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या संगम में स्नान करने से इंसान के पुराने पाप धुल जाते हैं। उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

माघ महिना में सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करने का बहुत बड़ा महत्व है। तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य देने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। इस महीने में तिल, गुड़, कंबल और गर्म कपड़ों का दान अवश्य करना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि इस माह में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

इस समय किया गया तिल और गर्म कपड़ों का दान कई गुना अधिक फल देता है। यह महीना हमें कठिन अनुशासन, सात्विक भोजन और शांत मन के साथ जीना सिखाता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

FAQ

वर्ष 2026 में माघ मास कब से कब तक रहेगा?
हिंदू कैलेंडर के मुताबिक माघ मास 4 जनवरी 2026 को शुरू होगा। इसका समापन 1 फरवरी 2026 को माघ पूर्णिमा के पवित्र स्नान के साथ होगा।
माघ मास में संगम स्नान का इतना अधिक महत्व क्यों बताया गया है?
शास्त्रों के मुताबिक, माघ में सभी देवी-देवता संगम तट पर निवास करते हैं। यहां स्नान करने से सभी ज्ञात-अज्ञात पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है।
क्या माघ मास में दान करना जरूरी है?
नहीं जरूरी नहीं है। लेकिन इस माह में दान करना बहुत ही पुण्यदायी माना गया है। विशेषकर तिल, अन्न और गर्म कपड़ों का दान जीवन में समृद्धि और शांति लाता है।

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