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Photograph: (THESOOTR)
News in short
- वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एक्ट के तहत जांच।
- एसडीएम जांच में खुलासा मेमोरियल अस्पताल की इच्छा, बिक्री की अनुमति नहीं।
- दानपत्र में कथित रूप से जोड़ी गई लाइन जब चाहें बेच सकते हैं।
- रजिस्ट्री के समय डॉ. हेमलता एम्बुलेंस से लाई गईं, सहमति की स्थिति पर सवाल।
- पुलिस अधीक्षक को सूचना-सुमित और प्राची जैन पर आपराधिक प्रकरण की तैयारी।
News in detail
जबलपुर की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की संपत्ति से जुड़े मामले का जल्द ही पटाक्षेप होने वाला है। एसडीएम जांच में दानपत्र की शर्तों में हेरफेर और सहमति पर सवाल सामने आए हैं। 'द सूत्र' से बात करते हुए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि अब आपराधिक कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
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दान या धोखा? कलेक्टर ने खोली जांच की परतें
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की 1100 स्क्वायर फीट संपत्ति के दानपत्र को लेकर प्रशासन सक्रिय हो गया है। जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने 'द सूत्र' को जानकारी दी कि ऐसे मामलों की जांच का अधिकार कलेक्टर और एसडीएम को है। एसडीएम की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि डॉ. हेमलता की मंशा अपनी संपत्ति पर मेमोरियल अस्पताल संचालित करने की थी, न कि उसे बेचने की।
दानपत्र में ‘बिक्री’ की लाइन ने खड़े किए सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि रजिस्ट्री के दौरान दानपत्र में एक अतिरिक्त लाइन जोड़ी गई। इसमें संपत्ति को भविष्य में बेचने की अनुमति का उल्लेख था। डॉ. हेमलता ने ऐसे किसी अधिकार दिए जाने से साफ इनकार किया है। यही बिंदु अब पूरे मामले का केंद्र बन गया है। कलेक्टर के अनुसार इस मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक को दे दी गई है। जल्द ही डॉ. सुमित जैन एवं प्राची जैन के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
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एम्बुलेंस, बिना गवाह और संदिग्ध रजिस्ट्री
सबसे गंभीर सवाल रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे हैं। बताया गया कि जिस दिन दानपत्र निष्पादित हुआ, उस दिन डॉ. हेमलता को एम्बुलेंस में रजिस्ट्री कार्यालय लाया गया था। उनकी शारीरिक स्थिति बेहद नाजुक थी। इसके बावजूद रजिस्ट्री पूरी की गई। हैरानी की बात यह है कि दानपत्र में उनकी ओर से कोई गवाह नहीं था, जबकि उनकी बहन शांति तिवारी और जीजा मौके पर मौजूद थे। अब जांच इस एंगल से भी आगे बढ़ रही है कि सब रजिस्ट्रार और कथित दानपाती अभय जैन की भूमिका क्या थी।
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लालच में रची गई साजिश
कुल मिलाकर अब तक की जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि संपत्ति के लालच में डॉ. हेमलता श्रीवास्तव के साथ धोखाधड़ी की गई। डॉ. हेमलता के वीडियो बयान में कहा गया था कि उनसे अस्पताल के कागज दिखाकर प्रॉपर्टी के दस्तावेजों पर साइन करवाए गए थे। प्रशासनिक जांच और संभावित आपराधिक कार्रवाई के बाद यह मामला पारिवारिक विवाद से बढ़कर कानूनी लड़ाई बन गया है।
IMA की डॉक्टर रिचा शर्मा के अनुसार FSL रिपोर्ट आना बाकी है। रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि डॉक्टर हेमलता को ऐसी क्या चीज दी जा रही थी जिससे उनकी चाय भी कड़वी लगने लगी और उनकी मानसिक स्थिति कमजोर हुई। अब जबलपुर की नजरें इस पर हैं कि इस कथित ‘दान’ की सच्चाई कब सामने आएगी।
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