सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति का महासंयोग, एसे करें शिव-सूर्य की आराधना
Kaushiki | Jun 14, 2026, 13:14 IST
somvati amavasya mithun sankranti 2026
15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। यह खगोलीय घटना 396 साल बाद आई है। इस दिन किए गए स्नान और दान का पुण्य अक्षय होता है। साथ ही सूर्य के राशि परिवर्तन से 12 राशियों पर विशेष असर पड़ेगा।
Somvati Amavasya 2026: धार्मिक और खगोलीय लिहाज से 15 जून 2026 का दिन बहुत ही खास है। इस दिन सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति दोनों एक साथ पड़ रही हैं। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, ये महासंयोग पूरे 396 साल बाद आया है। इससे पहले ऐसा दुर्लभ योग साल 1630 में देखा गया था। अब इसके बाद ये अवसर सीधे 301 साल बाद यानी वर्ष 2327 में ही आएगा।
सनातन परंपरा में इस पावन दिन का बहुत अधिक धार्मिक महत्व माना गया है। इसके साथ ही सूर्य देव वृष राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस बड़े राशि परिवर्तन से सभी 12 राशियों के जीवन पर सीधा और गहरा असर पड़ेगा। आइए जानें इस महायोग का पूरा गणित।
![Somvati Amavasya 2026]()
सनातन परंपरा में अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित होता है। सोमवार होने से इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। साथ ही मिथुन संक्रांति सूर्य की आराधना का खास दिन है। पुराणों के मुताबिक, इस दिन किए गए अनुष्ठान का फल अक्षय होता है। यानी इस पुण्य फल का कभी भी नाश नहीं होता है। यह दिन शिव-पार्वती की आराधना के लिए भी बहुत श्रेष्ठ है।
![Somvati Amavasya 2026]()
सनातन परंपरा में 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। पंचांग और ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, ऐसा अद्भुत खगोलीय संरेखण पूरे 396 साल बाद देखने को मिल रहा है। यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मानव जीवन के लिए एक महान वरदान की तरह माना जाता है।
भारतीय संस्कृति में अमावस्या की तिथि मुख्य रूप से पितरों की तृप्ति, श्राद्ध और तर्पण के लिए समर्पित होती है। जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या का नाम दिया जाता है।
सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है। इसलिए इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में अटूट सुख-शांति आती है और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
इसके साथ ही, इसी दिन मिथुन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा। जब सूर्य देव अपने रथ पर सवार होकर वृष राशि से निकलकर अपने मित्र बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करते हैं, तो उसे मिथुन संक्रांति कहते हैं।
सनातन धर्म में संक्रांति काल को साक्षात सूर्य नारायण की पूजा, अर्घ्य और वंदना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। स्कंद पुराण के मुताबिक, इस महासंयोग के दौरान पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान, मंत्र जप और अपनी क्षमता मुताबिक दान-पुण्य करने से मिलने वाला फल अक्षय हो जाता है।
अक्षय का सीधा अर्थ है - एक ऐसा पुण्य फल जिसका ब्रह्मांड में कभी भी नाश नहीं होता। इस पावन दिन पर पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करने और दीप जलाने से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। साथ ही, कुंडली में मौजूद गंभीर से गंभीर पितृ दोष भी शांत हो जाते हैं और पूर्वजों का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अमावस्या तिथि 14 जून 2026 को दोपहर 12:20 बजे शुरू हो जाएगी। यह 15 जून 2026 को सुबह 08:24 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के कारण 15 जून को ही व्रत और दान किया जाएगा।
![Adhik Maas Amavasya and Mithun Sankranti june mein ek hi din Malmaas ka ye khas sanyog अधिकमास की अमावस्या,मिथुन संक्रांति दोनों एक ही दिन, किन राशियों को मिथुन संक्रांति से लाभ ...]()
सूर्य 15 जून को दोपहर 12:49 बजे मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। वे 16 जुलाई तक इसी राशि में बने रहेंगे। सूर्य को नेतृत्व और करियर का कारक ग्रह माना जाता है। इससे सभी 12 राशियों पर क्या प्रभाव होगा आइए जानें...
![June 15: Somvati Amavasya & Mithun Sankranti; Akshay Punya Yog After 301 Yrs]()
सोमवती अमावस्या के साथ समाप्त होगा अधिक मास, 19 जून से शुरू होंगे मांगलिक कार्य
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सनातन परंपरा में इस पावन दिन का बहुत अधिक धार्मिक महत्व माना गया है। इसके साथ ही सूर्य देव वृष राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस बड़े राशि परिवर्तन से सभी 12 राशियों के जीवन पर सीधा और गहरा असर पड़ेगा। आइए जानें इस महायोग का पूरा गणित।
Somvati Amavasya 2026
सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति का महत्व
Somvati Amavasya 2026
सोमवती अमावस्या-मिथुन संक्रांति का महासंयोग
भारतीय संस्कृति में अमावस्या की तिथि मुख्य रूप से पितरों की तृप्ति, श्राद्ध और तर्पण के लिए समर्पित होती है। जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या का नाम दिया जाता है।
सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है। इसलिए इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में अटूट सुख-शांति आती है और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
सूर्य आराधना का महापर्व
सनातन धर्म में संक्रांति काल को साक्षात सूर्य नारायण की पूजा, अर्घ्य और वंदना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। स्कंद पुराण के मुताबिक, इस महासंयोग के दौरान पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान, मंत्र जप और अपनी क्षमता मुताबिक दान-पुण्य करने से मिलने वाला फल अक्षय हो जाता है।
अक्षय का सीधा अर्थ है - एक ऐसा पुण्य फल जिसका ब्रह्मांड में कभी भी नाश नहीं होता। इस पावन दिन पर पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करने और दीप जलाने से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। साथ ही, कुंडली में मौजूद गंभीर से गंभीर पितृ दोष भी शांत हो जाते हैं और पूर्वजों का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि
- सुबह जल्दी उठकर गंगाजल मिले पानी से स्नान करें।
- उगते हुए सूर्य को जल का अर्घ्य जरूर दें।
- शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र चढ़ाकर पूजा करें।
- पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं।
- जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और फल का दान करें।
Adhik Maas Amavasya and Mithun Sankranti june mein ek hi din Malmaas ka ye khas sanyog अधिकमास की अमावस्या,मिथुन संक्रांति दोनों एक ही दिन, किन राशियों को मिथुन संक्रांति से लाभ ...
सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश और राशियों पर प्रभाव
- मेष राशि (Aries)
प्रभाव: सूर्य का यह गोचर आपके साहस, पराक्रम और आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि करेगा, जिससे भाई-बहनों से रिश्ते सुधरेंगे।
उपाय: रोज सुबह उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे से जल का अर्घ्य दें। - वृषभ राशि (Taurus)
प्रभाव: आपकी आय बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे, लेकिन आपको बातचीत में कठोरता से बचते हुए वित्तीय मामलों में सतर्क रहना होगा।
उपाय: रविवार के दिन जरूरतमंद लोगों को गेहूं या लाल कपड़े का दान करें। - मिथुन राशि (Gemini)
प्रभाव: सूर्य आपकी ही राशि मिथुन (Gemini) में आ रहे हैं, जिससे आपके व्यक्तित्व और करियर में तरक्की होगी, परंतु गर्मी के कारण स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
उपाय: प्रतिदिन गायत्री मंत्र का 21 बार स्पष्ट जाप करें। - कर्क राशि (Cancer)
प्रभाव: आपके खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है, इसलिए अनावश्यक मानसिक तनाव से बचें और कोई भी निवेश सोच-समझकर ही करें।
उपाय: भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें। - सिंह राशि (Leo)
प्रभाव: यह समय आपकी इच्छाओं की पूर्ति और बड़े आर्थिक लाभ का है, समाज में आपकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान बढ़ेगा।
उपाय: आदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करना आपके लिए अत्यंत शुभ रहेगा। - कन्या राशि (Virgo)
प्रभाव: कार्यक्षेत्र और करियर में बड़ी उन्नति के योग हैं, आपको नई जिम्मेदारी मिल सकती है और अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा।
उपाय: रविवार के दिन गाय को अपने हाथों से गुड़ और भीगा हुआ गेहूं खिलाएं। - तुला राशि (Libra)
प्रभाव: भाग्य का आपको भरपूर साथ मिलेगा, साथ ही उच्च शिक्षा, लंबी यात्राओं और धार्मिक कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी।
उपाय: अपने पिता या गुरु का सम्मान करें और सुबह घर से निकलते समय उनके चरण स्पर्श करें। - वृश्चिक राशि (Scorpio)
प्रभाव: जीवन में अचानक कुछ अप्रत्याशित बदलाव आ सकते हैं, सेहत को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतें और जोखिम भरे फैसलों से बचें।
उपाय: प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और तांबे के बर्तन का उपयोग करें। - धनु राशि (Sagittarius)
प्रभाव: व्यापारिक पार्टनरशिप में मुनाफे के नए अवसर मिलेंगे, लेकिन जीवनसाथी के साथ वैचारिक टकराव से बचें।
उपाय: भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें तुलसी दल तथा पीले फूल चढ़ाएं। - मकर राशि (Capricorn)
प्रभाव: यह समय आपको कोर्ट-कचहरी या विवादित मामलों में बड़ी राहत देगा और आप अपने शत्रुओं पर आसानी से विजय पाएंगे।
उपाय: रविवार के दिन पक्षियों को दाना डालें और नमक का सेवन कम करें। - कुंभ राशि (Aquarius)
प्रभाव: विद्यार्थियों के लिए यह समय शिक्षा और प्रतियोगिता में बड़ी प्रगति लेकर आएगा, साथ ही आपकी रचनात्मकता बढ़ेगी।
उपाय: पीपल के पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और सूर्य देव के मंत्रों का मानसिक जप करें। - मीन राशि (Pisces)
प्रभाव: आपको अपने घर, संपत्ति और माता की सेहत पर विशेष ध्यान देना होगा, कार्य और घरेलू जीवन में संतुलन बनाकर चलें।
उपाय: पानी में थोड़ा सा गंगाजल और चंदन मिलाकर स्नान करें।
June 15: Somvati Amavasya & Mithun Sankranti; Akshay Punya Yog After 301 Yrs
क्या करें और क्या न करें इस खास दिन
- सात्विक भोजन अपनाएं:
इस खास दिन (पितृ मोक्ष अमावस्या) पर अपने मन और शरीर को शुद्ध रखने के लिए तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का पूरी तरह से त्याग करें। - वाणी और व्यवहार पर काबू रखें:
किसी भी तरह के वाद-विवाद से बचें. पूरे दिन क्रोध, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से खुद को दूर रखें। - पवित्र स्नान और अर्घ्य:
ज्येष्ठ अमावस्या परसुबह जल्दी उठकर पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और उसके बाद उगते हुए सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल का अर्घ्य जरूर दें। - पितृ दोष से मुक्ति के उपाय:
यह दिन पूर्वजों को याद करने का है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें और उनके नाम पर तर्पण या पिंड दान करें। - महापुण्य के लिए दान करें:
अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न (चावल, गेहूं), सफेद वस्तुएं (दूध, दही), तिल, वस्त्र, छाता या पानी के घड़े का दान करें। - पीपल की 108 बार परिक्रमा:
पीपल के पेड़ में त्रिदेवों का वास माना जाता है। इस दिन पीपल पर जल चढ़ाकर उसकी परिक्रमा करने से मानसिक तनाव दूर होता है और सुख-शांति आती है। - शिव-पार्वती और विष्णु पूजा:
सोमवार का योग होने से शिवलिंग पर कच्चा दूध और बिल्वपत्र चढ़ाएं। साथ ही भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले फूल अर्पित कर आशीर्वाद लें।
FAQ
- सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान का क्या पुण्य है?
पुराणों के अनुसार, इस दिन किए गए स्नान और दान का पुण्य अक्षय होता है, जो कभी नष्ट नहीं होता है। - सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश कब हो रहा है?
सूर्य 15 जून 2026 को दोपहर 12:49 बजे मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। - सोमवती अमावस्या पर कौन से विशेष योग बन रहे हैं?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं, जो पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़ा देते हैं।
सोमवती अमावस्या के साथ समाप्त होगा अधिक मास, 19 जून से शुरू होंगे मांगलिक कार्य
कब है साल की पहली सोमवती अमावस्या, घर में सुख-समृद्धि के लिए जरूर करें ये काम
सूर्य-बुध की युति से बनेगा बुधादित्य राजयोग, इन 4 राशि वालों की टेंशन होगी दूर
इस दिन लगेगा 21वीं सदी का दूसरा सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण, 6 मिनट तक अंधेरे में डूबेगी दुनिया
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