भीम ने क्यों रखा था निर्जला एकादशी का कठिन व्रत, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें
Kaushiki | May 29, 2026, 15:24 IST
Nirjala Ekadashi 2026
साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत आज (25 जून) रखा जाएगा। यह सभी एकादशियों में सबसे कठिन और पुण्यदायी मानी जाती है। इस दिन रवि योग का खास संयोग बन रहा है। जानिए पौराणिक कथा, पूजा मुहूर्त, क्या करें और क्या न करें।
Nirjala Ekadashi: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी माना गया है। साल 2026 में ये व्रत 25 जून, गुरुवार को है। इस विशेष दिन पर रवि योग का बेहद शुभ संयोग भी बन रहा है।
इससे भगवान विष्णु की पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन तक अन्न और पानी का पूरी तरह त्याग किया जाता है। आइए पंडित संतोष शर्मा के मुताबिक जानें पूजा का उत्तम समय और व्रत के जरूरी नियम।
![Nirjala Ekadashi 2024: निर्जला एकादशी पर आज इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, जानें दिव्य उपाय और पारण का समय - Nirjala Ekadashi 2024 significance shubh muhurt pujan vidhi dos and donts]()
हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, इस साल निर्जला एकादशी पर बहुत ही शुभ संयोग बन रहे हैं। एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 06:12 बजे से हो जाएगी। इसका समापन अगले दिन 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे होगा।
उदया तिथि के नियम के कारण 25 जून को ही व्रत रखना सही रहेगा। इस दिन पूजा का सबसे सही समय सुबह 10:39 बजे से दोपहर 02:09 बजे तक है। इस दिन रवि योग का एक बेहद शुभ संयोग भी बन रहा है।
ये शुभ योग सुबह 05:25 बजे से शुरू होकर शाम 04:29 बजे तक रहेगा। व्रत का पारण यानी व्रत खोलने का समय अगले दिन द्वादशी तिथि को होता है। इसके लिए 26 जून 2026, शुक्रवार का दिन तय किया गया है। व्रत खोलने का शुभ समय सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे तक रहेगा।
![Nirjala Ekadashi]()
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, महाभारत काल में भीमसेन को बहुत ज्यादा भूख लगती थी। वे कोई व्रत नहीं कर पाते थे क्योंकि वे अपनी भूख बर्दाश्त नहीं कर सकते थे।
इस बात से वे हमेशा बहुत परेशान रहते थे। भीम ने अपनी इस समस्या का समाधान पाने के लिए महर्षि वेदव्यास जी से संपर्क किया। भीम ने कहा कि वे हर महीने आने वाली दोनों एकादशियों का व्रत नहीं रख सकते। उन्होंने कोई एक आसान उपाय पूछा।
तब व्यास जी ने भीम को ज्येष्ठ मास की इस निर्जला एकादशी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस एक दिन बिना पानी पिए व्रत रखना होता है। इसे रखने से साल की सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।
व्यास जी की बात मानकर भीम ने पूरी निष्ठा से यह कठिन व्रत रखा। इसी कारण से इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत मोक्ष दिलाने वाला माना गया है।
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निर्जला एकादशी की
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की सफाई करें और स्नान करें। इसके बाद पीले रंग के साफ कपड़े पहनकर सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर हाथ में जल लेकर व्रत रखने का सच्चा संकल्प लें।
घर के मंदिर में एक छोटी चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति रखें। उन्हें पीले फूल, पीले फल, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान के सामने घी का एक दीपक जरूर जलाएं। भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते बहुत प्रिय हैं, इसलिए भोग में इसे जरूर रखें।
इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या उनके मंत्रों का जाप करें। शाम को भी भगवान की आरती करें। अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद गरीबों को दान दें और फिर जल पीकर व्रत खोलें।
निर्जला एकादशी व्रत के दिन कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक अन्न और जल का त्याग करें।
गलती से भी पानी न पिएं। इस दिन घर में पूरी तरह शांति का माहौल रखें और किसी पर गुस्सा न करें। भगवान के भजनों में अपना मन लगाएं और रात को जागरण करने का प्रयास करें। किसी की बुराई करने से भी बचें।
गर्मी का मौसम होने के कारण इस दिन ठंडी चीजों का दान करना चाहिए। पानी से भरा घड़ा, छाता, पंखा, खरबूजा और अनाज का दान महापुण्यदायी होता है। इस दिन चावल और भारी भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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इससे भगवान विष्णु की पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन तक अन्न और पानी का पूरी तरह त्याग किया जाता है। आइए पंडित संतोष शर्मा के मुताबिक जानें पूजा का उत्तम समय और व्रत के जरूरी नियम।
Nirjala Ekadashi 2024: निर्जला एकादशी पर आज इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, जानें दिव्य उपाय और पारण का समय - Nirjala Ekadashi 2024 significance shubh muhurt pujan vidhi dos and donts
कब है निर्जला एकादशी
उदया तिथि के नियम के कारण 25 जून को ही व्रत रखना सही रहेगा। इस दिन पूजा का सबसे सही समय सुबह 10:39 बजे से दोपहर 02:09 बजे तक है। इस दिन रवि योग का एक बेहद शुभ संयोग भी बन रहा है।
ये शुभ योग सुबह 05:25 बजे से शुरू होकर शाम 04:29 बजे तक रहेगा। व्रत का पारण यानी व्रत खोलने का समय अगले दिन द्वादशी तिथि को होता है। इसके लिए 26 जून 2026, शुक्रवार का दिन तय किया गया है। व्रत खोलने का शुभ समय सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे तक रहेगा।
Nirjala Ekadashi
निर्जला एकादशी सभी एकादशियों में सबसे जरूरी क्यों है
इस बात से वे हमेशा बहुत परेशान रहते थे। भीम ने अपनी इस समस्या का समाधान पाने के लिए महर्षि वेदव्यास जी से संपर्क किया। भीम ने कहा कि वे हर महीने आने वाली दोनों एकादशियों का व्रत नहीं रख सकते। उन्होंने कोई एक आसान उपाय पूछा।
तब व्यास जी ने भीम को ज्येष्ठ मास की इस निर्जला एकादशी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस एक दिन बिना पानी पिए व्रत रखना होता है। इसे रखने से साल की सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।
व्यास जी की बात मानकर भीम ने पूरी निष्ठा से यह कठिन व्रत रखा। इसी कारण से इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत मोक्ष दिलाने वाला माना गया है।
Nirjala Ekadashi
निर्जला एकादशी की पूजा विधि
घर के मंदिर में एक छोटी चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति रखें। उन्हें पीले फूल, पीले फल, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान के सामने घी का एक दीपक जरूर जलाएं। भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते बहुत प्रिय हैं, इसलिए भोग में इसे जरूर रखें।
इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या उनके मंत्रों का जाप करें। शाम को भी भगवान की आरती करें। अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद गरीबों को दान दें और फिर जल पीकर व्रत खोलें।
निर्जला एकादशी पर क्या करें
गलती से भी पानी न पिएं। इस दिन घर में पूरी तरह शांति का माहौल रखें और किसी पर गुस्सा न करें। भगवान के भजनों में अपना मन लगाएं और रात को जागरण करने का प्रयास करें। किसी की बुराई करने से भी बचें।
गर्मी का मौसम होने के कारण इस दिन ठंडी चीजों का दान करना चाहिए। पानी से भरा घड़ा, छाता, पंखा, खरबूजा और अनाज का दान महापुण्यदायी होता है। इस दिन चावल और भारी भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- निर्जला एकादशी व्रत के पारण की सही तारीख क्या है?
निर्जला एकादशी के व्रत का पारण (व्रत खोलना) हमेशा अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को किया जाता है। साल 2026 में पारण की सही तारीख 26 जून, शुक्रवार है। इस दिन व्रत खोलने का सबसे शुभ समय सुबह 05:25 बजे से लेकर सुबह 08:13 बजे के बीच रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पारण के समय सबसे पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देना चाहिए। उसके बाद ही स्वयं जल ग्रहण करना चाहिए। - निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी क्यों कहा जाता है?
महाभारत काल में पांडव पुत्र भीमसेन अपनी अत्यधिक भूख के कारण साल की कोई भी एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे। इस समस्या के समाधान के लिए महर्षि वेदव्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर बिना अन्न और जल के रहने का सुझाव दिया था। भीम ने इस नियम का पालन करते हुए यह कठिन व्रत रखा, जिसके बाद उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हुआ। इसी पौराणिक कथा के कारण इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी कहा जाता है, जिसे रखने से जीवन के सभी पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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