/sootr/media/media_files/2026/01/08/makar-sankranti-2026-2026-01-08-13-13-07.jpg)
भारत में त्योहारों का अपना ही एक अलग रंग और गहरा आध्यात्मिक महत्व होता है। इन्हीं पर्वों में सबसे प्रमुख है मकर संक्रांति, जो सूर्य देव की उपासना का महापर्व है। मकर संक्रांति भारत का एक ऐसा त्योहार है जो खगोलीय घटना पर आधारित है।
सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करते ही अंधकार कम और प्रकाश बढ़ने लगता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, उत्तरायण का समय देवताओं का दिन माना जाता है। इस पावन अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान और अन्न दान का विशेष महत्व है।
इस दिन से सूर्य उत्तरायण होकर उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हैं। इसी के साथ धरती पर शुभ दिनों की शुरुआत और मांगलिक कार्यों का आरंभ होता है। उत्तर से दक्षिण तक, भारत के हर कोने में इसकी छटा बिल्कुल निराली होती है। आइए जानें...
/sootr/media/post_attachments/wp-content/uploads/2026/01/s-651031.jpg)
उत्तर भारत की खिचड़ी और दान की महिमा
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और बिहार में इस त्योहार को मुख्य रूप से खिचड़ी कहा जाता है। इस दिन उड़द दाल और चावल की खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाते हैं। लोग नदियों में स्नान के बाद ब्राह्मणों को तिल, गुड़ और कंबल दान करते हैं।
माना जाता है कि खिचड़ी खाने से कुंडली के नवग्रह शांत और शुभ होते हैं। प्रयागराज के माघ मेले में इस दिन लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में डुबकी लगाते हैं।
/sootr/media/post_attachments/aajtak/images/story/202101/pongal_2021-sixteen_nine-416027.jpg?size=948:533)
दक्षिण भारत का पोंगल और किसानों का उत्साह
तमिलनाडु में यह पर्व चार दिनों तक चलने वाले पोंगल उत्सव के रूप में मनाते हैं। किसान अपनी नई फसल के आगमन पर प्रकृति और सूर्य देव का आभार जताते हैं। घर के बाहर मिट्टी के बर्तन में नए चावल और दूध का पोंगल बनाया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पोंगल का उबाल आना परिवार में समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। लोग अपने पशुओं, विशेषकर बैलों की पूजा करते हैं और उन्हें सजाते हैं।
ये खबर भी पढ़ें... मकर संक्रांति के बाद बनेगा रूचक महापुरुष राजयोग, चमकेगा इन राशियों का भाग्य
/sootr/media/post_attachments/public/uploads/event_cover_image/event_602/16595155611269959693-651069.jpg)
पंजाब की लोहड़ी
पंजाब और हरियाणा में संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाते हैं। शाम को पवित्र अग्नि जलाकर उसमें तिल, रेवड़ी, मूंगफली और मक्का अर्पित करते हैं। लोग ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्धा कर खुशियों का इजहार करते हैं।
/sootr/media/post_attachments/wp-content/uploads/2018/08/kite-fest1-1-466702.jpg)
गुजरात का उत्तरायण
वहीं, गुजरात में इसे उत्तरायण कहते हैं। यहां आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। पतंग उड़ाना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सूर्य की रोशनी में समय बिताने का तरीका है।
ये खबर भी पढ़ें...मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक, जानें जनवरी 2026 व्रत त्योहार लिस्ट
/sootr/media/post_attachments/wp-content/uploads/2025/01/OSE-2025-01-08T200550.328_V_jpg--442x260-4g-466221.webp?sw=412&dsz=442x260&iw=392&p=false&r=2.625)
पूर्वोत्तर का बिहू
असम में इस समय माघ बिहू या भोगली बिहू का उत्सव मनाया जाता है। यहां लोग मेजी (अग्नि कुंड) जलाकर सामूहिक भोज और पारंपारिक नृत्यों का आनंद लेते हैं।
![]()
अन्य क्षेत्रीय नाम
कर्नाटक में इसे सुग्गी हब्बा और केरल में मकरविलक्कू के नाम से जाना जाता है। संक्रांति (मकर संक्रांति का महत्व) का ये पर्व विदेशों जैसे नेपाल, थाईलैंड और म्यांमार में भी मनाया जाता है। यह त्योहार अखंड भारत की सांस्कृतिक एकता और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
ये खबर भी पढ़ें...घर में सुख शांति के लिए पूर्णिमा 2026 पर ऐसे करें चंद्रमा-सूर्य की पूजा
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us