आखिर क्यों शिवजी ने गुस्से में आकर सूर्य देव पर चला दिया था अपना त्रिशूल
Kaushiki | Jul 29, 2026, 14:18 IST
Lord Shiv And Surya Dev
ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने सूर्य देव पर त्रिशूल से प्रहार कर दिया था। इससे सूर्य देव रथ से गिर गए और संसार में अंधेरा छा गया। बाद में शिवजी ने सूर्य देव को जीवित किया।
Surya Dev Shiv Katha: सनातन धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। रविवार का दिन भगवान सूर्य की उपासना के लिए समर्पित है। इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से आरोग्यता मिलती है। साथ ही जीवन में सफलता और तेज की प्राप्ति होती है।
सूर्य देव से जुड़ी कई पौराणिक और अद्भुत कथाएं ग्रंथों में मिलती हैं। ऐसी ही एक बेहद दिलचस्प कथा ब्रह्म वैवर्त पुराण में दर्ज है। यह कथा भगवान शिव और सूर्य देव के बीच हुए एक प्रसंग से जुड़ी है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि एक बार महादेव सूर्य देव से क्रोधित हो गए थे?
बात इतनी बढ़ गई थी कि शिवजी ने त्रिशूल चला दिया था। त्रिशूल लगते ही सूर्य देव अपने दिव्य रथ से नीचे गिर पड़े। सूर्य देव के नीचे गिरते ही पूरे ब्रह्मांड में गहरा अंधेरा छा गया था। इस घटना के बाद कश्यप ऋषि ने शिवजी को एक श्राप भी दिया था। आइए जानें पौराणिक कथाएं....
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ब्रह्म वैवर्त पुराण के मुताबिक, प्राचीन काल में दो दैत्य भाई थे। इन असुरों का नाम माली और सुमाली था। दोनों असुरों ने अज्ञानता में भगवान सूर्य देव का भारी अपमान किया था। इस अपराध के कारण दोनों भयंकर शारीरिक पीड़ा झेल रहे थे।
वे हर दिन असहनीय दर्द और बीमारी से तड़प (त्रिशूल से हमला)रहे थे। किसी भी औषधि से उनकी यह शारीरिक पीड़ा दूर नहीं हो रही थी। निराश होकर दोनों असुरों ने एक बड़ा फैसला लिया। वे मदद मांगने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे।
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माली और सुमाली ने महादेव को अपनी पूरी व्यथा सुनाई। असुरों का दर्द सुनकर भगवान शिव को अत्यंत क्रोध आ गया। शिवजी ने सूर्य देव के इस काम को अनुचित माना। क्रोध में आकर भोलेनाथ ने अपना दिव्य त्रिशूल उठा लिया।
शिवजी ने सूर्य देव की ओर निशाना साधकर त्रिशूल चला दिया। त्रिशूल का प्रहार इतना तीव्र था कि सूर्य देव गिर पड़े। सूर्य देव अपने सात घोड़ों वाले रथ से नीचे आ गिरे। वे अचेत होकर धरती पर गिर पड़े थे।
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जैसे ही सूर्य देव अपने रथ से नीचे गिरे, पूरे ब्रह्मांड की रोशनी अचानक से गायब हो गई। समस्त लोकों में केवल भयानक और घना अंधेरा छा गया। प्रकाश के बिना संसार का जीवन चक्र पूरी तरह रुक गया।
सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि इस स्थिति से घबरा गए। चारों तरफ हाहाकार मच गया और सब परेशान हो गए। ब्रह्मांड की ऐसी दुर्दशा देखकर हर कोई चिंतित हो उठा। सबने भगवान शिव से प्रार्थना करने का मन बनाया।
![read interesting story when surya dev faced anger of lord shiva in hindi | Surya Dev: जब सूर्य देव हुए थे भगवान शिव के क्रोध का शिकार, छा गया था सृष्टि में]()
सूर्य देव के पिता महर्षि कश्यप को इस घटना का पता चला। अपने पुत्र की ऐसी दशा देखकर वे बहुत दुखी हुए। अत्यंत दुखी होकर कश्यप ऋषि ने शिवजी को श्राप दे दिया। उन्होंने कहा कि तुम्हें भी पुत्र शोक सहन करना पड़ेगा।
इसी श्राप के कारण आगे चलकर एक बड़ी घटना घटी। भगवान शिव ने अपने पुत्र श्री गणेश का सिर काटा था। पौराणिक ग्रंथों में इस श्राप का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। कश्यप ऋषि के वचन काल चक्र के मुताबिक सच साबित हुए।
![भगवान शिव ने सूर्य देव से युद्ध क्यों किया? | Why Lord Shiva Fought With Surya Dev?]()
संसार में अंधेरा देखकर भगवान शिव का क्रोध शांत हो गया। उन्हें अपनी भूल और स्थिति का अहसास हुआ। महादेव ने तुरंत सूर्य देव को नया जीवनदान दे दिया।
जीवनदान मिलते ही सूर्य देव फिर से जीवित हो उठे। सूर्य देव अपने दिव्य रथ पर फिर से सवार हो गए। उनके रथ पर बैठते ही संसार में रोशनी लौट आई। सृष्टि का चक्र फिर से सामान्य रूप से चलने लगा। सभी देवताओं ने राहत की सांस ली और प्रसन्न हुए।
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इसके बाद ब्रह्मा जी ने माली और सुमाली को सही मार्ग दिखाया। उन्होंने असुरों को सूर्य देव की उपासना करने की सलाह दी। असुरों ने भक्ति भाव से सूर्य देव की पूजा शुरू की। उन्होंने सूर्य देव के मंत्रों का जाप किया।
सूर्य देव ने प्रसन्न होकर असुरों को क्षमा कर दिया। माली और सुमाली पूरी तरह रोग मुक्त हो गए। सूर्य देव की कृपा से उनका सारा शारीरिक कष्ट मिट गया। इस प्रकार यह पौराणिक कथा पूरी तरह संपन्न होती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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सूर्य देव से जुड़ी कई पौराणिक और अद्भुत कथाएं ग्रंथों में मिलती हैं। ऐसी ही एक बेहद दिलचस्प कथा ब्रह्म वैवर्त पुराण में दर्ज है। यह कथा भगवान शिव और सूर्य देव के बीच हुए एक प्रसंग से जुड़ी है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि एक बार महादेव सूर्य देव से क्रोधित हो गए थे?
बात इतनी बढ़ गई थी कि शिवजी ने त्रिशूल चला दिया था। त्रिशूल लगते ही सूर्य देव अपने दिव्य रथ से नीचे गिर पड़े। सूर्य देव के नीचे गिरते ही पूरे ब्रह्मांड में गहरा अंधेरा छा गया था। इस घटना के बाद कश्यप ऋषि ने शिवजी को एक श्राप भी दिया था। आइए जानें पौराणिक कथाएं....
Lord Shiv And Surya Dev
माली और सुमाली असुरों की कथा
वे हर दिन असहनीय दर्द और बीमारी से तड़प (त्रिशूल से हमला)रहे थे। किसी भी औषधि से उनकी यह शारीरिक पीड़ा दूर नहीं हो रही थी। निराश होकर दोनों असुरों ने एक बड़ा फैसला लिया। वे मदद मांगने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे।
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भगवान शिव का भयंकर क्रोध
शिवजी ने सूर्य देव की ओर निशाना साधकर त्रिशूल चला दिया। त्रिशूल का प्रहार इतना तीव्र था कि सूर्य देव गिर पड़े। सूर्य देव अपने सात घोड़ों वाले रथ से नीचे आ गिरे। वे अचेत होकर धरती पर गिर पड़े थे।
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पूरे संसार में छा गया अंधेरा
सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि इस स्थिति से घबरा गए। चारों तरफ हाहाकार मच गया और सब परेशान हो गए। ब्रह्मांड की ऐसी दुर्दशा देखकर हर कोई चिंतित हो उठा। सबने भगवान शिव से प्रार्थना करने का मन बनाया।
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कश्यप ऋषि का शिवजी को श्राप
इसी श्राप के कारण आगे चलकर एक बड़ी घटना घटी। भगवान शिव ने अपने पुत्र श्री गणेश का सिर काटा था। पौराणिक ग्रंथों में इस श्राप का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। कश्यप ऋषि के वचन काल चक्र के मुताबिक सच साबित हुए।
भगवान शिव ने सूर्य देव से युद्ध क्यों किया? | Why Lord Shiva Fought With Surya Dev?
शिवजी ने दिया नया जीवनदान
जीवनदान मिलते ही सूर्य देव फिर से जीवित हो उठे। सूर्य देव अपने दिव्य रथ पर फिर से सवार हो गए। उनके रथ पर बैठते ही संसार में रोशनी लौट आई। सृष्टि का चक्र फिर से सामान्य रूप से चलने लगा। सभी देवताओं ने राहत की सांस ली और प्रसन्न हुए।
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असुरों को मिला पीड़ा से छुटकारा
सूर्य देव ने प्रसन्न होकर असुरों को क्षमा कर दिया। माली और सुमाली पूरी तरह रोग मुक्त हो गए। सूर्य देव की कृपा से उनका सारा शारीरिक कष्ट मिट गया। इस प्रकार यह पौराणिक कथा पूरी तरह संपन्न होती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार शिवजी ने सूर्य देव पर त्रिशूल क्यों चलाया था?
माली और सुमाली नाम के असुरों ने सूर्य देव का अपमान किया था, जिससे वे शारीरिक कष्ट झेल रहे थे। जब वे शिवजी की शरण में पहुँचे, तो शिवजी ने क्रोधित होकर सूर्य देव पर त्रिशूल चला दिया। - कश्यप ऋषि ने भगवान शिव को क्या श्राप दिया था?
अपने पुत्र सूर्य देव की दुर्दशा देखकर कश्यप ऋषि ने शिवजी को पुत्र शोक झेलने का श्राप दिया था। इसी श्राप के प्रभाव से बाद में शिवजी द्वारा गणेश जी का सिर कटा था। - माली और सुमाली को शारीरिक पीड़ा से कैसे मुक्ति मिली?
ब्रह्मा जी के कहने पर माली और सुमाली ने सूर्य देव की सच्ची भक्ति और पूजा-अर्चना की। सूर्य देव के प्रसन्न होने पर दोनों असुरों को शारीरिक कष्ट और बीमारी से मुक्ति मिल गई।
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