16 जुलाई से शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, इन बातों का जरूर रखें ख्याल

Kaushiki | Jun 07, 2026, 13:51 IST
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Jagannath Rath Yatra 2026
Jagannath Rath Yatra 2026

ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा इस साल 16 जुलाई 2026 से शुरू हो रही है। भक्तों के लिए रथ की रस्सी खींचने और दर्शन करने के कुछ कड़े नियम बनाए गए हैं। जानिए यात्रा का पूरा इतिहास, महत्व और रथों की अनोखी शिल्पकला।

Jagannath Rath Yatra 2026: सनातन धर्म में पुरी की रथ यात्रा को बहुत पवित्र और बड़ा उत्सव माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी पुरी में लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। श्रीमंदिर की परंपरा के अनुसार इस साल की तारीखें भी तय हो चुकी हैं।

इस वर्ष यह रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 से मुख्य रूप से शुरू होगी। यह भव्य उत्सव 16 जुलाई से शुरू होकर 27 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस नौ दिवसीय महापर्व को लेकर देश और दुनिया में बहुत उत्साह है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जो भक्त रथ की रस्सी खींचता है उसे पुण्य मिलता है। ऐसा करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के सारे पाप पूरी तरह मिट जाते हैं। इसके साथ ही उस भक्त के लिए मोक्ष पाने का रास्ता भी खुल जाता है। आइए जानें कब निकलेगी भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के प्रसाद को क्यों कहा जाता है महाप्रसाद! क्या है  इसकी खासियत? | पुरी के जगन्नाथ मंदिर के भोग को क्यों कहा जाता है ...
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जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद

जगन्नाथ पुरी मंदिर की विशाल रसोई में बनने वाले प्रसाद का बहुत महत्व है। यहां बनने वाले विशेष भोजन को महाप्रसाद का नाम दिया गया है। इस महाप्रसाद को साक्षात ब्रह्म का रूप माना जाता है।

पौराणिक मान्यता है कि यह भोजन स्वयं माता लक्ष्मी की देखरेख में बनता है। इसलिए यात्रा के दौरान मिले इस प्रसाद को खाने से कभी मना न करें। प्रसाद का आदर करना हर सच्चे भक्त का सबसे पहला कर्तव्य है।

महाप्रसाद को कभी भी भूलकर जमीन पर नीचे नहीं गिराना चाहिए। प्रसाद पर पैर लगाना या खाने के बाद थाली में जूठा छोड़ना पाप है। इसे प्रभु का अपमान माना जाता है और यह महापाप की श्रेणी में आता है।

जगन्नाथ रथ यात्रा नियम: पुरी जगन्नाथ यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं? न  करें ये गलतियां, रूठ सकते हैं महाप्रभु - jagannath rath yatra rules dos and  donts avoid ...
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रथ खींचते समय क्या न करें

पुरी की यह पावन जगन्नाथ रथयात्रा समाज में समानता का सबसे बड़ा संदेश देती है। भगवान जगन्नाथ के पावन दरबार में कोई भी व्यक्ति अमीर या गरीब नहीं होता। भगवान की नजर में सभी भक्त पूरी तरह से एक समान होते हैं।

मान्यता है कि रथ की रस्सी को सिर्फ छू लेने से ही मोक्ष मिल जाता है। लेकिन रस्सी पकड़ने की होड़ में कभी दूसरों को चोट न पहुँचाएं। भक्तों के साथ धक्का-मुक्की करना या अपशब्द बोलना बहुत गलत बात है।

अगर आप यात्रा में गुस्सा या लड़ाई करते हैं तो आपके पुण्य नष्ट हो जाएंगे। भगवान के रथ को हमेशा मन से अपना अहंकार त्यागकर ही खींचना चाहिए। रथ खींचते समय मन में सिर्फ विनम्रता और सेवा का भाव होना जरूरी है।

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रथ यात्रा में चमड़े और तामसिक भोजन से दूरी

अगर आप रथों के बिल्कुल करीब जाकर भगवान के दर्शन करना चाहते हैं। या आप अपने हाथों से रथ की पवित्र रस्सी को खींचना चाहते हैं, तो आपको शुद्धता का ध्यान रखना होगा और कुछ जरूरी चीजों से दूर रहना होगा।

भक्तों को अपने पास चमड़े की बेल्ट या पर्स जैसी चीजें नहीं रखनी चाहिए। इसके साथ ही चमड़े के जूते और चप्पल भी पास में न रखें। इन सभी वस्तुओं को मंदिर के नियमों में पूरी तरह अशुद्ध माना गया है।

यात्रा में शामिल होने से पहले मांस और मदिरा का सेवन बिल्कुल वर्जित है। किसी भी तरह के नशीले या तामसिक पदार्थों का सेवन भूलकर भी न करें। सात्विक नियमों को तोड़ने वाले व्यक्ति पर महाप्रभु की कृपा कभी नहीं होती।

रथ यात्रा के दौरान क्या करें

रथ यात्रा के पावन समय में अपने मन और वाणी को हमेशा शुद्ध रखें। यात्रा के दौरान पूरे रास्ते निरंतर अपने मन में नाम का जाप करते रहें। मन ही मन जय जगन्नाथ या हरे कृष्ण महामंत्र बोलना बहुत शुभ होता है।

पुरी पहुंचने वाले दूर-दराज के बुजुर्गों, दिव्यांगों और बीमार लोगों की मदद करें। जुलाई के महीने में पुरी में बहुत ज्यादा उमस और भीषण गर्मी होती है। ऐसे में प्यासे श्रद्धालुओं को ठंडा पानी पिलाना अच्छा माना जाता है।

प्यासे भक्तों को पानी पिलाने की सेवा महाप्रभु जगन्नाथ को सबसे प्रिय है। जब भगवान अपने मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर पहुंच जाएं, तब वहां भी मंदिर प्रशासन और सेवाधारकों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करें।

Jagannath Rath Yatra
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क्यों निकाली जाती है जगन्नाथ रथ यात्रा

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, साल में एक बार भगवान स्वयं बाहर आते हैं। भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देने गर्भगृह से बाहर सड़क पर आते हैं। वह अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होते हैं।

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा भगवान और भक्तों के बीच के अनोखे प्रेम का बड़ा प्रतीक है। जब गरीब या बीमार भक्त खुद चलकर मुख्य मंदिर तक नहीं पहुंच पाता, तो दयालु भगवान खुद चलकर अपने भक्तों के बीच सड़क पर आ जाते हैं।

पुरी जगन्नाथ मंदिर कीपावन यात्रा का एक और मुख्य उद्देश्य भगवान का मौसी के घर जाना है। भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर यानी 'गुंडिचा मंदिर' जाते हैं। वहां भगवान अपने भाई-बहन के साथ लगभग नौ दिनों तक आराम करते हैं।

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कैसे होती है भगवान की वापसी यात्रा

नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में सुखद विश्राम करने के बाद यात्रा का अगला चरण शुरू होता है। भगवान के मुख्य मंदिर लौटने की इस यात्रा को 'बहुदा यात्रा' कहा जाता है। इस वापसी यात्रा के माध्यम से भगवान पुनः अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं।

वापसी की यह यात्रा भी उतनी ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ निकाली जाती है। भक्त फिर से भारी उत्साह के साथ भगवान के तीनों रथों को खींचते हैं। इस दौरान भी पुरी की सड़कों पर भक्तों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ता है।

भगवान जगन्नाथ का मुख्य मंदिर में वापस लौटना इस पूरे उत्सव का अंतिम चरण होता है। इसके बाद भगवान फिर से मंदिर के अंदर अपने रत्न सिंहासन पर विराजमान हो जाते हैं। इस पूरी यात्रा को देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं।

Jagannath Rath Yatra
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कैसे बनते हैं पुरी के तीनों भव्य रथ

पुरी की रथ यात्रा की सबसे अनोखी विशेषता इसके विशाल और भव्य रथ हैं। इन तीनों विशाल रथों का निर्माण हर साल बिल्कुल नए सिरे से किया जाता है। पुराने रथों की लकड़ियों का उपयोग दोबारा मुख्य रथ बनाने में नहीं होता।

इन रथों के निर्माण में एक भी लोहे की कील का उपयोग नहीं किया जाता है। कील का इस्तेमाल न होना प्राचीन भारतीय शिल्पकला का बहुत बेजोड़ उदाहरण है। रथ बनाने की यह पारंपरिक कला सदियों से बिना बदले चली आ रही है।

रथों के निर्माण के लिए लकड़ियों का चयन अक्षय तृतीया के दिन से शुरू होता है। इसके लिए केवल विशेष प्रजाति के पेड़ों की लकड़ियों को ही चुना जाता है। रथ बनाने के लिए ज्यादातर नीम और असन के मजबूत पेड़ों का उपयोग होता है।

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इन मंत्रों का जाप करें

रथ यात्रा के पावन दर्शन करते समय इन मंत्रों का जाप करना बहुत कल्याणकारी माना गया है:

महाप्रभु जगन्नाथ का महामंत्र नीलाचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः॥
मंत्र का अर्थ: नीलाचल यानी पुरी धाम में निवास करने वाले नित्य स्वरूप परमपिता परमात्मा, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान भगवान जगन्नाथ को मेरा बारंबार नमस्कार है।

भगवान जगन्नाथ का ध्यान मंत्र जगन्नाथ स्वामी नयना पथ गामी भवतु मे॥
मंत्र का सरल अर्थ: हे पूरे ब्रह्मांड के स्वामी भगवान जगन्नाथ! आप सदैव मेरी आँखों के सामने रहें और मुझे हमेशा सही मार्ग पर चलने की सच्ची प्रेरणा दें।

FAQ

  1. साल 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा कब से शुरू हो रही है और यह कितने दिनों तक चलती है?
    पंचांग और पुरी श्रीमंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार, साल 2026 में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा मुख्य रूप से 16 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रही है। यह पावन धार्मिक उत्सव कुल नौ दिनों तक पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है और 27 जुलाई 2026 को समाप्त होगा। इस दौरान भगवान अपनी मौसी के घर रहते हैं।
  2. जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भक्तों के लिए कौन से काम पूरी तरह वर्जित या मना हैं?
    यात्रा के दौरान मंदिर के महाप्रसाद का अनादर करना या उसे थाली में जूठा छोड़ना महापाप है। इसके अलावा रथ खींचते समय अन्य भक्तों के साथ धक्का-मुक्की करना, गुस्सा करना या अपशब्द बोलना सख्त मना है। रथ के करीब जाने के लिए पास में चमड़े की चीजें रखना और मांस-मदिरा का सेवन करना पूरी तरह वर्जित है।
  3. पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ के रथ का क्या नाम है और उसकी क्या पहचान है?
    पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ के भव्य रथ का नाम 'नंदीघोष रथ' है। यह रथ यात्रा में शामिल होने वाले तीनों रथों में सबसे ऊंचा और विशाल होता है। भगवान जगन्नाथ के इस विशेष रथ की मुख्य पहचान यह है कि इसे पूरी तरह से पीले और लाल रंग के सुंदर कपड़ों और कलाकृतियों से सजाया जाता है।
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