पोंगल से खिचड़ी तक, जानें भारत में मकर संक्रांति मनाने के तरीके

मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं। भारत में इसे पोंगल, लोहड़ी और खिचड़ी जैसे विभिन्न नामों से उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।

author-image
Kaushiki
New Update
makar sankranti 2026
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

भारत में त्योहारों का अपना ही एक अलग रंग और गहरा आध्यात्मिक महत्व होता है। इन्हीं पर्वों में सबसे प्रमुख है मकर संक्रांति, जो सूर्य देव की उपासना का महापर्व है। मकर संक्रांति भारत का एक ऐसा त्योहार है जो खगोलीय घटना पर आधारित है।

सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करते ही अंधकार कम और प्रकाश बढ़ने लगता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, उत्तरायण का समय देवताओं का दिन माना जाता है। इस पावन अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान और अन्न दान का विशेष महत्व है।

इस दिन से सूर्य उत्तरायण होकर उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हैं। इसी के साथ धरती पर शुभ दिनों की शुरुआत और मांगलिक कार्यों का आरंभ होता है। उत्तर से दक्षिण तक, भारत के हर कोने में इसकी छटा बिल्कुल निराली होती है। आइए जानें...

ये खबर भी पढ़ें... वृश्चिक संक्रांति पर इस तरह करें सूर्य देव को प्रसन्न, इस शुभ मुहूर्त में करें स्नान और दान

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं खिचड़ी? जानें दाल,  चावल और हल्दी का ग्रहों से कनेक्शन | Khichdi on Makar Sankranti Religious  and Planetary Significance Explored

उत्तर भारत की खिचड़ी और दान की महिमा

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और बिहार में इस त्योहार को मुख्य रूप से खिचड़ी कहा जाता है। इस दिन उड़द दाल और चावल की खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाते हैं। लोग नदियों में स्नान के बाद ब्राह्मणों को तिल, गुड़ और कंबल दान करते हैं।

माना जाता है कि खिचड़ी खाने से कुंडली के नवग्रह शांत और शुभ होते हैं। प्रयागराज के माघ मेले में इस दिन लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में डुबकी लगाते हैं।

Pongal 2021: क्यों मनाया जाता है पोंगल का त्योहार? जानें इसका महत्व - pongal  2021 date time significance puja vidhi tlifd - AajTak

दक्षिण भारत का पोंगल और किसानों का उत्साह

तमिलनाडु में यह पर्व चार दिनों तक चलने वाले पोंगल उत्सव के रूप में मनाते हैं। किसान अपनी नई फसल के आगमन पर प्रकृति और सूर्य देव का आभार जताते हैं। घर के बाहर मिट्टी के बर्तन में नए चावल और दूध का पोंगल बनाया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पोंगल का उबाल आना परिवार में समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। लोग अपने पशुओं, विशेषकर बैलों की पूजा करते हैं और उन्हें सजाते हैं।

ये खबर भी पढ़ें... मकर संक्रांति के बाद बनेगा रूचक महापुरुष राजयोग, चमकेगा इन राशियों का भाग्य

भारत में कार्यक्रम और त्यौहार | पर्यटन मंत्रालय की एक पहल

पंजाब की लोहड़ी

पंजाब और हरियाणा में संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाते हैं। शाम को पवित्र अग्नि जलाकर उसमें तिल, रेवड़ी, मूंगफली और मक्का अर्पित करते हैं। लोग ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्धा कर खुशियों का इजहार करते हैं। 

उत्तरायण 2017: गुजरात में इस तरह मनाया जाता है यह त्यौहार | India.com

गुजरात का उत्तरायण

वहीं, गुजरात में इसे उत्तरायण कहते हैं। यहां आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। पतंग उड़ाना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सूर्य की रोशनी में समय बिताने का तरीका है।

ये खबर भी पढ़ें...मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक, जानें जनवरी 2026 व्रत त्योहार लिस्ट

When Is Magh Bihu In The Year 2025 - इस साल का बिहू इस दिन, जानिए शुभ  मुहूर्त और भारतीय संस्कृति में इसका महत्व| Navbharat Live

पूर्वोत्तर का बिहू

असम में इस समय माघ बिहू या भोगली बिहू का उत्सव मनाया जाता है। यहां लोग मेजी (अग्नि कुंड) जलाकर सामूहिक भोज और पारंपारिक नृत्यों का आनंद लेते हैं। 

मकर संक्रांति - Wikiwand

अन्य क्षेत्रीय नाम

कर्नाटक में इसे सुग्गी हब्बा और केरल में मकरविलक्कू के नाम से जाना जाता है। संक्रांति (मकर संक्रांति का महत्व) का ये पर्व विदेशों जैसे नेपाल, थाईलैंड और म्यांमार में भी मनाया जाता है। यह त्योहार अखंड भारत की सांस्कृतिक एकता और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

FAQ

मकर संक्रांति हर साल 14 या 15 जनवरी को ही क्यों आती है?
मकर संक्रांति का पर्व सूर्य की गति के आधार पर अंग्रेजी कैलेंडर से तय होता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के समय के मुताबिक तारीख में बदलाव होता है। अधिकतर यह 14 जनवरी को पड़ता है लेकिन खगोलीय गणना से यह 15 भी हो सकता है।
इस दिन तिल और गुड़ खाने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है?
धार्मिक रूप से तिल का दान और सेवन कष्टों को दूर करने वाला माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से, सर्दियों में तिल और गुड़ शरीर को जरूरी गर्मी प्रदान करते हैं। यह मेल सेहत के लिए वरदान है और रिश्तों में मिठास का संदेश देता है।
मकर संक्रांति को 'खिचड़ी' के रूप में क्यों मनाया और खाया जाता है?
उत्तर भारत में इस दिन चावल, दाल, हल्दी और नमक की खिचड़ी खाने की परंपरा है। यह व्यंजन सुपाच्य होता है और ग्रहों की शांति के लिए उत्तम माना गया है। खिचड़ी के माध्यम से नए अन्न का सम्मान और दान का संदेश दिया जाता है।

ये खबर भी पढ़ें...घर में सुख शांति के लिए पूर्णिमा 2026 पर ऐसे करें चंद्रमा-सूर्य की पूजा

Makar Sankranti मकर संक्रांति मकर संक्रांति का महत्व उत्तर भारत पोंगल सूर्य उत्तरायण उत्तरायण
Advertisment