महाकाल भस्म आरती बुकिंग नियम सख्त: एक नंबर से 3 महीने में एक बार होगी बुकिंग
Manya Jain | Jun 22, 2026, 13:33 IST
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महाकाल मंदिर में भस्म आरती की बुकिंग के नियम सख्त हुए। अब एक मोबाइल नंबर से 3 महीने में केवल एक बार ही बुकिंग होगी। वीआईपी और प्रोटोकॉल श्रद्धालुओं पर भी यह नियम लागू रहेगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- उज्जैन महाकाल मंदिर में भस्म आरती की बुकिंग के नियम बदल दिए गए हैं।
- अब एक मोबाइल नंबर से तीन माह में केवल एक बार अनुमति मिलेगी।
- यह नियम प्रोटोकॉल से आने वाले श्रद्धालुओं पर भी लागू है।
- शिकायतें बढ़ने के बाद मंदिर समिति ने यह कदम उठाया है।
- मंदिर एडमिनिस्ट्रेटर ने कहा कि यह व्यवस्था पहले से थी, अब इसे और सख्ती से लागू किया जा रहा है।
क्यों लेना पड़ा यह फैसला
कुछ श्रद्धालु और प्रोटोकॉल से जुड़े लोग हर महीने एक ही मोबाइल नंबर से बुकिंग करा लेते थे। इससे आम श्रद्धालुओं को बार-बार निराश होना पड़ता था।
पुराना नियम क्या था
साल 2024 में शिकायतें बढ़ने पर तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह बाद ही दोबारा बुकिंग की अनुमति देने का फैसला किया था। लेकिन यह व्यवस्था कुछ समय बाद बंद कर दी गई।
अब क्या है नया नियम
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खास बात यह है कि यह नियम प्रोटोकॉल के जरिए आने वाले श्रद्धालुओं पर भी लागू होगा। यानी कोई भी हर महीने एक ही नंबर से बुकिंग नहीं करा पाएगा।
एडमिनिस्ट्रेटर ने क्या कहा
आम श्रद्धालुओं को क्या फायदा होगा
अब हर किसी को बराबर मौका मिलेगा। जो श्रद्धालु एक बार भस्म आरती में शामिल हो चुके हैं, उन्हें तीन माह तक इंतजार करना होगा।
क्या यह नियम काफी है
मंदिर समिति की ओर से अभी यह नहीं बताया गया है कि आधार आधारित वेरिफिकेशन (Verification) कब लागू होगी। इस पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
FAQ
- महाकाल भस्म आरती की बुकिंग के नए नियम क्या हैं?
अब एक मोबाइल नंबर से तीन माह में केवल एक बार भस्म आरती की अनुमति मिलेगी। यह नियम सभी श्रद्धालुओं पर लागू है, चाहे वे ऑनलाइन बुकिंग करें या प्रोटोकॉल से आएं। - क्या प्रोटोकॉल से आने वाले लोगों को भी यह नियम मानना होगा?
हां, मंदिर समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रोटोकॉल से जुड़े मोबाइल नंबरों पर भी यही नियम लागू होगा। कोई भी हर महीने एक ही नंबर से बुकिंग नहीं करा सकेगा। - यह नियम पहले क्यों बंद हो गया था?
साल 2024 में तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने यह नियम लागू किया था। लेकिन कुछ समय बाद यह बंद हो गया था। शिकायतें फिर बढ़ने पर मंदिर समिति ने इसे दोबारा और सख्ती से लागू करने का फैसला लिया।
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